खालिस्तान के मुद्दे पर ऑस्ट्रेलिया में सड़कों पर हिंसा

एक तरफ पीला झंडा लिए लोग थे जो 'हिंदुस्तान मुर्दाबाद' के नारे लगा रहे थे तो दूसरी तरफ तिरंगा लिए लोगों का एक समूह था जो 'खालिस्तान मुर्दाबाद' के नारे लगाता हुआ आगे बढ़ रहा था. एकाएक ये दोनों गुट एक दूसरे पर टूट पड़े. दोनों तरफ के लोगों ने अपने-अपने झंडों को डंडे बना लिया और जो जहां मिला उसे मारने लगे. पुलिस ने जब बीच-बचाव करने की कोशिश की तो कुछ पुलिसवालों को भी धकिया दिया गया. उन्हें भी मामूली चोटें आईं. लेकिन कुछ ही पलों में भारतीय तिरंगे वाले गुट को वहां से खदेड़ दिया गया.
यह मंजर 29 जनवरी को ऑस्ट्रेलिया के शहर मेलबर्न में नजर आया. मेलबर्न के केंद्र में स्थित फेडरेशन स्क्वेयर पर खालिस्तान समर्थकों और विरोधियों के बीच यह झड़प तब हुई जब वहां भारत में प्रतिबंधित संगठन 'सिख्स फॉर जस्टिस'के आह्वान पर लोग कथित जनमत संग्रह में हिस्सा लेने आए थे.
मतदान से पहले अरदास की गई. सुबह 9 बजे ही मतदान केंद्र के बाहर लंबी लाइन लग चुकी थी. इस कथित जनमत संग्रह के लिए बड़ी संख्या में लोग मेलबर्न के फेडरेशन स्क्वेयर पहुंचे थे. कई लोग तो दूरे शहरों से भी आए थे. वोट डालने वाले एक युवक ने बताया, "यह हमारे अपने देश के लिए वोटिंग है इसलिए इसमें हिस्सा लेना बहुत जरूरी था."
22 साल की पर्यावरण ऐक्टिविस्ट की गिरफ्तारी का हो रहा है विरोध
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले खालिस्तान के जानेमाने समर्थक अमरजीत सिंह खालिस्तानी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह एक ऐतिहासिक दिन है. उन्होंने कहा, "आज यहां मेलबर्न में इतिहास बनाया जा रहा है. आने वाली पीढ़ियां कहा करेंगी कि मेलबर्न में इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने खालिस्तान के समर्थन में मतदान किया था."
हालांकि कुछ ही देर में फेडरेशन स्क्वेयर पर माहौल बदल गया और खालिस्तान समर्थक व विरोधियों के बीच झड़पें शुरू हो गईं. जब भारतीय मूल के लोग सड़कों पर दौड़ते हुए एक दूसरे को मार रहे थे तो विदेशी सकपकाए हुए उन्हें देख रहे थे.
कुछ लोगों के हाथों में तलवारें भी देखी गईं. हिंसक झड़पों के बाद पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया.
पहले से थी आशंका
मेलबर्न में कथित खालिस्तान रेफरेंडम का ऐलान होने के बाद से ही इस बात की आशंका जताई जा रही थी कि दो पक्षों के बीच हिंसा हो सकती है. जनवरी की शुरुआत में ही जब शहर में जगह-जगह खालिस्तान समर्थक पोस्टर लगाए गए थे तो सोशल मीडिया पर तनाव की झलक मिलने लगी थी. कुछ हिंदू संगठनों ने स्थानीय नगर पालिकाओं से आग्रह किया कि इन पोस्टरों को हटाया जाए क्योंकि ये भारत विरोधी पोस्टर हैं.
उसके बाद उन पोस्टरों पर कालिख पोत दी गई. कई जगह अश्लील प्रतीक भी बनाए गए. इस घटना के बदले में मेलबर्न के हिंदू मंदिरों की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिख दिए गए. दोनों ही घटनाओं के बाद ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय में तनाव फैल गया.
इस तनाव को कम करने के मकसद से हिंदू और सिख संगठनों ने बयान जारी कर मंदिरों हमले की निंदा की. सिख एसोसिएशन ऑफ ऑस्ट्रेलिया के अध्यक्ष डॉ. अलबेल सिंह कंग और हिंदू काउंसिल ऑफ ऑस्ट्रेलिया के उपाध्यक्ष सुरेंद्र जैन की ओर से एक साझा बयान जारी कर मंदिरों पर हमले की निंदा की गई.
