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Virat Kohli: हाथ में पूजा की थाल लिए सिंहाचलम मंदिर पहुंचे विराट कोहली, साल में 1 दिन दिखती है भगवान की मूर्ति

Virat Kohli Visits Simhachalam Temple: साउथ अफ्रीका के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज में भारत को शानदार जीत दिलाने के बाद विराट कोहली आस्था के रंग में रंगे नजर आए। कोहली ने विजाग (विशाखापत्तनम) के सिंहाचलम देवस्थानम मंदिर में भगवान वराह लक्ष्मी नरसिम्हा का आशीर्वाद लिया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है।

बल्लेबाजी में शानदार प्रदर्शन करते हुए, कोहली ने इस सीरीज में दो शतक और एक अर्धशतक की मदद से कुल 302 रन बनाए। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले दो वनडे मैचों में दो बार शून्य पर आउट होने के बाद कई आलोचकों ने कोहली को बाहर कर दिया था, लेकिन उन्होंने जोरदार वापसी करते हुए साबित कर दिया कि वह वनडे क्रिकेट के GOAT (Greatest of All Time) क्यों हैं।

Virat Kohli Visits Simhachalam

फाइनल वनडे में, कोहली ने नाबाद 65 रनों की बेहतरीन पारी खेली और 271 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत को जीत दिलाई। यशस्वी जायसवाल ने 116 और रोहित शर्मा ने 75 रन बनाकर जीत की नींव रखी थी। अगर साउथ अफ्रीका ने कुछ और रन बनाए होते, तो कोहली लगातार अपना तीसरा शतक पूरा कर सकते थे।

इसके बावजूद, अपने शानदार प्रदर्शन के लिए कोहली को प्लेयर ऑफ द सीरीज (POTS) चुना गया। यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका 20वां प्लेयर ऑफ द सीरीज पुरस्कार था, जो किसी भी खिलाड़ी द्वारा जीते गए सबसे अधिक पुरस्कार हैं।

'दो-तीन साल में इस स्तर पर नहीं खेला'
विराट कोहली अपनी परफॉर्मेंस से काफी खुश दिखे और इसे पिछले कुछ सालों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बताया। प्रेजेंटेशन के दौरान कोहली ने कहा कि, 'ईमानदारी से कहूं तो, इस तरह की सीरीज खेलना मेरे लिए सबसे संतोषजनक रहा है। मुझे नहीं लगता कि मैं पिछले दो-तीन सालों से इस स्तर पर खेल रहा हूं और मैं अपने दिमाग में पूरी तरह से स्वतंत्र महसूस कर रहा हूं। मेरा पूरा खेल एक साथ आ रहा है, और यह इस पर और बेहतर निर्माण करने के लिए बहुत रोमांचक है।'

कोहली ने आगे कहा कि, 'एक खिलाड़ी के रूप में मैंने हमेशा यही करने की कोशिश की है, मैंने जो मानक खुद के लिए तय किए हैं, उन्हें बनाए रखना और उस स्तर पर खेलना जिससे मैं टीम के लिए प्रभाव डाल सकूं।' उन्होंने जोड़ा, 'मैं जानता हूं कि जब मैं बीच में ऐसी बल्लेबाजी कर सकता हूं, तो इससे निश्चित रूप से टीम को बहुत मदद मिलती है, क्योंकि मैं लंबी बल्लेबाजी कर सकता हूं, मैं स्थिति के अनुसार बल्लेबाजी कर सकता हूं। और आत्मविश्वासी होने से मुझे लगता है कि बीच में किसी भी स्थिति को संभालने के लिए मेरे पास सब कुछ है, और मैं टीम के पक्ष में परिणाम ला सकता हूं।'

सिंहाचलम देवस्थानम मंदिर की विशेषता
विशाखापत्तनम (विजाग) के पास एक पहाड़ी पर स्थित सिंहाचलम देवस्थानम मंदिर दक्षिण भारत के सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिरों में से एक है। यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार वराह लक्ष्मी नरसिम्हा को समर्पित है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान की मूर्ति को चंदन के लेप (Sandalwood Paste) की मोटी परत से ढंककर रखा जाता है।

साल में 1 दिन दिखती है भगवान की मूर्ति
भक्तगण साल में केवल एक दिन, अक्षय तृतीया के अवसर पर ही, चंदन का लेप हटाकर भगवान के मूल स्वरूप (निजरूप दर्शन) के दर्शन कर पाते हैं। यह मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है, जिसमें कलिंग और चालुक्य शैलियों का मिश्रण देखने को मिलता है। इस मंदिर को 'आंध्र प्रदेश का तिरुपति' भी कहा जाता है, जिससे इसकी धार्मिक महत्ता का पता चलता है

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