Fifa World Cup : जब जानी दुश्मन की तरह भिड़े थे ईरान और अमेरिका, फिर तो...

अगर वर्ल्ड रैंकिंग की बात करें तो ईरान एशिया की नम्बर एक फुटबॉल टीम है। दुनिया की शीर्ष टीमों की सूची में वह 20वें नम्बर पर है। इस बार वह छठी बार विश्वकप फुटबॉल प्रतियोगिता खेल रही है। क्षेत्रीय युद्ध और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भी ईरान में फुटबॉल का स्तर हमेशा ऊंचा रहा। 2022 के विश्वकप में ईरान ग्रुप बी में है। इस ग्रुप में ईरान के अलावा इंग्लैंड, अमेरिका और वेल्स हैं। प्रतियोगिता के दूसरे दिन यानी 21 नवम्बर को ईरान और इंग्लैंड के बीच मुकाबला होना है। (All Photo- FIFA)

राजनीतिक दुश्मनी के बीच फुटबॉल की जंग

राजनीतिक दुश्मनी के बीच फुटबॉल की जंग

30 नवम्बर को विश्वकप फुटबॉल का एक खास मैच होगा। इस दिन ईरान की भिड़ंत अमेरिका से होनी है। राजनीतिक दुश्मनी के बीच अमेरिका-ईरान का फुटबॉल मैच किसी जंग से कम नहीं होता। इसके पहले भी 1998 के विश्वकप में दोनों की टक्कर हुई थी। तब अंतर्राष्ट्रीय तनाव के बीच मुश्किल हालात में खेला गया था यह मैच। ईरान और अमेरिका के बीच दुश्मनी की वजह राजनीतिक थी। पहले ईरान में मोहम्मद शाह रजा पहलवी का शासन था और वे अमेरिका समर्थक थे। लेकिन 1979 में कट्टरपंथी नेता आयातुल्ला खुमैनी के नेतृत्व में एक क्रांति हुई जिसने रजा शाह पहलवी की सत्ता को उखाड़ फेंका। क्रांति से समय ईरानी छात्रों ने अमेरिकी दूतावास के 52 लोगों को बंधक बना लिया था।

अमेरिकी नागरिक बंधक विवाद

अमेरिकी नागरिक बंधक विवाद

ये अमेरिकी नागरिक एक साल तीन महीने तक ईरान में बंधक बने रहे। अमेरिका ने बंधकों को छुड़ाने के लिए आर्मी ऑपरेशन लॉन्च किया लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिली। इस घटना की वजह से अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर चुनाव हार गए। अमेरिका को झुकना पड़ा। ईरानी सम्पत्तियों को मुक्त करने के बदले में अमेरिकी बंधक छोड़े गये। इस तौहीन से अमेरिका, ईरान को सबसे बड़ा दुश्मन मानता था। दूसरी तरफ ईरान अपनी बर्बादी के लिए शाह रजा पहलवी और अमेरिका को जिम्मेदार मानता था। जब ईरान का इराक से युद्ध (1980-88) हुआ तो अमेरिका ने इराक का साथ दिया था। इसकी वजह से ईरान और अमेरिका एक दूसरे को शत्रु समझते थे।

मैच से पहले राजनीतिक अड़चन

मैच से पहले राजनीतिक अड़चन

1998 का विश्वकप फुटबॉल फ्रांस में खेला गया था। ईरान और अमेरिका एक ही ग्रुप में थे। 21 जून 1998 को फ्रांस के लियोन शहर के स्टेड डी गेरलैंड स्टेडिम में मैच के लिए दोनों टीम पहुंची। मैच शुरू होने से पहले परम्परा के मुताबिक दोनों टीमें के खिलाड़ियों को एक दूसरे से हाथ मिलाना था। लेकिन ईरान के तत्कालीन शासक अली खमेनेई ने अपने खिलाड़ियों को आदेश दिया कि वे हाथ मिलाने के लिए अमेरिकी खिलाड़ियों की तरफ हरगिज न बढ़ें। अगर हाथ मिलाना है तो अमेरिकी खिलाड़ियों को खुद आगे बढ़ कर ईरानी खिलाड़ियों के पास आना होगा। इस बात से फीफा के अधिकारी बहुत परेशान हो गये। वे दोनों टीमों को मनाने की कोशिश करते रहे। लेकिन ईरान टस से मस नहीं हुआ। काफी मान मनौव्वल के बाद अमेरिका आगे बढ़ कर हाथ मिलाने के लिए राजी हो गया। इसके बाद मैच शुरू हुआ।

जब ईरान ने अमेरिका को हराया

जब ईरान ने अमेरिका को हराया

युद्ध के मैदान में अमेरिका, ईरान पर भारी पड़ता था। इसलिए ईरान के खिलाड़ी कम से कम खेल के मैदान में भी अमेरिका को हराना चाहते थे। राष्ट्रीयता के इस जुनून ने ईरानी फुटबॉल खिलाड़ियों की संकल्प शक्ति को कई गुना बढ़ा दिया। उन्होंने अपने से मजबूत अमेरिका के खिलाफ जोरदार खेल दिखाया। ईरान इस मैच को 2-1 से जीत लिया। पहला गोल ईरान की तरफ से 40वें मिनट में हामिद रजा एस्तिली ने किया। इसके बाद मेहदी महदविकिया ने 84वें मिनट मे ईरान के लिए दूसरा गोल ठोक दिया। ईरान से ऊंची रैंकिंग वाला अमेरिका 2-0 से पिछड़ रहा था। तब 87वें मिनट में रॉबर्ट मैकब्रिड ने अमेरिका के लिए पहला गोल किया। अमेरिका ने बहुत जोर लगाया लेकिन वह बराबरी का गोल नहीं कर पाया। इस तरह ईरान ने विश्वकप फुटबॉल में अमेरिका को हरा कर एक बहुत बड़ी मनौवैज्ञानिक जीत हासिल की। इस जीत के बाद ईरान की राजधानी तेहरान में लोग जश्न मनाने के लिए सड़कों पर उतर गये थे। हालांकि ईरान अमेरिका के खिलाफ जीत गया था लेकिन वह अपने ग्रुप में जर्मनी और युगोस्लाविया से हार कर पहले चरण में प्रतियोगिता से बाहर हो गया था।

3 एशियन गेम्स गोल्ड, 3 एशियन कप

3 एशियन गेम्स गोल्ड, 3 एशियन कप

विश्वकप फुटबॉल में ईरान आज तक दो मैच ही जीत पाया है। 1998 में उसने अमेरिका को और 2018 में मोरक्को को हराया था। जहां तक ओलम्पिक की बात है तो ईरान 1976 के मॉन्ट्रियल ओलम्पिक के क्वार्टर फाइनल में पहुंचा था। एशिया स्तर पर ईरान का प्रदर्शन बेहतर रहा है। इसने तीन बार एशियन कप जीता है। तीन बार एशियन गेम्स का गोल्ड मेडल जीता है। राजनीतिक कारणों से 2006 में ईरान में यह खेल कुछ समय के लिए प्रभावित रहा। तब फीफा ने पाया था कि ईरान के फुटबॉल संघ में सरकार की दखलंदाजी बढ़ गयी थी। इसकी वजह से ईरानी टीम को अंतर्राष्ट्रीय मैचों के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था। लेकिन शिकायतें दूर होने के बाद कुछ महीने में ही इसकी मान्यता फिर बहाल कर दी गयी थी। जुलाई 2005 में ईरान की फीफा वर्ल्ड रैंकिंग 15 थी जो कि अब तक कि सर्वोच्च है।

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