विनेश फोगाट की अपील में बड़ी गलती से हारे केस, कोर्ट ने 24 पेज के फैसले में बताया क्यों ख़ारिज की याचिका

Vinesh Phogat Case Decision: पेरिस ओलंपिक में भारतीय रेसलर विनेश फोगाट को 50 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में जाने से इसलिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था क्योंकि उनका वजन ज्यादा था। इसके बाद भारतीय ओलंपिक संघ ने इस मामले को कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट्स में उठाया था।

भारत की तरफ से मामले में अपील डाली गई थे और वहां से मामला कुछ दिनों तक चलता था। अंत में 16 अगस्त को इस मामले में फैसला आ गया। विनेश फोगाट की अपील खारिज कर दी गई। कोर्ट ने विनेश द्वारा की गई सिल्वर मेडल की मांग को नहीं माना और नियमों का हवाला दिया।

vinesh phogat

CAS ने अपनी वेबसाईट पर फैसले की कोपी अपलोड की है। इसमें पूरे प्रोसेस से लेकर फैसले के बारे में कुल 24 पन्नों का पीडीएफ अपलोड किया गया है। विनेश फोगाट की अपील को नियमों के आधार पर खारिज किया गया है। यह भी बताया गया कि आपने खुद ने अपील में माना है कि नियमों के आधार पर आपको बाहर किया गया है।

फैसले में लिखा गया कि एथलीट स्वीकार करती है कि नियमों के तहत उसे प्रतियोगिता के अंतिम दौर में उस पहलवान से रिप्लेस गया था जो सेमीफाइनल में उसके खिलाफ हार गई और स्वर्ण और रजत दोनों पदक प्रदान किए जा चुके हैं। वह (विनेश) यह नहीं कहती कि कोई दूसरा पहलवान अपना पदक खो दे, बल्कि वह खुद दूसरा रजत पदक चाहती है। ऐसा कोई आधार नहीं है जिसके तहत कोर्ट उनको रजत पदक देने के लिए राहत प्रदान कर सके।

एथलीट अनुरोध करता है कि अपील किए गए निर्णय को इस तरह से रद्द कर दिया जाए कि नियमों के अनुच्छेद 11 में दिए गए परिणाम लागू न हों या अनुच्छेद 11 को इस प्रकार समझा जाए कि यह केवल प्रतियोगिता के अंतिम दौर पर लागू हो, न कि शुरुआत में प्रतियोगिता पर। यह प्रतियोगिता में नहीं है कि एथलीट दूसरे दिन के वेट-इन में विफल रहा। नियमों के अनुच्छेद 11 को चुनौती नहीं दी गई है। इसका तात्पर्य यह है कि निर्णय वैध रूप से किया गया था और अनुच्छेद 11 लागू होता है।

यह भी कहा गया कि एथलीट ने अनुरोध किया है कि निर्णय को ऐसे रद्द किया जाए, जिससे आर्टिकल 11 के नियम परिणाम में लागू न हो। इसका मतलब है कि आर्टिकल 11 को चुनौती नहीं दी गई है और निर्णय उनके खिलाफ वैध तरीके से दिया गया है तथा आर्टिकल 11 यहाँ लागू होता है।

निर्णय में कहा गया कि एथलीट ने वजन सीमा को उस दिन की व्यक्तिगत परिस्थितयों से समायोजित करने के लिए अलग रखना का निवेदन किया। वजन सीमा पर टॉलरेन्स लागू करने का अनुरोध किया। टॉलरेन्स की कोई सीमा नहीं बताकर सिर्फ यही कहा गया है कि दूसरे दिन वजन टॉलरेन्स के भीतर था। आवेदक के लिए समस्या यह है कि नियमों में ऐसी बातों का कोई आधार नहीं है। इसके विपरीत: नियम स्पष्ट हैं कि 50 किलोग्राम वजन की सीमा होनी चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि जब एथलीट ने पहले दिन वजन पास कर लिया था तो उनको फाइनल वाले दिन भी वजन पास करना था। नियमों के आर्टिकल 11 के लागू होने का मतलब था कि वह प्रतियोगिता से बाहर हो गई और बिना किसी रैंक के अंतिम स्थान पर रही। यह रजत पदक देने से रोकता है, भले ही प्रतियोगिता के पहले दिन उनके प्रदर्शन ने सुनिश्चित किया था कि वह कम से कम रजत पदक हासिल करेंगी।

CAS ने कहा कि 6 अगस्त को आर्टिकल 11 का नियम कायम रखने के कारण वह सिल्वर मेडल के लिए योग्य थीं और उनको इसे अगले दिन भी बरकरार रखना था। यही नियम 7 अगस्त को वेट-इन के लिए लागू था। UWW की पॉलिसी में साफ़ है कि रेसलर को इवेंट के शुरुआत से लेकर अंत तक यानी फाइनल तक पात्र रहना चाहिए। इस वजह से कोई आंशिक पात्रता का अधिकार नहीं होता क्योंकि प्रतियोगिता के दौरान आर्टिकल 11 के नियम लागू हो जाते हैं। इसका मतलब यह है कि एकमात्र मध्यस्थ (कोर्ट) मांगी गई राहत देने से इनकार करती है और आवेदन ख़ारिज किया जाता है।

पूरी चीजों को देखने के बाद एक बात समझ में यही आती है कि विनेश की तरफ से कोर्ट में आर्टिकल 11 को चुनौती नहीं दी गई, जो नियमों से सम्बंधित है। कोर्ट का कहना था कि जब नियमों के तहत आपने खुद को इवेंट से बाहर माना है, तो आगे किस मामले पर बात की जाए। आपको नियम के तहत बाहर किया गया है। अगर नियम को भारत की तरफ से चुनौती दी जाती, तो शायद कुछ और बात बन सकती थी।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+