अमेरिकी रिपोर्ट में भारत की तारीफ भी आलोचना भी, जम्मू-कश्मीर पर तारीफ तो फ्रीडम ऑफ स्पीच पर सवाल
जो बाइडेन प्रशासन ने मानवाधिकार को लेकर रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कई मानवाधिकार मुद्दों पर भारत पर सवाल उठाया गया है।
वाशिंगटन: अमेरिका में जो बाइडेन प्रशासन द्वारा सार्वजनिक की गई मानवाधिकार रिपोर्ट में मानवाधिकार के मुद्दे पर भारत की तारीफ की गई है, लेकिन कई मुद्दों पर भारत की आलोचना भी की गई है। रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर में भारत सरकार द्वारा उठाए गये मानवहितों के लिए कदम की तारीफ की गई है तो प्रेस की स्वंतंत्रता, गैर कानूनी हत्याएं, अभिव्यक्ति की आजादी और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर भारत की आलोचना भी की गई है। मंगलवार को प्रकाशित '2020 कंट्री रिपोर्ट्स ऑन ह्यूमन राइट्स प्रैक्टिसेडज' की रिपोर्ट में दुनिया भर के अलग अलग देशों में मानवाधिकार की स्थिति को लेकर रिपोर्ट पेश की गई है। ये रिपोर्ट अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने पेश की है।

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जम्मू-कश्मीर में सुधरे हालात
अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर की स्थिति में सुधार आया है और मानवाधिकार की स्थिति में भी काफी सुधार दर्ज किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर में भारत सरकार ने सुरक्षा और संचार संबंधी पाबंदियां हटा ली हैं, जिसकी वजह से स्थिति में काफी सुधार आया है और सरकार कश्मीर की स्थिति को सामान्य करने के लिए अच्छा प्रयास कर रही है। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि भारत सरकार ने ज्यादातर राजनीतिक कार्यकर्ताओं को हिरासत से रिहा कर दिया है। हालांकि, रिपोर्ट में कुछ मुद्दों पर भारत सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए गये हैं। जिसमें एक दर्जन से ज्यादा मानवाधिकारों से जुड़े अहम मुद्दे शामिल हैं। जिनमें पुलिस द्वारा हिरासत में कत्ल, पुलिस और जेल अधिकारियों द्वारा हिरासत में लिए गये लोगों को प्रताड़ित करना शामिल है।
अमेरिका में भी मानवाधिकार समस्या
अमेरिका ने मानवाधिकार को लेकर उस वक्त रिपोर्ट जारी की है, जब खुद अमेरिका ऐसे ही हालातों से जूझ रहा है और नस्लवाद की समस्या अमेरिकी समाज में घर घर तक फैला हुआ है। जब अमेरिकी विदेश मंत्री से अमेरिकी समाज में व्याप्त नस्लवाद पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि 'अमेरिकी समाज भी इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है'। अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकन ने कहा कि 'हम जानते हैं कि घरेलू स्तर पर हमें कई मुद्दों पर काम करने की जरूरत है। इसमें नस्लवाद समेत समाज में कई और समस्याएं हैं। जिनपर हम आंखे नहीं मूंद सकते हैं और अमेरिका का प्रशासन इन तमाम समस्याओं पर काम करेगा'
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