Vinesh Phogat को लेकर आई बड़ी खुशखबरी! सुनवाई में पूछे गए थे ये सवाल, क्या सिल्वर मेडल है पक्का?
Vinesh Phogat CAS Verdict Highlights: विनेश फोगाट की पेरिस ओलंपिक से मेडल की उम्मीदें अभी भी बनी हुई है। महिलाओं की 50 किग्रा कुश्ती के फाइनल से सिर्फ़ 100 ग्राम ज़्यादा वज़न होने के कारण अयोग्य ठहराए जाने के बाद विनेश फोगाट ने इसे लेकर अपील की थी। कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट (CAS) के फैसले का इंतजार फैंस अभी भी कर रहे हैं। इस बीच बजरंग पूनिया ने एक ट्विट कर जानकारी दी है कि विनेश फोगाट 17 अगस्त रात 10 बजे दिल्ली पहुंच जाएगी।
कई बार टाला जा चुका है फैसला
शुरुआत में महिलाओं की 50 किग्रा कुश्ती के फाइनल से सिर्फ़ 100 ग्राम ज्यादा वजन होने के कारण अयोग्य ठहराए जाने के बाद फोगाट ने CAS में अपील की थी। इस अपील में उन्होंने कहा कि जब उन्होंने फाइनल के लिए क्वालिफाई किया था। तब वे स्वीकार्य वज़न सीमा के भीतर थीं। उनका कहना है कि उन्हें साझा रजत पदक मिलना चाहिए।
शुरुआत में पेरिस ओलंपिक के खत्म होने से पहले इस फैसले की उम्मीद थी, लेकिन इसे कई बार टाला जा चुका है।

बढ़ी मेडल मिलने की संभवानाएं
फैसले में लगातार हो रही देरी के कारण ऐसा माना जा रहा है कि फैसला विनेश फोगाट के हक में आ सकता है। विनेश फोगाट के सिल्वर मेडल मामले पर लगातार फैंस की नजरें बनी हुई है। भारतीय फैंस को उम्मीद है कि फैसला विनेश फोगाट के हक में आएगा।
अब 16 अगस्त को होगा फैसला
हाल ही में हुई देरी के कारण फैसला 16 अगस्त को टाल दिया गया है, जिससे फोगाट और उनके समर्थक असमंजस में हैं। इस अनिश्चितता के बावजूद उनकी कानूनी टीम का मानना है कि देरी उनके पक्ष में काम कर सकती है। वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे और विदुषपत सिंघानिया के नेतृत्व वाली उनकी कानूनी टीम के अनुसार, बार-बार समय-सीमा में की गई बढ़ोतरी से पता चलता है कि सीएएस मामले पर सावधानीपूर्वक विचार कर रहा है। सिंघानिया ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि गहन विचार-विमर्श से फोगट के लिए सकारात्मक परिणाम का संकेत मिल सकता है।
पूछे गए थे ये सवाल
एक साक्षात्कार के दौरान विनेश से पूछा गया कि क्या उन्हें इस नियम के बारे में पता है कि अगले दिन उनका वजन फिर से मापा जाएगा। इस सवाल ने उनकी अपील के एक महत्वपूर्ण पहलू को उजागर किया। उनसे एक और सवाल पूछा गया कि क्या क्यूबा की पहलवान उनके साथ रजत पदक साझा करने के लिए सहमत होंगी। इस सवाल से यह पता चला कि क्या उनकी प्रतिद्वंद्वी उनकी मांग को स्वीकार कर सकती हैं। तीसरा सवाल यह था कि वह अपनी अपील पर निर्णय किस तरह से बताना चाहती हैं। उनसे पूछा गया कि क्या वह सार्वजनिक घोषणा या गोपनीय प्रकटीकरण पसंद करती हैं।












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