महिला फैन को मिले वानखेड़े, कोटला में बेहद गंदे टॉयलेट, BCCI से किया सवाल, कब बदलेगी मानसिकता?
दिल्ली और मुंबई के ये क्रिकेट स्टेडियम दो फ्रेंचाइजी के होम ग्राउंड बनने जा रहे हैं और अभी से सवाल उठने लगे हैं कि क्या महिला प्रीमियर लीग के लिए महिला फैंस की बेसिक जरूरतों के प्रति भी आयोजक वाकई में संवेदनशील हैं?

Toilet in Indian Cricket Stadium: क्रिकेट के प्रति भारतीय क्रिकेट फैंस का पैशन दुनिया भर में चर्चित है। दिल्ली में हुए अरुण जेटली स्टेडियम में भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया दूसरे टेस्ट मैच के दौरान जिस तरह भारी संख्या में फैंस ने उपस्थिति दर्ज कराई वह सराहनीय थी। टेस्ट मैचों में एशियाई देशों में ऐसा क्रेज देखने को नहीं मिलता है। सफेद गेंद क्रिकेट में तो इन फैंस का कहना ही क्या। क्रिकेट भारत में लगातार एक जुनून बना हुआ है और फैंस के लिए बिना ये अधूरा है। कोविड में बंद दरवाजों के पीछे खेल ने ज्यादा उत्सुकता नहीं दिखाई और अब फिर से मैदानों में बहार आ चुकी है तो इसका कारण फैंस हैं।
शिकायत महिला क्रिकेट फैन की ओर से आई
हालांकि अफसोस की बात है कि मैच के आयोजक इन फैंस का ध्यान रखने में उतनी तत्परता नहीं दिखा रहे हैं। इस बार एक शिकायत महिला क्रिकेट फैन की ओर से आई है जिसने बताया है कि देश के दो प्रतिष्ठित स्टेडियम में टॉयलेट ना तो साफ है और ना ही सुरक्षित है। ये दो स्टेडियम हैं- मुंबई का वानखेड़े और दिल्ली का फिरोजशाह कोटला। वुमन प्रीमियर लीग भी आ रही है जहां ये स्टेडियम दो फ्रेंचाइजी के होम ग्राउंड बनने जा रहे हैं और अभी से यहां पर सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि क्या महिला प्रीमियर लीग के लिए महिला फैंस को मिलने वाली सुरक्षा के प्रति आयोजक वाकई में संवेदनशील हैं?
कोटला और वानखेड़े स्टेडियम में बहुत खराब टॉयलेट
शिकायत करने वाली महिला का नाम शिखा पांडे है और उन्होंने बीसीसीआई और उसके सचिव जय शाह को टैग करते हुए कहा है कि पिछले 14 महीनों में वह भारत के 2 सबसे बड़े शहरों में एक दर्शक के तौर पर क्रिकेट देखने के लिए गईं थीं जहां उनकी बेटी भी साथ थी और उन्होंने कोटला और वानखेड़े स्टेडियम में बहुत खराब टॉयलेट का अनुभव किया। वह कहती है कि मुंबई में महिला टॉयलेट अधिकतर समय लॉक रहते हैं और जब कोई एक खुला मिल जाता है तो वहां पर कोई लाइट नहीं होती, ना ही पानी और कूड़ेदान होता है। यहां तक कि टॉयलेट पेपर भी नहीं होता है। मुझे अपनी बेटी को बताना पड़ा कि जब तक हम स्टेडियम नहीं छोड़ देते तब तक कोई पानी नहीं पीना है।
BCCI को दी मानसिकता में बदलाव की चुनौती
उन्होंने दिल्ली में अपना अनुभव शेयर किया और कहा कि दिल्ली में ओपन टॉयलेट वानखेड़े से तो ज्यादा है लेकिन फ्लश टैंक से कनेक्ट होने वाले पानी के पाइप गायब है। इस वजह से वहां पर भी फर्श और शीट काफी गंदी रहती है क्योंकि कूड़ेदान भी नहीं है। यह हमारा अधिकार है कि हम हर कहीं साफ सुथरा वॉशरूम इस्तेमाल करें। प्लीज हमें यह मत बताइए कि हमें टीवी पर मैच देखना चाहिए। यह बहुत ही शर्मनाक बात है कि महिला दर्शकों को इस तरह की कंडीशन का सामना करना पड़ता है। महिला आईपीएल अब आ ही रहा है और जो महिलाएं इस खेल को देखना चाहती हैं उनके साथ सही बर्ताव होना चाहिए। शिखा आगे कहती है कि पुरुषों का विश्वकप 2023 साल के अंत में आ रहा है तो क्या बीसीसीआई तब तक अपनी मानसिकता में बदलाव करने की चुनौती को स्वीकार करेगी? कृपया साफ-सुथरे टॉयलेट बनवाए जाएं और उसके लिए एजेंसी को हायर कीजिए कि टॉयलेट मैनेजमेंट अच्छे से हो सके। यह किया जा सकता है। मैं आशा करती हूं कि आप इन सुझावों को गंभीरता से लेंगे। धन्यवाद।
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