Exclusive: क्या बिहार बन पाएगी खेलों की नई राजधानी? DG रवींद्रन शंकरण ने बताया प्लान, खुले कई राज!
Exclusive Interview Raveendran Shankaran: बिहार को अब तक खेलों के मामले में पिछड़ा हुआ माना जाता रहा है। लेकिन अब भारतीय खेल जगत में बिहार एक नया अध्याय लिख रहा है। वर्षों तक उपेक्षित रहने के बाद राज्य ने खेलों में अपनी पहचान बनाने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शी सोच और मजबूत नीतियों ने बिहार को खेलों के नक्शे पर चमकाने का काम किया है।
बदल रही है बिहार की छवि (Exclusive Interview Raveendran Shankaran)
कभी मगध साम्राज्य की गौरवशाली धरती रही राजगीर अब खेलों की राजधानी बन चुका है। यहां बने आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स ने बिहार की तस्वीर बदल दी है। इसी के बीच बिहार ने कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट आयोजित कर अपनी क्षमता साबित की है। खेलो इंडिया यूथ गेम्स, सेपक टकरॉ वर्ल्ड कप, महिला एशिया कप हॉकी और अब पुरुष एशिया कप हॉकी 2025 ये सभी आयोजन बिहार की बदलती छवि की गवाही देते हैं।

बिहार से शुरू हुई थी ओलंपिक आंदोलन की शुरुआत
बिहार की खेलों में गहरी जड़ें रही हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत में ओलंपिक आंदोलन की शुरुआत बिहार से हुई थी। भारतीय ओलंपिक संघ की स्थापना पटना में हुई और इसके पहले अध्यक्ष और महासचिव भी बिहार से थे। लेकिन वक्त के साथ यह चमक फीकी पड़ गई। इस खालीपन को भरने के लिए राज्य सरकार ने खेलों में एक नई क्रांति का बिगुल फूंका।
श्री रवींद्रन शंकरण ने कही बड़ी बात
बिहार खेल जगत में अपनी पुरानी पहचान फिर से हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य के खेल निदेशक जनरल, श्री रवींद्रन शंकरण ने हमारी सहयोगी वेबसाइट MYKHEL को दिए इंटरव्यू में बताया कि कैसे बिहार ने पिछले कुछ वर्षों में खेल विकास के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है। उन्होंने बताया कि बिहार का खेलों में एक गौरवशाली इतिहास रहा है। "भारत में ओलंपिक आंदोलन की शुरुआत बिहार से हुई थी।
बिहार में होंगे कई बड़े खेल के आयोजन
उन्होंने याद दिलाते हुए कहा कि भारतीय ओलंपिक संघ की स्थापना पटना में हुई थी और इसके पहले महासचिव और अध्यक्ष बिहार से थे। हालांकि समय के साथ यह रफ्तार थम गई थी, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। शंकरण के अनुसार, बिहार के माननीय मुख्यमंत्री ने खेलों को बढ़ावा देने के लिए एक स्पष्ट लक्ष्य तय किया। उन्होंने कहा कि बिहार को खेल में एक क्रांति का रूप लेना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए राज्य में खेलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का काम शुरू हुआ।
अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी करने की तैयारी
पिछले तीन साल में सरकार ने कई बड़े कदम उठाए। गांव-गांव में स्पोर्ट्स अकादमी, कोचिंग सेंटर और स्टेडियम बनाए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं के साथ पटना में खेल परिसर तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा खिलाड़ियों को आधुनिक ट्रेनिंग, पोषण और फिटनेस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शंकरण ने यह भी बताया कि बिहार अब सिर्फ घरेलू खेलों तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है।
हाल ही में राज्य में कई राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताएं सफलतापूर्वक आयोजित की गईं और आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट लाने की योजना है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य सिर्फ खेल प्रतिभाओं को पहचानना नहीं, बल्कि उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना है। सरकार चाहती है कि बिहार के खिलाड़ी ओलंपिक और एशियन गेम्स में देश का नाम रोशन करें।












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