नीरज का भाला बन गया रॉकेट, भारत ने लगाई लम्बी छलांग, ऐतिहासिक मौके पर झूम उठे थे करोड़ों देशवासी
Neeraj Chopra: हर रात के बाद एक सवेरा होता है और ऐसा यही भारतीय एथलेटिक्स इतिहास में हुआ। हालांकि भारतीय एथलेटिक्स में धमाका होने में एक लम्बा समय लग गया लेकिन वह वक्त 7 अगस्त 2021 को आया। नीरज चोपड़ा ने धमाकेदार अंदाज में अपना भाला फेंकते हुए इतिहास रच दिया और लम्बे समय से चला आ रहा सूखा समाप्त कर दिया।
चार साल पहले आज ही के दिन टोक्यो ओलंपिक में भारत के लिए ऐतिहासिक दिन था, जब नीरज चोपड़ा का भाला हवाओं को चीरता हुआ सबसे आगे जाकर रुका। इसकी दूरी हैरान करने वाली थी और करोड़ों भारतीयों का दिल ख़ुशी से भर उठा। नीरज ने भारतीय एथलेटिक्स को एक नई पहचान दिला दी। 100 साल के इतिहास में भारत ने एथलेटिक्स में पहला गोल्ड हासिल किया था।

भारत को ट्रैक एंड फील्ड में पहला ओलंपिक गोल्ड मेडल मिला, और वो भी एक ऐसे युवा के हाथों, जिसने अपने भाले से इतिहास के पुराने पन्ने फाड़कर एक नया अध्याय लिख दिया। नीरज चोपड़ा ने पुरुषों की जेवलिन थ्रो (भाला फेंक) स्पर्धा में 87.58 मीटर की दूरी तय कर गोल्ड पर कब्ज़ा किया। यह सिर्फ दूरी नहीं थी, यह सपनों की नई उड़ान के साथ एक नई ऊंचाई थी, मेहनत का वजन, और 140 करोड़ भारतीयों की नई उम्मीद थी।
ओलंपिक में भारत को इससे पहले हॉकी, कुश्ती, टेनिस आदि में तो कामयाबी हासिल हुई थी लेकिन ट्रैक एंड फील्ड में भारत ने पहली बार धमाका किया। एथलेटिक्स में इसी तरह का कमाल होने की उम्मीदे थी लेकिन हर बार निराशा हाथ लग रही थी लेकिन 2021 में वह दिन आ गया और करोड़ों भारतीयों को ख़ुशी से झूमने का मौका मिल गया।
Neeraj Chopra बन गए यूथ के फेवरेट
नीरज की यह जीत केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं थी, यह एक राष्ट्र की पहचान बन गई। उनके भाले ने साबित कर दिया कि भारतीय खिलाड़ी किसी भी मंच पर किसी से कम नहीं हैं। उनकी जीत के बाद वे एक यूथ आइकन, देशभक्ति के प्रतीक, और स्पोर्ट्स मोटिवेशन का चेहरा बन गए। नीरज चोपड़ा का नाम आज देश के बड़े प्लेयर्स में शामिल है। उनका काफी मान और सम्मान है।
Neeraj Chopra करोड़ों उम्मीदों पर उतरे खरे
यह गोल्ड मेडल सिरद नीरज चोपड़ा का ही नहीं था, बल्कि करोड़ों देशवासियों की उम्मीदों का मेडल था। नीरज चोपड़ा उन उम्मीदों पर खरा उतरे थे और तमाम विपक्षी एथलीटों को पछाड़कर नंबर एक बन गए। पाकिस्तान के अरशद नदीम भी इस दौरान वहां खेल रहे थे लेकिन मेडल नहीं जीत पाए। सिल्वर और कांस्य पदक पर चेक गणराज्य के दो एथलीटों ने कब्जा जमाया था।
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