डेविस कप कप्तान रोहित राजपाल को आखिर क्यों आया गुस्सा, भारत में टेनिस के भविष्य पर गहराया संकट!

Indias Davis Cup captain Rohit Rajpal: भारतीय डेविस कप कप्तान रोहित राजपाल ने रविवार को स्टॉकहोम में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपनी कप्तानी का जमकर बचाव किया। उनका यह बयान डेविस कप विश्व ग्रुप 1 मुकाबले में स्वीडन से भारत की 0-4 की हार के बाद आई है, जिसके बाद भारत अगले साल होने वाले विश्व ग्रुप 1 प्लेऑफ राउंड में पहुंच गया है। रोहित राजपाल ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कई सवालों के जवाब दिए।

रोहित राजपाल ने खिलाड़ियों को लेकर कही ये बात

रोहित राजपाल ने सुमित नागल, मुकुंद शशिकुमार और रोहन बोपन्ना जैसे भारतीय खिलाड़ियों को लेकर मीडिया के सवालों का जवाब दिया। कुछ आलोचकों ने सुझाव दिया कि एक अधिक अनुभवी कप्तान टीम को बेहतर प्रदर्शन की ओर ले जा सकता था। इसके जवाब में रोहित ने कहा कि जब से मैंने कार्यभार संभाला है, इन लड़कों ने हमेशा मुझे भड़काने और प्रतिक्रिया पाने के लिए कुछ नकारात्मक कहने की कोशिश की है।

Indias Davis Cup 1

मैं अपने देश के लिए यहां हूं

उन्होंने अपनी बात को आगे जारी रखते हुए कहा कि अगर खिलाड़ियों को अन्यथा लगता है, तो मैं बहुत खुला व्यक्ति हूं, वे जो महसूस करते हैं उसे कहने के लिए स्वतंत्र हैं। लेकिन मैं अपने देश के लिए यहां हूं, जो कुछ भी करना होगा, करने के लिए तैयार हूं। भारतीय पूर्व पेशेवर टेनिस खिलाड़ी रोहित राजपाल ने टीम के प्रति अपने समर्पण का भी जिक्र किया।

मां की बीमारी का किया जिक्र

रोहित ने फरवरी में पाकिस्तान के खिलाफ एक मैच के दौरान अपनी मां की बीमारी का जिक्र किया। 53 वर्षीय रोहित ने कहा कि फरवरी में पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले के दौरान मेरी मां आईसीयू में थीं और मैं अभी भी (टेनिस) कोर्ट पर था। मैं यहां अपने राष्ट्रीय कर्तव्यों का पालन करने के लिए आया हूं। रोहित ने अपने आलोचकों को एक कड़ा संदेश देते हुए अपनी टिप्पणी समाप्त की।

फूटा रोहित राजपाल का गुस्सा

उन्होंने कहा कि इन सभी लोगों से मैं एक बात कहना चाहता हूं, चुप रहो। अगर आपको वाकई इतनी परवाह है, तो अपने एसी कमरों में बैठकर बातें मत करो, बाहर निकलो और दिखाओ कि तुम क्या कर सकते हो।

भारत में टेनिस के भविष्य पर गहराया संकट!

भारतीय टीम के लगातार निराशाजनक प्रदर्शन के बाद रोहित रादपाल पर कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, आलोचनाओं का सामना करने के बावजूद रोहित अपनी बात पर टिके हुए हैं। दूसरी तरफ देश में टेनिस के भविष्य को लेकर भी चर्चाएं जोरों पर है। राजपाल को अपनी क्षमताओं पर भरोसा है। उन्हें विश्वास है कि उनके तरीके अंततः सकारात्मक परिणाम देंगे।

हालांकि, यह भरोसा संगठन के भीतर सभी को नहीं है। भारतीय टेनिस का भविष्य अधर में लटका हुआ है। शीर्ष स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव के बिना, यह संभावना नहीं है कि हम जल्द ही कोई बड़ा सुधार देख पाएंगे। हर दिन नई दिशा की मांग तेज होती जा रही है।

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