जम्मू-कश्मीर में लगातार बढ़ रहे कोरोना के मामले, विशेषज्ञों ने पर्यटकों को ठहराया जिम्मेदार

पिछले कुछ दिनों में देश में कोरोना के मामलों में तेजी देखने को मिली है। भारत का स्वर्ग कहा जाने वाला जम्मू-कश्मीर भी इससे अछूता नहीं रहा है।

श्रीनगर। पिछले कुछ दिनों में देश में कोरोना के मामलों में तेजी देखने को मिली है। भारत का स्वर्ग कहा जाने वाला जम्मू-कश्मीर भी इससे अछूता नहीं रहा है। वहां भी पिछले कुछ दिनों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़े हैं। बढ़ते मामलों ने घाटी में एक बार फिर खतरे की घंटी बजा दी है। एक तरफ जहां जम्मू-कश्मीर प्रशासन कोरोना से जूझ रहा है वहीं, ऐसे समय में घाटी में पर्यटकों की बढ़ती आमद अधिकारियों के लिए परेशानी का सबब बन रही है।

Jammu and Kashmir

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विशेषज्ञों का कहना है कि, 'महाराष्ट्र समेत देश के 18 राज्यों में कोरोना का म्यूटिड स्ट्रेन पाया गया है और पर्यटकों के यहां आने से इस म्यूटिड स्ट्रेन के यहां पहुंचने की भी संभावना है, हालांकि अभी तक ऐसा कोई मामला घाटी में देखने को नहीं मिला है।'

बुधवार को स्वास्थ्य विभाग के निदेशक मुश्ताक राथर ने कहा कि बाहर से आए कुछ पर्यटकों और स्थानीय लोगों से लिए गए सैंपल में म्यूटिड स्ट्रेन की उपस्थिति मिली थी, जिनमें से पांच में यूके स्ट्रेल, 2 में दक्षिण कोरियाई स्ट्रेन और 1 में बांग्लादेशी स्ट्रेन मिला था। हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि ये संदिग्ध मामले थे और लैब रिपोर्ट में इनमें किसी भी स्ट्रेन की पुष्टि नहीं हुई।

वहीं, प्रमुख आंतरिक और पल्मोनरी मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. परवेज कौल ने कहा, 'हम नियमित रूप से जिनोम सीक्वेंसिंग नहीं कर रहे हैं। इसलिए देखने के लिए कोई डेटा उपलब्ध नहीं है। देश में कोरोना वायरस वेरिएंट तेजी से बढ़ रहा है और हम इससे बच नहीं सकते। मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन हम निश्चित तौर पर यह नहीं कह सकते कि वेरिएंट की जम्मू-कश्मीर में एंट्री हो चुकी है या नहीं।' आपको बता दें कि जिनोम सीक्वेंसिंग म्यूटिड स्ट्रेन के बारे में पता लगाने का कारगर तरीका है।

पर्यटक हो सकते हैं मुख्य स्रोत

विशेषज्ञों का कहना है कि घाटी में पर्यटक और प्रवासी मजदूर लगातार आ रहे हैं, जिनमें से कईयों के पास उच्च मानकों की आरटी-पीसीआर रिपोर्ट भी नहीं है, यही पर्यटक और मजदूर घाटी में कोरोना के मामलों में वृद्धि का कारण बन रहे हैं।

डॉ. कौल कहते हैं कि घाटी में आने वाले पर्यटकों की संख्या अच्छी खासी है और प्रशासन की ओर से किसी को भी आरटी-पीसीआर रिपोर्ट साथ लाने को भी नहीं कहा गया है। अगर इसे आवश्यक कर दिया जाए तो संक्रमण को कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब तक किसी व्यक्ति को पता चलता है कि उसे कोरोना है तब तक वह कई लोगों के संपर्क में आ चुका होता है।

बुधवार को जम्म-कश्मीर में कोरोना के 373 नए मामले सामने आए। यह संख्या पिछले साल दिसंबर के बाद एक दिन की सबसे अधिक संख्या है। इन मामलों में खाली कश्मीर से 300 मामले हैं। इसके अलावा पिछले 24 घंटों में 4 लोगों की कोरोना के कारण मौत हुई है, जिसमें कश्मीर संभाग से 3 मौते शामिल हैं। वहीं राज्य में कोरोना के कुल मामले बढ़कर 2531 हो गए हैं।

राज्य में पिछले 15 दिनों में 3500 नए संक्रमित मामले सामने आ चुके हैं, जबकि प्रतिदिन लगभग 200-300 मामले सामने आ रहे हैं।

नए संक्रमित मामलों में श्रीनगर सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। यहां कोरोना के 159 नए मामले सामने आए हैं, जिनमें 44 पर्यटक शामिल हैं।

राज्य में तेजी से चल रहा टीकाकरण का काम
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में कोरोना का पहला टीका 30 मार्च तक 6,34,953 लोगों को लगाया जा चुका है, जबकि 1,42,895 लोगों को टीकाकरण की दूसरी खुराक भी दी जा चुकी है।

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