Paris Olympics: जैवेलिन थ्रो में भारत को क्यों नहीं मिलेंगे 2 मेडल? नीरज के साथी एथलीट के लिए कठिन है रास्ता
Kishore Jena in Paris Olympic 2024: नीरज चोपड़ा आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। जैवेलिन थ्रो में टोक्यो ओलंपिक के दौरान नीरज ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया था। वह व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड मेडल हासिल करने वाले दूसरे भारतीय एथलीट थी। पिछले दो सालों से एक और भारतीय एथलीट सामने आया है।
यहाँ बात हो रही है किशोर जेना की, वह भी जैवेलिन थ्रो में इस बार ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। भारत को दो मेडल मिल सकते हैं लेकिन किशोर जेना के लिए राह आसान नहीं होने वाली है। हालांकि एशियन गेम में जेना ने रजत पदक जीतकर ओलंपिक कोटा हासिल किया था।

उस पदक के बाद किशोर जेना भारत के दूसरे बेस्ट जैवेलिन थ्रोअर बनकर सामने आए। ओलंपिक में नीरज और किशोर की जोड़ी दिखेगी लेकिन किशोर के पास अनुभव की कमी है। वह अब तक ओलंपिक में एक बार भी भाला फेंकने के लिए मैदान पर नहीं उतरे हैं।
हालिया प्रदर्शन की बात की जाए, तो किशोर जेना ने डायमंड लीग में हिस्सा लिया था। उनका भाला वह दूरी तय नहीं कर पाया, जिसकी उम्मीदें थीं। वह महज 78.10 मीटर की दूरी तय कर पाए थे और आठवें स्थान पर रहे थे। इस प्रदर्शन से ओलंपिक में पदक की राह कठिन है। बड़े इवेंट का दबाव भी अलग होता है।
पिछले साल किशोर जेना ने कई उपलब्धियां हासिल की थी। उन्होंने भुवनेश्वर में राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल जीतने के अलावा श्रीलंका के दियागामा में 84.38 मीटर का अपना दूसरा बेस्ट थ्रो फेंका। बुडापेस्ट में हुई विश्व एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में 84.77 मीटर के बेस्ट थ्रो के साथ पांचवें स्थान पर थे। वह डेब्यू ओलंपिक खेल रहे हैं, ऐसे में फाइनल तक जाकर पदक की दौड़ में शामिल होना उनके लिए आसान काम नहीं है।
ओडिशा से आने वाले किशोर जेना के लिए अनुभव हासिल करने के लिए यह इवेंट बेस्ट है। 28 साल का यह एथलीट अपना बेस्ट देने का पूरा प्रयास करेगा। नीरज चोपड़ा साथ रहेंगे, ऐसे में उनको वहां सपोर्ट रहेगा। उनका पर्सनल बेस्ट थ्रो 87.54 मीटर है। देखना होगा कि वह इसे पार कर पाते हैं या नहीं।












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