'दौलत, शोहरत, सफलता खुशियों की चाबी नहीं हैं', इन तीनों को पाकर भी कभी-कभी खुश नहीं हो पाते कोहली
Virat Kohli Happiness Mantra: विराट कोहली का व्यक्तित्व बयां करता हैं कि वे महज एक सफल क्रिकेटर नहीं हैं बल्कि जीवन के कई बुनियादी पहलुओं की भी कद्र करते हैं। उनके लिए खुशी दौलत, शोहरत, कामयाबी में ही नहीं सिमटी नहीं है।

जिंदगी में पैसा हर चीज, हर खुशी नहीं दिला सकता। दौलत के साथ शोहरत की भी ख्वाहिश बनी रहती है लेकिन दौलत और शोहरत भी मिलकर इंसान की इच्छाओं को पूरा नहीं कर सकती। मनुष्य जीवन में छोटी-छोटी सफलताओं का आनंद लेते हुए आगे बढ़ना चाहता है लेकिन उपरोक्त तीनों चीजों के होने के बावजूद विराट कोहली का मानना है कि वे इन्हें खुशियों की चाबी नहीं मान सकते। यहां तक की उन्होंने स्वीकार किया था कि वे इन तीनों चीजों के मालिक होने के बावजूद अपने जीवन के कुछ पहलुओं में कभी-कभी नाखुश महसूस कर चुके हैं।

खुशी की तलाश
कोहली ऐसे शख्स हैं जिनको आप खुशी की तलाश में घूमता हुआ पाएंगे। ये घूमना सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक भी है। उन्होंने क्रिकेट से ब्रेक के बीच में अनुष्का के साथ जो धार्मिक यात्राएं की हैं और जिन पवित्र जगहों पर वे गए हैं उससे अंदाजा लगता है कि वे जीवन की क्षणभंगुरता में असली खुशियों की तलाश कर रहे हैं जहां उनको अथाह शांति भी मिल सके। कोहली कई दार्शनिकों से भी प्रभावित रहे और कई बार तो खुद फिलोसफर जैसी बातें करते हैं। कोहली का व्यक्तित्व बयां करता हैं कि वे महज एक क्रिकेटर नहीं बल्कि इंसान ज्यादा हैं जिसके जज्बात दौलत, शोहरत, कामयाबी से ऊपर भी हैं।

सफलता, ग्लैमर और दौलत पर अधिक फोकस चला जाता है
सफलता के शिखर को छू रहे विराट की सोच बताती है कि जीवन में हर स्थितियों में कुछ ना कुछ संतुष्टी और उपलब्धि छुपी है। कुछ ऐसे आदर्श हैं जिनको पाने के लिए हम उनका पीछा लगातार करते हैं। कई बार इसी सफर में जो सुकून मिलता है वही सबसे बड़ा मजा देता है। आज के कई क्रिकेटर कोहली जैसा बनने की फेर में उनके व्यक्तित्व के पक्ष पर ध्यान नहीं देते बल्कि सफलता, ग्लैमर और दौलत पर अधिक फोकस चला जाता है। विराट ने एक बार आरसीबी से बात करते हुए कहा था कि एक समय के बाद आपको सब पाने के बाद अहसास होता है कि जीवन में चीजों की सामान्यता कितनी जरूरी है।

मेरे पास ये तीनों चीजें मौजूद हैं, लेकिन..
कोहली ने आगे कहा था, तो नाम, दौलत, सफलता तब बहुत बड़ी चीजें लगती हैं जब ये आपके पास नहीं होती लेकिन ईमानदारी से कहूं तो ये खुशियों की चाबी नहीं हैं। मैं यहां बैठकर कह सकता हूं कि मेरे पास ये तीनों चीजें मौजूद हैं, लेकिन कुछ ऐसे पल होते हैं जब मैं बस खुश नहीं होता हूं। अगर मैं खेलना चाहता हूं तो मुझे उसी तरह की प्रतिबद्धता के साथ खेलना होगा जैसे सफलता मिलने से पहले खेलता था। जब आप एक लेवल पर पहुंच जाते हैं तो ऐसा नहीं होता कि चलो अब तो मैं इतनी ऊपर हूं तो बाकी सब चीजें खुद ही होती रहेंगी। कोई पैसा, नाम, सफलता आपको इन चीजों से मुक्त नहीं कर सकती क्योंकि आपको इन्हें बरकरार रखने के लिए हर दिन वही करते जाना होगा वर्ना आपका हाल बेहाल हो जाएगा।












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