1983 में जब कपिलेदव एंड कंपनी ने गाया लता दी के साथ गाना.. फिर तो अमिट इतिहास बन गया

नई दिल्ली: भारत रत्न स्वर कोकिला लता मंगेशकर के दिल में क्रिकेट भी संगीत की तरह बसा हुआ था। क्रिकेट के प्रति उनकी दिवानगी हद से ज्यादा थी। भारतीय क्रिकेट टीम 1983 में विश्वकप जीत कर भारत लौटी थी। लता दी की खुशियों का ठिकाना न था। उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम को एक यादगार तोहफा देने की योजना बनायी। भारतीय टीम के लिए उन्होंने एक स्पेशल म्यूजिक कंसर्ट आयोजित किया। फिर तो जो हुआ वो इतिहास बन गया। ऐसा आयोजन ना कभी संगीत के इतिहास में हुआ ना कभी क्रिकेटर के इतिहास में। भारत की विश्वविजेता टीम के लिए चर्चित गीतकार इंदिवर ने एक खास गाना लिखा जिसे संगीत से संवारा था लता दी के भाई हृदयनाथ मंगेशकर ने। भारतीय टीम के सभी सदस्यों ने इस गीत को गाने के लिए लता दी के साथ कई दिनों तक अभ्यास किया था। फिर वो एतिहासिक दिन आया जब भारत की विश्वविजेता टीम के सभी सदस्यों ने लता दी के साथ लाइव कंसर्ट में गाया। इसका आयोजन मुम्बई में हुआ था। लता दी ने कपिलदेव और उनकी टीम को गायक बना कर ही दम लिया था।

जब पूरी भारतीय टीम ने गाया लता दी के साथ गाना

जब पूरी भारतीय टीम ने गाया लता दी के साथ गाना

कपिलदेल, सुनील गावस्कर श्रीकांत, मोहिंदर अमरनाथ, रोजर बिन्नी, मदनलाल, सैयद किरमानी जैसे क्रिकेटरों को गाने के लिए उतना रियाज करना पड़ा जितना कि उन्होंने विश्वकप जीतने के लिए नेट प्रैक्टिस भी नहीं की थी। लता दी ने इन क्रिकेटरों से खूब रियाज कराया था ताकि उनकी गायकी स्वभाविक लगे। गाने के बोल थे- भारत विश्वविजेता अपना.. संग है विश्वविजेता अपना... हरेक दिशा में विजय मिले, हमें इसका बल है देता... भारत विश्वविजेता.. भारत विश्वविजेता... एक तरफ थे भारत के खिलाड़ी, एक तरफ था सारा जहां... जहां एकता वहां सफलता, जहां मनोबल विजय वहां... भारत विश्वविजेता अपना... भारत विश्वविजेता... वंदे मातरम्... वंदे मातरम्...। जब ये गीत समाप्त हुआ उसके बाद पूरा हॉल कई मिनट तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। खेल और संगीत की दुनिया में ऐसा अजूबा आज तक नहीं हुआ था। जब ये गाना लाइव परफॉर्म होने लगा तो सभागार में मौजूद सारे लोगों ने दांतों तले अंगुलियां दबा लीं। जो क्रिकेटर सिर्फ बैटिंग-बौलिंग जानते थे वे इतना अच्छा गाना भी गा सकते हैं ? ये देख-सुन कर हर किसी ताज्जुब हुआ। ये कमाल हुआ था लता दी के कारण। उन्होंने सर्वश्रेष्ठ देने के लिए अपने पूरे अनुभव को झोंक दिया था। इस कंसर्ट से 20 लाख रुपये इकट्ठा हुए थे। लता दी ने ये 20 लाख रुपये भारतीय टीम को सम्मान स्वरूप भेंट कर दिये थे।

