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महज 5 साल की उम्र में अपने नाम दर्ज कराए 9 रिकॉर्ड, केरल की इस बच्ची पर माता-पिता को है गर्व

इंसान की उम्र केवल एक संख्या भर है। केजी-2 में पढ़ने वाली महालक्ष्मी आनंद इसका शानदार उदाहरण हैं। महज 5 साल में उन्होंने वो कर दिखाया है जो इंसान अपनी पूरी जिंदगी में नहीं कर पाता।

तिरुवनंतपुरम, 15 अगस्त। इंसान की उम्र केवल एक संख्या भर है। केजी-2 में पढ़ने वाली महालक्ष्मी आनंद इसका शानदार उदाहरण हैं। महज 5 साल में उन्होंने वो कर दिखाया है जो इंसान अपनी पूरी जिंदगी में नहीं कर पाता। कोल्लम की मूल निवासी महालक्ष्मी अपने माता-पिता के साथ अबू धाबी में रहती हैं और उन्होंने इस छोटी सी उम्र में ही अपने नाम 9 रिकॉर्ड दर्ज करा लिए हैं।

माता-पिता ने डेढ़ साल की उम्र में ही उनके हुनर को पहचान लिया था

माता-पिता ने डेढ़ साल की उम्र में ही उनके हुनर को पहचान लिया था

महालक्ष्मी आनंद कुमार और नीना आनंद की इकलौती बेटी हैं। उनके पिता इंजीनियर हैं। किसी चीज को एक बार पढ़कर उसे हमेशा के लिए याद कर लेने की क्षमता को उनके माता-पिता ने डेढ़ साल की उम्र में ही पहचान लिया था। वर्तमान में उनके नाम तीन श्रेणियों में विश्व रिकॉर्ड हैं
1. उन्हें ज्यादा से ज्यादा आविष्कारकों के नाम और उनके आविष्कार याद हैं।
2. सबसे युवा और सबसे तेज मात्र 54 सेकंड में सबसे अधिक संख्या में का रिकॉर्ड भी उनके नाम है।
3. इसके अलावा सबसे कम उम्र में सबसे तेज मात्र 26 सेकेंड में भारत के राज्यों और उनकी राजधानियों को सुनाने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है।

5 साल की उम्र में बनाया पहला रिकॉर्ड

5 साल की उम्र में बनाया पहला रिकॉर्ड

उन्होंने महज 5 साल की उम्र में सबसे अधिक आविष्कारकों और उनके आविष्कार बताकर पहला रिकॉर्ड बनाया था। इस श्रेणी में उनके नाम एक राष्ट्रीय रिकॉर्ड (इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड) और तीन अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड हैं।

उन्होंने दूसरा रिकॉर्ड सबसे कम उम्र में सबसे तेज भारतनाट्यम मुद्राओं और भावों का प्रदर्शन कर और उन्हें सुनाना कर अपने नाम किया। वह 53 सेकेंड में भारतनाट्यम की कुल 81 में से 55 मुद्राओं का प्रदर्शन कर सकती हैं। इस श्रेणी में उनके नाम एक राष्ट्रीय और तीन अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड हैं।

बचपन से ही था चीजों को याद करने का शौक

बचपन से ही था चीजों को याद करने का शौक

महालक्ष्मी के मां नीना ने कहा कि बचपन से ही उसे याद करने का शौक था। हमें उसकी क्षमता का ऐहसास तब हुआ जब उसने उन सब चीजों को सुनाना सुरू कर दिया जो उसे सिखाया या किताबों में दिखाया गया। जब वह डेढ़ साल की थी, तब मैं एक सरकारी एग्जाम की तैयारी कर रही थी। वह मेरे पास आकर बैठ जाया करती थी। मैं उसे वैज्ञानिक और उनके आविष्कारों के बारे में पढ़ाती और आश्चर्य की बात यह थी कि वह सब कुछ तुरंत याद कर लेती थी। जब दो दिन बाद उससे पूछा जाता तो वह उनका ठीक ठीक जवाब देती।

फोटो साभार- https://indiabookofrecords.in/

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