मुरलीधरन और शेन वार्न में कौन था महान? एक महान बल्लेबाज ने ये दिया था इस सवाल का जवाब
नई दिल्ली, 4 मार्च: एक तरफ ऑस्ट्रेलिया की टीम 24 साल बाद पाकिस्तान का दौरा करते हुए रावलपिंडी में पहला टेस्ट मैच खेल रही थी तो दूसरी ओर कंगारू दिग्गज शेन वार्न के निधन की जबरदस्त झटकेदार खबर सामने आई। ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के सबसे महान लेग स्पिनर शेन वार्न केवल 52 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कहकर सबको हैरान कर गए। उनकी मौत का कारण हार्ट अटैक बताया जा रहा है। लेग स्पिन की दुनिया में सबसे जादुई गेंदबाज कहे जाने वाले शेन वार्न अपने नाम टेस्ट मैचों में 708 विकेट ले चुके थे।

शेन वार्न बनाम मुथैया मुरलीधरन-
यह एक ऐसा आंकड़ा है जो केवल श्रीलंका के महानतम गेंदबाज मुथैया मुरलीधरन ही पार किया है। मुथैया मुरलीधरन ने अपने करियर में 800 विकेट लिए। शेन वार्न अपने घर पर अचेत हालत में पाए गए। मेडिकल स्टाफ द्वारा की गई बेस्ट कोशिशों के बावजूद वे बचाए नहीं जा सके। शेन वार्न ने 145 टेस्ट मैच खेले तो वही 194 वनडे मुकाबले भी खेले जिसमें उनको 293 विकेट हासिल हुए। वे आईपीएल में भी सक्रिय थे और यहां उन्होंने 55 मैच खेले। इतना ही नहीं, शेन वार्न ने राजस्थान रॉयल्स को 2008 में पहला आईपीएल खिताब जिताने में सबसे अहम भूमिका निभाई थी।

फिरकी के जादूगर के शेन वार्न-
क्रिकेट फलक पर यह चर्चा हमेशा चलती रही कि वार्न और मुथैया मुरलीधरन में कौन महान है। आज वार्न दुनिया में नहीं रहे लेकिन यह विवाद अभी भी जारी रहेगा कि इन दोनों गेंदबाजों में आखिर कौन बेहतर है।
मुथैया मुरलीधरन ने 133 टेस्ट मुकाबले खेले और 22.73 की औसत से 800 विकेट हासिल किए। मुरलीधरन ने वनडे में भी 350 मैच खेले और 534 विकेट हासिल किए जिसमें उनका औसत 23.08 रहा। दूसरी ओर वार्न का टेस्ट एवरेज 25.42 रहा जबकि ओडीआई में उन्होंने 25.74 की औसत से बोलिंग की। अगर हम केवल आंकड़ों को ही महानता का पैमाना मान लें तो मुरलीधरण के सामने वार्न कहीं नहीं टिकते हैं। लेकिन जैसा कि कहा जाता है आंकड़ों की कहानी कुछ और होती है और असलियत कुछ और ही कहानी बयां करती है। ठीक ऐसी ही स्थिति शेन वॉर्न बनाम मुथैया मुरलीधरन की बहस की है।

सबसे सम्मानित स्पिनर माने जाते रहे शेन वॉर्न-
मुथैया मुरलीधरन ने अपने अधिकतर मैच श्रीलंका की टर्निंग पिचों पर खेले तो वहीं वार्न ने अपने अधिकतर मैच ऑस्ट्रेलिया की धरती पर खेले जो स्पिनरों की पारंपरिक मददगार पिचे नहीं होती हैं। मुरलीधरन कई बार विवादों में रहे तो वार्न एकदम क्लासिक एक्शन के चलते पूरी दुनिया में छाए रहे। इतना ही नहीं शेन वार्न ने 1993 की एशेज में बॉल ऑफ द सेंचुरी भी फेंकी थी। हालांकि वार्न का करियर भी विवादों में रहा। 2003 विश्व कप में वे ड्रग टेस्ट में फेल हो गए। एक विवादित और रंगीली पर्सनैलिटी के बावजूद वार्न दुनियाभर के क्रिकेट बिरादरी में सबसे सम्मानित स्पिनर के तौर पर देखे जाते रहे।

वार्न बनाम मुरलीधरन की डिबेट जारी है
वार्न बनाम मुरलीधरन की डिबेट जारी है। दोनों ने ही अपने-अपने युग में बल्लेबाजों को अपनी फिरकी पर अपने अपने इशारे पर नचाया है। श्रीलंका के ही महान बल्लेबाज मुथैया मुरलीधरन ने 2020 में ईएसपीएनक्रिकइंफो को इंटरव्यू दिया था जहां उन्होंने इस बहस पर अपने अपने विचार व्यक्त किए थे। महेला जयवर्धने ने कहा था कि शेन वार्न के पास मुथैया मुरलीधरन की तुलना में विविधता कम है। महेला जयवर्धने के अनुसार वार्न ऐसे गेंदबाज थे जो सोच विचार करके बॉलिंग करते थे, जिनकी रणनीति सटीक थी, जबकि मुथैया मुरलीधरन के पास इतनी वैरिएशन थी कि बल्लेबाज उनसे तंग होकर आउट हो जाते थे।

महेला जयवर्धने ने कहा- मुरली के पास वार्न से ज्यादा विविधता थी
महेला जयवर्धने ने कहा था मुरली एक चैंपियन गेंदबाज थे बाकी लोगों की तुलना में उनका गेम अलग था। वार्न के पास मुरली जितनी विविधता ही नहीं थी। मुरली जानते थे कि वह क्या करने जा रहे हैं और वह बल्लेबाजों को मसलने में विश्वास रखते थे। अगर उनको किसी बल्लेबाज को आउट करने के लिए 10 ओवर की प्रतीक्षा करनी है तो वह वह भी कर देंगे। बता दे मुथैया मुरलीधरन ने अपने करियर के बाद के दिनों में जबरदस्त 'दूसरा' गेंद फेंकने की क्षमता विकसित कर ली थी जो बल्लेबाजों के सामने लेग स्पिन की तरह घूमती हुई आती थी और इसको पढ़ना लगभग नामुमकिन होता था। इस पर मुरलीधरन ने कई बल्लेबाजों को अपना शिकार बनाया है। वैसे वार्न भी कम महारथी नहीं थे। उनके पास लेग स्पिन के अलावा गुगली, टॉप स्पिन, फ्लिपर जैसी गेंदे थी।












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