मंगेशकर परिवार में लता दी के जन्म से पहले क्रिकेट प्रेम

मंगेशकर परिवार में लता दी के जन्म से पहले क्रिकेट प्रेम

1983 विश्वविजेता टीम के अभिनंदन के लिए दिल्ली में भी एक कार्यक्रम हुआ था। यह कार्यक्रम इंद्रप्रस्थ स्टेडियम हुआ था। इसमें लोकसभा के अध्यक्ष, राजीव गांधी, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष एनकेपी साल्वे ( एनकेपी साल्वे भारत के सूचना और प्रसारण मंत्री भी रहे थे), भारत सरकार के तत्कालीन मंत्री और सांसद शामिल हुए थे। लता दी ने अपनी मीठी आवाज से इस कार्यक्रम को अमर बना दिया था। जब वे नेता गणों का नाम ले रही थीं तब ऐसा लगा था कि उनके संबोधन में भी संगीत की स्वरलहरियां तरंगित हो रही हों। उन्होंने भारतीय टीम के कप्तान को कपिलदेव जी के रूप में संबोधित किया था। इस कार्यक्रम में भारत की पूरी टीम मौजूद थी। लता दी को इस कार्यक्रम के लिए विशेष रूप से दिल्ली बुलाया गया था। भारत ने 25 जून 1983 को जब लॉर्ड्स के मैदान पर फाइनल मुकाबला जीता था तब लता दी भी वहां मौजूद थीं। ऐसा था उनका क्रिकेट के प्रति जुनून। इस कार्यक्रम में उन्होंने बताया था कि मंगेशकर परिवार का क्रिकेट के प्रति लगाव उनके जन्म से भी पहले का है। उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर संगीत के अलावा क्रिकेट की भी साधना किया करते थे। उनकी एक टीम थी। उनके साथ उस समय के महान भारतीय क्रिकेटर कर्नल सी के नायडू भी खेलते थे। 1983 में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एनकेपी साल्वे क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष थे। वे भी महाराष्ट्र के ही रहने वाले थे। लता दी के साथ उनका बहुत अच्छा रिश्ता था। जब लॉर्ड्स के मैदान पर भारत ने विश्वकप जीता तो साल्वे साहब लता दी के पास पहुंचे। ये हर भारतीय के लिए एक यादगार लम्हा था। साल्वे साहब ने लता से कहा, इस भारतीय टीम का ऐसा स्वागत होना चाहिए जिसे लोग हमेशा याद रखें। इसकी जिम्मेवारी आपको संभालनी है। लता दी ने फौरन हामी भर दी।

आपकी नजरों ने समझा प्यार के काबिल मुझे....

आपकी नजरों ने समझा प्यार के काबिल मुझे....

दिल्ली के इंद्रप्रस्थ स्टेडियम में यह एतिहासिक कार्यक्रम शुरू हुआ। लता दी ने भारतीय क्रिकेट टीम को बधाई दी और भारत को सभी क्षेत्रों में विश्वविजेता बनने के लिए ईश्वर से आशीर्वाद मांगा। उन्होंने पहला गीत पेश किया... ये जिंदगी उसी की है जो किसी का हो गया फिल्म (अनारकली).... दूसरा गीत था, जो वादा किया वो निभान पड़ेगा (ताजमहल).... इसके बाद उन्होंने फिल्म अनपढ़ का सुरीला गाना पेश किया, आपकी नजरों ने समझा प्यार के काबिल मुझे, दिल की ये धड़कन ठहर जा मिल गयी मंजिल मुझे...। इस गीत के खत्म होने पर पूरी भारतीय टीम लता दी के सम्मान में खड़ी हो गयी और तालियां बजाने लगी। सांसद और मंत्री भी तालियां बजा कर उनका समर्थन करते रहे। कुछ देर तक पूरा स्टेडियम करतल ध्वनि से गूंजता रहा। भारतीय टीम इस सम्मान से अभिभूत थी। पूरे भारत ने विश्वविजेता टीम को अपने सिर- आंखों पर बैठा लिया था। लता दी क्रिकेट खिलाड़ियों की भावनाओं को अपने गीत के जरिये व्यक्त रहीं थीं... आपकी नजरों ने समझा प्यार के काबिल मुझे...। दरअसल जब 1983 में भारतीय क्रिकेट टीम विश्वकप प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए गयी थी तब किसे ने उनसे ट्रॉफी जीतने की आशा नहीं की थी। लेकिन जीत के बाद सब कुछ बदल गया। भारतीय टीम यह इस बात से बेहद खुश थी कि आखिरकार पूरे देश ने उन्हें प्यार के काबिल समझा। आज भारत के यशस्वी खिलाड़ी कपिल देव, सुनील गावस्कर, श्रीकांत, मोहिंदर अमरनाथ, मदन लाल, रोजर बिन्नी, संदीप पाटिल आदि लता दी के उस ऐतिहासिक अभिनंदन को जरूर याद कर रहे होंगे।

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