WTC Final से पहले पुजारा और स्मिथ दोनों ने की काउंटी में प्रैक्टिस, एक ने लगाई सेंचुरी, दूसरा क्यों हुआ फ्लॉप
WTC Final 2023: स्टीव स्मिथ और चेतेश्वर पुजारा ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप मुकाबले से पहले इंग्लिश कंडीशन में पूरी तरह अनुकूल होने के लिए काउंटी क्रिकेट खेला था, लेकिन एक के हिस्से शतक आया और दूसरे के हिस्से में नाकामी।

WTC Final 2023 in Hindi: वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल 2023 मुकाबले में भारत की पहली पारी के दौरान चेतेश्वर पुजारा का अप्रत्याशित ढंग से आउट होना काफी सवाल खड़े करता है। पुजारा ने कैमरन ग्रीन की गेंद ना खेलने का फैसला किया लेकिन अपने ऑफ स्टंप को एक्सपोज कर दिया।
इतना काउंटी खेलने के बाद ये गलती कैसे?
हैरानी यह है कि इतना काउंटी क्रिकेट खेलने और इंग्लिश हालातों को समझने के बावजूद पुजारा ऐसी गलती कैसे कर बैठे? डब्लूटीसी फाइनल मुकाबले में ओवल के मैदान पर दूसरे दिन गिरे भारतीय विकेटों में सबसे खराब आउट पुजारा का ही कहा जाएगा।
'सक्सेस' के लिए ससेक्स में गए थे पुजारा-स्मिथ
रवि शास्त्री ने भी कहा है कि 100 टेस्ट मैच खेलने के बाद इस तरह से आउट होने का कोई मतलब नहीं बैठता कि आपको अपने ऑफ स्टंप के बारे में ही नहीं पता कि वह कहां पर है। पुजारा और स्टीव स्मिथ दोनों वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के इस शिखर मुकाबले से पहले काउंटी क्रिकेट में ससेक्स के लिए काफी सक्सेस पा रहे थे।
सवाल यह है कि जब भारत के और क्रिकेटर आईपीएल में खेल रहे थे, तो इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट का अनुभव लेने वाले पुजारा अपने एक्सपीरियंस को सबसे अहम मौके पर क्यों नहीं उतार सके? यहां कुछ बातें निकल कर सामने आती है जिन पर चर्चा करना जरूरी है।
पुजारा का परफॉर्म ना करना-
भले ही पुजारा ने काउंटी क्रिकेट में ढेरों रन बनाए हो और अंग्रेजी परिस्थितियों को भी बखूबी समझा हो, लेकिन क्या उनके सामने ऐसी गेंदबाजी मौजूद थी जैसी ऑस्ट्रेलिया वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल मुकाबले में लेकर आया है?
इसका जवाब है- नहीं, क्योंकि काउंटी क्रिकेट में अधिकतर इंग्लैंड के घरेलू गेंदबाज होते हैं, और उनके पास इतनी स्पीड देखने के लिए नहीं मिलती जितनी ऑस्ट्रेलियाई इंटरनेशनल के पास होती है। इंग्लैंड कभी भी बहुत तेज गति के गेंदबाज पैदा करने के लिए नहीं जाना गया है।
हां, कुछ 90 मील प्रति घंटा की रफ्तार वाले हुए हैं, लेकिन अधिकतर गेंदबाज जेम्स एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड की कैटेगरी में आते हैं जो अंग्रेजी स्विंग हालातों का फायदा उठाते हुए साइड की मूवमेंट पर पर ज्यादा ध्यान देते हैं।
स्मिथ को भाता है इंग्लैंड में खेलना-
पुजारा ने इंग्लैंड के काउंटी क्रिकेट में अधिकतर ऐसे गेंदबाजों का सामना किया जो कंगारू गेंदबाजों के सामने कुछ भी नहीं थे। जबकि स्मिथ ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें इंग्लैंड में खेलना परंपरागत तौर पर भाता है। उन्होंने पहली पारी में शतक लगाकर इंग्लैंड में सर्वाधिक रन बनाने के मामले में गैरी सोबर्स का रिकॉर्ड तोड़ा है।
स्मिथ इंग्लैंड की धरती पर कई सेंचुरी लगा चुके हैं इसके बावजूद भी स्टीव स्मिथ ने काउंटी में जाकर अपनी बैटिंग को और ज्यादा विश्वसनीय बनाया। असल में स्टीव स्मिथ को इंग्लैंड की पिचों पर टप्पा खाने के बाद आनेवाली धीमी गेंदबाजी का सामना करना पसंद आता है।
इंग्लिश परिस्थितियों में स्मिथ को तेज गेंदबाजी का सामना करने में कभी दिक्कत नहीं होती क्योंकि वे परंपरगत तौर पर एक ऑस्ट्रेलियाई होने के नाते पेस अटैक खेलने में बहुत माहिर हैं। लेकिन हमने देखा था कि स्मिथ को स्पिन खेलने में दिक्कत हो सकती है।
स्मिथ को फंसाने के लिए चाहिए टर्निंग पिच या सही लाइन लेंथ-
इसलिए जब वे पिछली बार्डर गावस्कर ट्रॉफी में भारत में मौजूद थे तो उन्होंने टर्निंग पिचों पर संघर्ष किया। पर इंग्लैंड में गेंद इतनी स्पिन नहीं होती। इसके अलावा भारतीय गेंदबाजों ने भी गुड लेंथ पर कम गेंदबाजी की और स्टीव स्मिथ को शॉर्ट लेंथ पर कोई दिक्कत नहीं हुई। साथ ही स्मिथ के ऑफ स्टंप को टारगेट करते हुए लगातार गेंदबाजी नहीं की गई। स्मिथ को खूब हिलते-डुलते देख गेंदबाज उनके पैड पर गेंद मारकर LBW के लिए बहुत ललचाते हैं लेकिन यह मास्टर बल्लेबाज ऐसे नहीं फंसता।
इन सब चीजों के चलते पुजारा और स्मिथ दोनों एक साथ काउंटी क्रिकेट खेलने के बावजूद मौका आने पर बिल्कुल अलग अलग परफॉर्मेंस करते नजर आए। अभी पुजारा से अगली पारी में भरपाई करने की उम्मीद है, जबकि स्टीव स्मिथ ने अपना काम कर दिया है और आगे भी खतरनाक ही रहेंगे।












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