Paris Olympics: ओलंपिक खेलों का आयोजन 4 साल बाद ही क्यों होता है? जानिए इसकी दिलचस्प कहानी
ओलंपिक खेलों के आयोजन से खिलाड़ी और फैन्स दोनों में उत्साह रहता है। होस्ट करने वाले देश के लोग चाहते हैं कि उनको सबसे ज्यादा पदक मिले। अन्य देश स्पर्धा को कड़ा बनाने का प्रयास करते हैं और कई देश ऐसे भी होते हैं, जो एक-एक पदक के लिए तरस जाते हैं।
इन सबके बीच एक बड़ा सवाल सामने आता है कि ओलंपिक खेलों का आयोजन हर चार साल बाद ही क्यों होता है। इसे तीन साल या पांच साल बाद भी आयोजित किया जा सकता है। इसके पीछे कुछ मान्यताएं भी हैं, जो ग्रीस से जुड़ी हुई हैं।

कहा जाता है कि 3000 साल पहले ग्रीस में इन खेलों की शुरुआत हुई थी जो उनके देवता यूनानी देवता जीउस के सम्मान में आयोजित हुए। इसके बाद इन खेलों का आयोजन अहम हो गया और ओलंपिया में इवेंट होने लगा। खेल आयोजित करने के लिए ओलंपिया ही स्थायी वेन्यू था जो बाद में बदला।
जीउस के सम्मान में आयोजित इन खेलों को चार साल में एक बार आयोजित किया जाने लगा और इस अवधि को ओलंपियाड नाम दे दिया गया। 393 ईस्वी तक आयोजन हुआ और बाद में खेल बंद हो गए जो 1894 तक फिर शुरू ही नहीं हो पाए थे। ओलंपियाड में साल नहीं बल्कि समय की गणना होती थी इसलिए अंतर चार साल का था।
हालांकि ऐसा नहीं है कि चार साल में खेल का आयोजन करना जरूरी है। कई बार समय बदला भी गया है। कोरोना महामारी के समय ही ऐसा देखने को मिला था। टोक्यो में आयोजित हुए खेल पांच साल बाद आयोजित हुए थे। इसके अलावा प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध की वजह से तीन बार खेल रद्द हुए थे।
इस बार पेरिस ओलंपिक तीन साल बाद ही हो रहे हैं। टोक्यो ओलंपिक साल 2020 में होने थे लेकिन कोविड के कारण एक साल बाद 2021 में आयोजित हुए थे और पेरिस ओलंपिक से एक साल कम हो गया और आयोजन तीन सालों पर आ गया।












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