समुदाय में चिंता
हिंदू और सिख समुदाय के बीच बढ़ते तनाव को लेकर ऑस्ट्रेलिया के भारतीय समुदाय में खासी चिंता है. सिडनी में रहने वाले बलजिंदर सिंह कहते हैं, "हम सब लोग यहां मिलजुल कर अमन-चैन से रहना चाहते हैं. हम नहीं चाहते कि भारत की अंदरूनी समस्याओं के कारण यहां तनाव पैदा हो. इन समस्याओं का हल अमेरिका, कनाडा या ऑस्ट्रेलिया में नहीं, भारत में ही मिलेगा."
डॉ. कंग कहते हैं, "हम चाहते है कि इन हमलों के दोषियों को पकड़ा जाए और उन्हें कानूनन कठघरे में खड़ा किया जाए. किसी भी पूजास्थल पर हमलों को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे. हम इस घटना की सख्त से सख्त निंदा करते हैं."
ऑस्ट्रेलिया स्थित भारतीय उच्चायोग ने भी इन घटनाओं की निंदा की और ऑस्ट्रेलिया की सरकार से अनुरोध किया कि उसकी जमीन का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए ना होने दिया जाए. एक बयान में उच्चायोग ने कहा, "एक प्रतिबंधित संगठन सिख्स फॉर जस्टिस द्वारा आयोजित कथित जनमत संग्रह को लेकर हम चिंतित हैं. हम अनुरोध करते हैं कि ऑस्ट्रेलिया सरकार भारतीय मूल के लोगों और उनकी संपत्तियों की सुरक्षा करे और अपने क्षेत्र का इस्तमाल भारत की अखंडता और संप्रभुता के विरोध में हो रहीं गतिविधियों के लिए ना होने दे."
तेज होता खालिस्तानी आंदोलन
ऑस्ट्रेलिया से पहले कनाडा और अमेरिका के शहरों में भी खालिस्तान के समर्थन में कथित जनमत संग्रह कराया जा चुका है. हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि इस जनमत संग्रह के नतीजे कब आएंगे लेकिन जहां भी सिख समुदाय बड़ी संख्या में हैं, वहां काफी लोगों ने इस मतदान में हिस्सा लिया है.
कनाडा में भी हिंदू और सिख समुदायों के बीच इस कारण तनाव हो चुका है और वहां भी कई मंदिरों पर भारत विरोधी नारे लिखे जाने की घटनाएं हई थीं जिसके बाद भारत सरकार ने कनाडा से शिकायत भी की थी. यहां तक कि दोनों देशों के संबंधों में भी इस कारण तल्खियां दिखाई दी हैं.
भारत का कहना है कि यह कथित जनमत संग्रह एक भारत विरोधी गतिविधि है और खालिस्तान की मांग भारतीय अखंडता के खिलाफ है.
Source: DW
-
Rajat Dalal Caste: Bigg Boss 18 फेम रजत दलाल किस जाति से हैं? शेरवानी में गंगा किनारे रचाई शादी, दुल्हन कौन? -
Silver Rate Today: चांदी फिर हुई सस्ती, अचानक 11,000 गिरे दाम, दिल्ली से पटना तक ये है 100 ग्राम सिल्वर का रेट -
ट्रंप ने सऊदी प्रिंस का उड़ाया मजाक, की बेदह गंदी टिप्पणी, क्या टूट जाएगी अमेरिका-सऊदी अरब की दोस्ती? -
3 शादियां कर चुकीं 44 साल की फेमस एक्ट्रेस ने मोहनलाल संग शूट किया ऐसा इंटीमेट सीन, रखी 2 शर्तें और फिर जो हुआ -
Iran Vs Israel: 'सभी देश भुगतेंगे परिणाम', शांति प्रयासों के बीच ईरानी विदेश मंत्री की बड़ी चेतावनी -
37 साल से लापता है ये फेमस एक्ट्रेस, गुमनामी में लुट गया सबकुछ, ऋषि कपूर पर लगाया था ऐसा आरोप -
VIDEO: 10 साल की दुश्मनी! बीच मैदान पर एक झप्पी और सब खत्म! विराट-कुंबले का वीडियो देख दुनिया दंग -
Gold Rate Today: ईरान जंग के बीच सोना में भारी गिरावट, अबतक 16000 सस्ता! 22k और 18k का अब ये है लेटेस्ट रेट -
LPG Price Today Delhi NCR: दिल्ली में गैस सिलेंडर महंगा, 14.2Kg का नया रेट क्या है? जानें आज का ताजा भाव -
Kal Ka Match Kon Jeeta 28 March: कल का मैच कौन जीता- RCB vs SRH -
Iran Vs America War: कब खत्म होगा अमेरिका ईरान युद्ध, ट्रंप के विदेश मंत्री ने बता दी तारीख -
PM Kisan Yojana: 31 मार्च से पहले कर लें यह काम, वरना अटक जाएगी पीएम किसान की अगली किस्त












Click it and Unblock the Notifications