शुक्रिया टीम इंडिया, बेइंतहा खुशियां देने के लिए,विश्वकप में लगातार 10 जीत का तोहफा भूलेगा नहीं

विश्वकप की शुरुआत से पहले शायद ही किसी ने यह सोचा होगा कि टीम इंडिया लगातार 10 मैच में जीत दर्ज की है। टूर्नामेंट की शुरुआत से पहले टीम के चयन को लेकर सवाल खड़े हो रहे थे।

टीम में केएल राहुल, श्रेयस अय्यर की जगह पर सवाल खड़े हो रहे थे। लंबी चोट के बाद टीम में वापसी कर रहे केएल राहुल को टीम में लिए जाने और उन्हें ईशान किशन से ऊपर वरीयता देने को लेकर विवाद हो रहा था।

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यहां तक कि श्रेयस अय्यर को टीम में जगह दिए जाने और संजू सैमसन को नजरअंदाज करने पर सवाल खड़ा हो रहा था। आखिरी समय पर अक्षर पटेल टीम से बाहर हुए, उनकी जगह आर अश्विन को टीम में जगह मिली।

ऐसे में क्रिकेट के एक्सपर्ट अलग-अलग तरह की राय दे रहे थे कि बहुत ही कम एक्सपर्ट थे जिन्हे लगता था कि भारतीय टीम विश्वकप के फाइनल में पहुंचेगी।

लेकिन जिस तरह से भारतीय टीम ने क्रिकेट के मैदान में अपना वर्चस्व दिखाया उसने मौजूदा टीम को भारतीय टीम के सर्वश्रेष्ठ टीम की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया। हार किसे पसंद होती है, यकीन मानिए जब कोई टीम इतना अच्छा खेलकर हारती है तो सबसे ज्यादा दुख टीम के खिलाड़ियों को होता है।

फैंस की टीम से उम्मीदें होती हैं, वो टीम को सपोर्ट करते हैं। लेकिन खेल के मैदान पर हर खिलाड़ी अपना सबकुछ झोंकता है ताकि वह टीम को जीतता हुआ देख सके। फाइनल में जब टीम इंडिया को हार मिली तो साफ तौर पर खिलाड़ियों की मायूसी और निराशा को देखा जा सकता था। कुछ खिलाड़ियों के आंखें नम थी।

बहुत कम लोगों ने ध्यान दिया होगा जब ऑस्ट्रेलिया ने मैच में जीत दर्ज की तो कंगारू टीम के खिलाड़ी मैदान में जश्न मना रहे थे। उस दौरान मायूस रवींद्र जडेजा स्टंप से गिल्लियां गिरा रहे थे, उनकी यह तस्वीर काफी कुछ बयां करती है। यह तस्वीर दर्शाती है कि किस कदर जडेजा इस हार से टूटे हैं, किस तरह से उनका सपना टूटा है।

लेकिन यकीन मानिए जिस तरह से भारतीय टीम ने इस विश्वकप में वर्चस्व दिखाया शायद ही पिछले एक दशक में किसी भी टीम ने दिखाया होगा। तकरीबन 15 साल पहले इस तरह का खेल ऑस्ट्रेलिया ने दिखाया था। इस विश्वकप को विराट कोहली-रोहित शर्मा और मोहम्मद शमी के लिए हमेशा याद किया जाएगा।

भारतीय क्रिकेट का यह वह दौर है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता है। इस टीम ने एक के बाद एक हर टीम को इस टूर्नामेंट में मात दी। कप्तान रोहित शर्मा की बात करें तो उन्होंने टीम की अगुवाई आगे से की, किसी भी रिकॉर्ड की परवाह किए बगैर बेखौफ होकर टीम को तूफानी शुरुआत दी, जिसका फायदा शुभमन गिल, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल को टीम की पारी को सहजता से आगे बढ़ाने में मिला।

यही नहीं तमाम सवालों के बावजूद रोहित शर्मा अपने फैसले पर टिके रहे, उन्होंने श्रेयस अय्यर को बैक किया और अय्यर ने उन्हें कतई निराश नहीं किया। उन्होंने टीम के मध्य क्रम को मजबूती से संभाला। टीम के हर एक खिलाड़ी के भीतर से सर्वश्रेष्ठ बाहर लाने की कोशिश की।

विराट कोहली की बात करें तो किसने उम्मीद की होगी कि एक विश्वकप में कोई खिलाड़ी 765 रन बना देगा, जिसमे उन्होंने 3 शतक और 6 अर्धशतक लगाए। विराट कोहली ने टीम के भीतर ऊर्जा का संचार करने, टीम के माहौल को हमेशा सकारात्मक रखने में अहम भूमिका निभाई। जिस स्तर का क्रिकेट भारतीय टीम ने इस विश्वकप में दिखाया, उसकी एक बड़ी वजह विराट कोहली भी हैं।

महज 7 मैच में 24 विकेट लेकर मोहम्मद शमी ने क्रिकट जगत को दंग कर दिया। किसे उम्मीद थी कि शमी इस कदर कहर बरपाती गेंदबाजी करेंगे। लेकिन उन्होंने इस विश्वकप में अपनी पूरी ताकत लगाई और करोड़ो क्रिकेट फैंस के चेहरे पर मुस्कान बिखेरी।

खेल के मैदान में टीमें हारती और जीतती है, लेकिन अगर कोई टीम लगातार 10 मैच में जीत दर्ज करने के बाद एक मुकाबले में हारती है तो निसंदेह यह टीम हारने वाली नहीं होती है।

भारतीय टीम इस विश्वकप में चैंपियन की तरह खेली और चैंपियन की तरह ही उसने इस विश्वकप के सफर को खत्म किया। इतने बड़े मंच पर टीम इंडिया का इस स्तर का प्रदर्शन किसी भी क्रिकेट फैन के लिए गर्व की बात है।

एक, दो, तीन नहीं बल्कि लगातार 10 मैचों में जीत दर्ज करके टीम इंडिया ने भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को जबरदस्त खुशियां दीं, हर भारतीय टीम इंडिया के इस शानदार प्रदर्शन से खुश था।

क्या पाकिस्तान, क्या ऑस्ट्रेलिया, क्या न्यूजीलैंड हर टीम को भारत ने वर्चस्व के साथ हराया, जिसका लुत्फ हर भारतीय ने उठाया। किसी भी मैच में ऐसा लगा नहीं कि विरोधी टीम भारतीय टीम पर हावी है। अगर यह कोई टीम कर सकती थी तो वो चैंपियन टीम कहलाने की पूरी हकदार है।

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