'अगर पीटी उषा के साथ ऐसा होता तो...',विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया ने किया पलटवार, अनुराग ठाकुर को भी बताया 'झूठा'
जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे भारतीय पहलवान आईओए की प्रेसिडेंट पीटी उषा से खास तौर पर नाराज नजर आए और इस दौरान बजरंग पुनिया ने अनुराग ठाकुर के दावे को भी झूठा बताया।

Wrestler Protest in Hindi: जंतर-मंतर पर रैसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) के विरोध में प्रदर्शन कर रहे देश के कुछ नामचीन पहलवानों और इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) की प्रेसिडेंट पीटी ऊषा के बीच मतभेद साफ तौर पर सामने आ रहे हैं। पीटी उषा भारत की दिग्गज धाविका रह चुकी हैं और पूर्व ओलंपियन भी है। उनका कहना है कि विरोध प्रदर्शन कर रहे इन रेसलरों को सड़क पर जाने की जगह हम लोगों के पास आना चाहिए था।
पीटी उषा ने कहा कि ये पहलवान आईओए के पास नहीं गए। इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन के पास यौन उत्पीड़न के लिए एक कमेटी है जिसके लिए पहलवानों को पहले हमारे पास आना चाहिए थे। जिस तरह से रेसलर सड़क पर उतर रहे हैं यह केवल रेसलिंग के लिए नहीं बल्कि खेल के लिए भी अच्छा नहीं है। ये देश की गरिमा के लिए भी ठीक नहीं है। इन लोगों को कुछ अनुशासन दिखाना चाहिए था।
पीटी उषा की बात के जवाब में ओलंपिक कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक काफी भावुक नजर आईं और उन्होंने कहा कि, हमें इस बात का काफी दुख है कि एक महिला होने के बावजूद पीटी उषा ऐसा कह रही हैं। हम बचपन से उनको फॉलो करते आए हैं और उनसे प्रेरणा भी हमने ली है।
साक्षी मलिक आगे कहती हैं, "हमने किसी तरह का अनुशासन नहीं तोड़ा है हम यहां शांति से बैठे हुए हैं। 3 महीने इंतजार करने के बाद भी हम लोगों की सुनवाई नहीं हुई। इसलिए हम लोग यहां मजबूरी में ही आए हैं।"
इस दौरान साक्षी मलिक रोते हुए देखी गई। इसके बाद पहलवान विनेश फोगाट ने भी कहा, "हम देश के संविधान को फॉलो करते हैं। लेकिन अगर हम सड़क पर बैठे हैं तो हमारी कुछ मजबूरी है क्योंकि हमारी किसी ने बात नहीं सुनी है तो हम जनता के सामने हैं। पीटी उषा को हम अपना काफी बड़ा आइकन मानते हैं। उनका महिलाओं के प्रति ऐसे बोलना, बिल्कुल भी संवेदनशील नहीं होना, काफी दुखद है।"
"मैंने उनको पर्सनली फोन भी किया था। लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। अगर पीटी ऊषा मैम के साथ ऐसा हुआ होता तो क्या वे इतना लंबा इंतजार कर लेती? हमें नहीं पता यह उनकी जुबान है या उनके ऊपर भी कोई दबाव है। वह आईओए की प्रेसिडेंट है लेकिन उनको मीडिया में आकर यह कहना पड़ा था, वह भी रो-रोकर, कि उनकी अकादमी तोड़ी जा रही है। जो खुद के साथ ही न्याय नहीं करा सकी, हम उनसे क्या उम्मीद रखें।"
"वह भी तो देश की जनता के सामने आई थीं। वे क्यों सरकार और स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री के सामने नहीं गई? उस वक्त वे मीडिया के सामने रो रही थीं और उनको देखकर हमारा मन भी रो रहा था कि यह क्या हो रहा है। ऐसे में दुख होता है जब कोई इतना बड़ा खिलाड़ी किसी दूसरे खिलाड़ी का दर्द नहीं समझता है। यह देश का बहुत बड़ा दुर्भाग्य की है कि ऐसा हो रहा है।"
इसके बाद बजरंग पुनिया कहते हैं कि, "पीटी उषा ने ऐसा बोला है तो काफी दुख होता है क्योंकि वह खुद एक महिला है। वह आईओए की अध्यक्ष भी है और राज्यसभा सांसद भी हैं। हमने 3 महीने इंतजार किया है। हम कमेटी के पास गए हैं। वह कह रही हैं कि हमारे पास आते, तो 3 महीने पहले हम उन्हीं के पास गए थे लेकिन हमारे साथ न्याय नहीं हुआ और हमें मजबूरन यहां आना पड़ा और अगर खिलाड़ी अपने हक की आवाज उठा रहे हैं तो उसको गैर अनुशासनात्मक बोला जा रहा है।"
"जब मैडम (पीटी उषा) की एकेडमी में दिक्कत हो रही थी तो वह भी चुपचाप जाकर अपनी चीजों को ठीक करा सकती थीं। उनको मीडिया के सामने आने की जरूरत ही क्या थी? तो क्या तब देश की गरिमा नहीं खराब हो रही थी? वह तो राज्यसभा सांसद हैं। उनके पास पावर है। हमारे पास तो कोई पावर भी नहीं है। हमारे तो कोई फोन भी नहीं उठाता है।"
इस दौरान बजरंग पुनिया ने खेल मंत्री अनुराग ठाकुर का वह दावा भी झूठा बताया जिसमें उन्होंने कहा था कि वे खिलाड़ियों के साथ लगातार संपर्क में है और उन्होंने रेसलरों से कई घंटों बातचीत भी की है। पूनिया ने बताया कि खेल मंत्री केवल तीन चार मिनट के लिए बात कर पाए और भी अपने मीडिएटर अधिकारियों की मौजूदगी में। इसके बाद खेल मंत्री से कोई बात नहीं हुई।












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