'तुरंत रिहा करो, पासपोर्ट भी लौटाया जाए', नोवाक जोकोविच ने जीता केस

सिडनी। आखिरकार दुनिया के नंबर एक टेनिस खिलाड़ी नोवाक जोकोविच की जीत हो ही गई। मेलबर्न में फेडरल सर्किट एंड फैमिली कोर्ट ने सर्बियाई टेनिस स्टार नोवाक जोकोविच का वीजा रद्द करने के ऑस्ट्रेलियाई सरकार के फैसले को सोमवार को रद्द कर दिया। जोकोविच ने ऑस्ट्रेलियन ओपन के लिए ऑस्ट्रेलिया पहुंचने के बाद इस फैसले को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि उन्हें कोविड -19 टीकाकरण से छूट मिली है।

novak djokovic

न्यायाधीश एंथोनी केली ने जोकोविच को रिहा करने का आदेश दिया और कहा कि उनका पासर्पोट उन्हें वापस कर दिया जाए। अब विश्व के नंबर एक खिलाड़ी के पास आगामी ऑस्ट्रेलियन ओपन में रिकॉर्ड 21वां ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने का मौका फिर से जागृत हो गया। यह आदेश कोर्ट में ऑस्ट्रेलियाई समयनुसार शाम 5.16 बजे सुनाया गया। 34 वर्षीय जोकोविच को गुरुवार से लंबे समय तक एक आव्रजन होटल में रखा गया था। उन्हें सुनवाई के लिए अपने वकीलों के कक्षों में जाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया आने के बाद से उन्हें सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है।

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गाैर हो कि ऑस्ट्रेलियाई ओपन में खेलने के लिए बुधवार देर रात मेलबर्न पहुंचने के तुरंत बाद ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने जोकोविच का वीजा रद्द कर दिया था क्योंकि क्योंकि अधिकारियों ने वैक्सीनेशन से जुड़ी शर्तें पूरी नहीं करने को वजह बताकर उनका प्रवेश वीजा रद्द कर दिया था। फिर शनिवार को जोकोविच के वकीलों ने अदालत में फाइल की गई रिपोर्ट में कहा कि दिसंबर में कोरोना वायरस की चपेट में आने के बाद जोकोविच को मेडिकल छूट दी गई थी। दस्तावेजों से पता चला था कि जोकोविच ने 16 दिसंबर को कोविड -19 की पाॅजिटिव रिपोर्ट वाले दस्तावेज प्रदान किए थे। उसके बाद उन्हें ऑस्ट्रेलियन ओपन में खेलने की छूट मिली थी।

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