कोच रवि कुमार पुनिया ने रचा इतिहास, महिला फुटबॉल की सभी नेशनल कैटेगरी में जीते मेडल
Ravi Kumar Punia creates history: भारतीय महिला फुटबॉल में कोच रवि कुमार पुनिया ने वह कर दिखाया है, जो अब तक कोई नहीं कर पाया था। उन्होंने सब-जूनियर, जूनियर और सीनियर तीनों नेशनल कैटेगरी में टीमों को मेडल जिताकर इतिहास रच दिया है। बुधवार को उनका यह रिकॉर्ड और भी खास बन गया, जब उत्तर प्रदेश ने छत्तीसगढ़ के नरैनपुर में खेले गए सब-जूनियर गर्ल्स नेशनल फुटबॉल चैम्पियनशिप 2025-26 (टियर-2) के फाइनल में केरल को 2-1 से हराया।
रवि कुमार पुनिया ने हासिल की बड़ी उपलब्धि (Ravi Kumar Punia creates history)
इस जीत के साथ यूपी और केरल, दोनों टीमों ने अगले सीजन के लिए टियर-1 में प्रमोशन हासिल किया। रवि कुमार पुनिया की यह उपलब्धि इसलिए अनोखी है क्योंकि उन्होंने अलग-अलग राज्यों के साथ मिलकर हर स्तर पर सफलता पाई है। साल 2021 में उन्होंने दादरा और नगर हवेली की जूनियर टीम को नेशनल चैम्पियनशिप का गोल्ड मेडल दिलाया था, जब टीम ने फाइनल में बिहार को 1-0 से हराया।

जीत के बाद रवि कुमार पुनिया ने कही ये बात
वहीं, सीनियर स्तर पर वह हरियाणा की टीम को लगातार दो बार पोडियम तक ले गए। 2023 में हरियाणा ने सिल्वर मेडल जीता, जबकि 2024 में ओडिशा से सेमीफाइनल हारने के बाद ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा किया। अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर रवि कुमार पुनिया ने कहा कि मेरे लिए यह सिर्फ व्यक्तिगत गर्व का पल नहीं है, बल्कि महिला फुटबॉल के भविष्य का संकेत है। अगर हम खिलाड़ियों पर भरोसा करें और सही मार्गदर्शन दें, तो वे हर स्तर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं। मेरा लक्ष्य महिला फुटबॉल को और आगे ले जाना है और युवा खिलाड़ियों को यह विश्वास दिलाना है कि वे भी बड़े स्तर पर मुकाबला कर सकती हैं।
क्लब फुटबॉल में बनाई मजबूत पहचान
क्लब फुटबॉल में भी रवि कुमार ने अपनी मजबूत पहचान बनाई है। वह तीन सीजन से इंडियन वुमेन्स लीग में HOPS FC के हेड कोच रहे हैं और लगातार नई प्रतिभाओं को निखार रहे हैं। अब तक वह 15 से ज्यादा नेशनल चैम्पियनशिप में कोचिंग कर चुके हैं, जिससे उन्हें हर स्तर पर अनुभव हासिल हुआ है। खिलाड़ी के तौर पर भी उनका सफर शानदार रहा। वह राजस्थान यूनाइटेड एफसी का हिस्सा रहे, जिसने आई-लीग क्वालिफायर्स जीते थे।
इसके अलावा उन्होंने ऑल इंडिया इंटर-यूनिवर्सिटी चैम्पियनशिप जीती और संतोष ट्रॉफी में अपने राज्य का प्रतिनिधित्व भी किया। यही अनुभव उन्हें कोचिंग करियर में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।












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