Indian Cricketers: गरीबी और मुश्किलों से तपकर स्टार बने ये क्रिकेटर, आज हैं करोड़ों की संपत्ति के मालिक

Indian Cricketers Struggle Story: टीम इंडिया में आज के समय में कई ऐसे खिलाड़ी हैं जो स्टार क्रिकेटर्स होने के साथ-साथ करोड़ों में कमाते हैं, लेकिन उनका बचपन बहुत गरीबी और मुश्किलों में बिता है। आइए एक नजर डालते हैं उन खिलाड़ियों पर जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और परिजनों के समर्पण की वजह से आज क्रिकेट की दुनिया में एक नया मुकाम हासिल किया है।

यशस्वी जायसवाल
इस लिस्ट में पहला नाम टीम इंडिया के स्टार क्रिकेटर यशस्वी जायसवाल का है, जिन्होंने जीवन में हर संभव मुश्किल पर काबू पा लिया है। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर सुरियावां में एक साधारण परिवार में जन्मे, जायसवाल के अमीर बनने की कहानी काफी संघर्ष भरी है।

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लेकिन जैसा कि कहते हैं, 'सितारे चमकने का अपना रास्ता ढूंढ लेते हैं।' जब जायसवाल को मुंबई के कोच ज्वाला सिंह ने देखा तो युवा खिलाड़ी की प्रतिभा देखकर दंग रह गए। कोच ने उन्हें न सिर्फ प्रशिक्षित करने का फैसला किया बल्कि खाने और रहने का भी इंतजाम कराया। ज्वाला ने एक इंटरव्यू में कहा कि, 'मैं उसकी मदद करना चाहता था क्योंकि उसकी कहानी मेरी जैसी ही थी... यहां तक कि मैं क्रिकेट खेलने के लिए उत्तर प्रदेश से मुंबई आया था, इसलिए मुझे पता है कि उसे किस तरह के संघर्ष का सामना करना पड़ा था।

जायसवाल ने कड़ी मेहनत के दम पर हासिल किया ये मुकाम
उन्होंने बताया कि 'वह मैदानकर्मियों और स्थानीय बागवानों के साथ एक तंबू में रह रहे थे। मैंने उससे कहा कि मैं तुम्हें सब कुछ प्रदान करूंगा। हालांकि, जायसवाल ने अपनी निरंतर कड़ी मेहनत के दम पर ये मुकाम हासिल किया है।

रवींद्र जडेजा के संघर्ष की कहानी
भारत के ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा आज भले ही करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं, लेकिन एक दौर ऐसा था जब उन्होंने गरीबी में भी दिन गुजारे। जडेजा का बचपन मुश्किलों में गुजरा था। जडेजा के पिता अनिरूद्ध सिंह सेना में नौकरी छोड़ने के बाद एक प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनी में वॉचमैन की जॉब करते थे। जडेजा अपने परिवार के सपोर्ट और अपनी मेहनत के दम पर आज सबसे महंगे खिलाड़ियों में शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबकि, जडेजा इस समय 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के मालिक हैं।

पुलिस में भर्ती होना चाहते थे उमेश यादव
उमेश यादव का जन्म 25 अक्टूबर 1987 को उत्तर प्रदेश के देवरिया में हुआ था। क्रिकेटर के पिता एक कोल माइन में काम करते थे और जैसे-तैसे अपने बच्चों का लालन पालन और घर का गुजारा कर पाते थे। उमेश शुरू से क्रिकेट जरूर खेलते थे लेकिन क्रिकेटर बनने का सपना उन्होंने नहीं देखा था, बल्कि उनका प्रयास सेना और पुलिस में भर्ती होने का था, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण ये सपना सिर्फ सपना बनकर ही रह गया।

हालांकि, इस दौरान उमेश यादव ने क्रिकेट खेलना बंद नहीं किया, बल्कि वह अपने दोस्तों के साथ प्रतिदिन क्रिकेट खेलने जाया करते थे। उनके जीवन में धीरे-धीरे जब क्रिकेट का दखल बड़ा तो उन्होंने एक दिन हिम्मत करके अपने पिता से कहा कि वह क्रिकेट में अपना करियर बनाना चाहते हैं। बस यहीं से उन्होंने इस दिशा में अपने कदम बढ़ाने शुरू कर दिए और टेनिस की जगह लेदर बॉल से प्रैक्टिस करना शुरू कर दिया। इसके बाद उमेश विदर्भ के लिए खेलने लगे।

उमेश यादव को साल 2008 में पहली बार रणजी ट्रॉफी खेलने का मौका मिला। इस दौरान उन्होंने मैच की पहली पारी में 75 रन दिए और 4 विकेट अपने नाम किए थे, इसके बाद क्रिकेटर ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज क्रिकेट जगत में उनकी एक अलग पहचान है। वो अपनी मेहनत और क़ाबलियत के दम इस मुकाम पर पहुंचे हैं।

रिंकू सिंह ने किया सफाईकर्मी का काम
रिंकू सिंह का जन्म 12 अक्टूबर 1997 को एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था। उनके पिता एक एलपीजी एजेंसी में काम करते थे और लोगों के गैस सिलेंडर डिलीवरी किया करते थे। रिंकू ने भी स्वीपर और क्लीनर के तौर पर काम किया है। भले ही परिवार की आर्थिक स्थिति उन्हें ज्यादा बड़े सपने देखने की अनुमति नहीं देती थी, लेकिन फिर भी रिंकू में हमेशा क्रिकेट में कुछ करने की ललक थी।

आईपीएल फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स के बल्लेबाज रिंकू सिंह ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया , जिसमें स्वीपर की नौकरी के लिए क्रिकेट छोड़ना भी शामिल था। हालांकि, उन्होंने शानदार वापसी की और अब उन्हें आईपीएल के सर्वश्रेष्ठ फिनिशरों में से एक के रूप में जाना जाता है।

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आईपीएल 2023 के दौरान, रिंकू ने केकेआर के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन किया, यश दयाल की गेंद पर लगातार पांच छक्कों से ध्यान आकर्षित किया। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने लगातार प्रभावशाली स्कोर बनाना जारी रखा। रिंकू सिंह की मेहनत का ही नतीजा है कि इस साल जून में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम में उनकी जगह लगभग पक्की नजर आ रही है।

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