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OI Exclusive: 80 रुपये कमाने वाले पिता की बेटी कैसे बनी हॉकी की महारथी! रानी रामपाल ने किए कई दिलचस्प खुलासे

OI Exclusive Interview With Rani Rampal: भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व दिग्गज कप्तान रानी रामपाल अब एक नई भूमिका में नजर आने वाली है। रानी अब कोच और मेंटर के रूप में 'सूरमा हॉकी क्लब' (HIL 2026) के साथ अपनी दूसरी पारी की शुरुआत कर रही हैं। हाल ही में वनइंडिया हिंदी से हुई बातचीत के दौरान रानी ने बताया कि खिलाड़ी से कोच बनने का यह सफर उनके लिए बिल्कुल वैसा ही है, जैसे बचपन में पहली बार हॉकी स्टिक थामना।

कोच के रूप में रानी की नई शुरुआत (OI Exclusive Interview With Rani Rampal)

उन्होंने कहा कि यह एक नई शुरुआत है। खिलाड़ी के तौर पर मेरा सफर खत्म हुआ है, लेकिन कोच के रूप में मुझे अभी बहुत कुछ सीखना और सिखाना बाकी है। कोचिंग की चुनौतियां और बदलाव पर रानी ने स्वीकार किया कि खिलाड़ी और कोच की सोच में जमीन-आसमान का अंतर होता है। बतौर खिलाड़ी आप तुरंत एक्शन लेते हैं, लेकिन कोच के रूप में आपको धैर्य रखना पड़ता है।

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युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने की कोशिश

रानी के अनुसार हर खिलाड़ी की सीखने की गति अलग होती है, जिसे समझना जरूरी है। तकनीक और रणनीति सिखाना आसान है, लेकिन अलग-अलग स्वभाव के खिलाड़ियों को एक ही विजन के साथ जोड़कर रखना असली चुनौती है। शुरुआत में खिलाड़ी की तरह सोचना स्वाभाविक है, लेकिन धीरे-धीरे मानसिकता बदलना जरूरी होता है। यहां हमने रानी से कुछ सवाल पूछे जिसका जवाब उन्होंने अपने ही अंदाज में देने का काम किया।

सवाल- Hockey India League में Soorma Hockey Club के साथ जुड़ना आपके लिए क्या मायने रखता है-क्या इसे आप भारतीय महिला हॉकी के 'नेक्स्ट फेज' के रूप में देखती हैं?

जवाब- मैं बहुत खुश हूं कि ये लीग शुरू हुई है। यह दूसरा सीजन है और इसका पहला सीजन शानदार गुजरा था। इस टीम के साथ काम करते हुए बहुत अच्छा लगता है। इस फ्रेंचाइज के साथ काम करते हुए बहुत अच्छा लगता है। हॉकी इंडिया लीग में हमें एक टैलेंट पूल देखने को मिलता है। इसमें कई युवा खिलाड़ियों को मौका मिलता है। पहले हॉकी में इतना एक्सपलोजर था नहीं। लेकिन अब यंगस्टर के पास यहां से टीम इंडिया तक सफर करने का मौका मिलता है।

सवाल- Soorma Hockey Club जैसी फ्रेंचाइज़ी में अंतरराष्ट्रीय अनुभव वाली खिलाड़ियों की मौजूदगी युवा भारतीय खिलाड़ियों को क्या मानसिक बढ़त देती है, जो नेशनल कैंप भी शायद न दे पाए?

जवाब- इस लीग में टॉप लेवल के इंटरनेशनल और भारतीय टीम के खिलाड़ी हैं। इसके अलावा कई युवा खिलाड़ी भी हैं। जिससे युवा खिलाड़ियों को अनुभवी खिलाड़ियों से काफी कुछ सीखने को मिलता है। जब आप एक साथ खेलते हैं तो आपको लगता है कि यह हमारी जैसी हैं इससे आत्मविश्वास मिलता है।

सवाल- जब आप छह साल की उम्र में हॉकी स्टिक उठाती थीं, तब क्या कभी ऐसा पल आया जब भूख, हालात और समाज-तीनों ने आपको हॉकी छोड़ने पर मजबूर कर दिया हो? उस दिन आपने खुद से क्या कहा था?

जवाब- ऐसे बहुत सारे मौके आते थे जब मुझे लगता था कि अब नहीं खेलना। मैं काफी गरीब परिवार से थी। मेरे पिता जी कार पूलर थे वह दिन में 80 रुपये कमाते थे और सात लोगों का हमारा परिवार था। ऐसे में मुझे लगा कि मैं परिवार की जिंदगी बदल सकती हूं। मेरे अंदर से काफी मजबूत थी, उस वक्त ने मुझे काफी कुछ सिखाया। मेरे अंदर हॉकी खेलने का जुनून था। उस समय मैंने कई संघर्षों को देखा था। उस दौरान मुझे कई लोगों ने मदद की। अब मैं दूसरे युवा खिलाड़ियों की मदद करना चाहती हूं। मैं उनसे बस यही कहना चाहती हूं कि हिम्मत से आगे बढ़े।

सवाल- Soorma Hockey Club जैसी फ्रेंचाइज़ी में आपक क्या रोल है?

जवाब- मैं इस टीम के साथ मेंटर का रोल निभाती हूं। जहां मैं कोचिंग स्टाफ के साथ युवा खिलाड़ियों को तरासने का काम रहता है। क्योंकि खिलाड़ियों के खेल में काफी उतार-चढ़ाव आता है। ऐसे में उन्हें सही दिशा-निर्देश देना और उनका मनोबल बढ़ाना। बस यही हमारा काम है जिससे वह फ्री माइंड से खेलें। क्योंकि कोई भी खिलाड़ी फ्री माइंड से खेलता है तो वह अपना बेस्ट देता है।

सवाल- साल 2024 में संन्यास लेते वक्त सबसे भारी क्या था-मैदान छोड़ना या उस पहचान से बाहर आना जो सालों में बनी थी?

जवाब- मैं बहुत इमोशनल थी, क्योंकि मैंने अपने जीवन के बहुत साल हॉकी को दी थी। एक जर्नी जिसकी शुरुआत मैंने कहां से की थी और कहां खत्म की थी। जब भी मैं खेलती थी मेरे मन में बस एक तमन्ना थी कि मुझे वह जर्सी ऐसी जगह रखनी है जहां मैं दूसरे खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन सकूं। किसी भी खिलाड़ी के लिए संन्यास के बाद मैदान को छोड़ना आसान नहीं होता है।

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