द्रविड़ या शास्त्री, कौन हैं भारत का बेस्ट कोच, सौरव गांगुली ने सुनाया अपना फैसला
नई दिल्ली। पिछले कुछ सालों में भारतीय क्रिकेट टीम ने विश्व क्रिकेट में एकतरफा परचम लहराया है, आईसीसी टूर्नामेंटस को छोड़ दें तो दुनिया के हर कोने में भारतीय क्रिकेटर्स ने अपने खेल से देश का नाम रोशन करते हुए कई ऐतिहासिक जीत हासिल की है। भारतीय टीम की इस सफलता के पीछे पूर्व कप्तान विराट कोहली और पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री का बड़ा हाथ रहा है। हालांकि यूएई में खेले गये टी20 विश्वकप के बाद दोनों का कार्यकाल खत्म हो गया है, जहां चयनकर्ताओं ने रोहित शर्मा को नये कप्तान के रूप में टीम की कमान सौंपी है तो वहीं पर एनसीए के पूर्व हेड राहुल द्रविड़ को नया कोच बनाया गया है।

राहुल द्रविड़ ने अपने छोटे से कार्यकाल में काफी अच्छा काम किया है और माना जा रहा है कि पिछले 9 सालों से चला आ रहा आईसीसी खिताब का सूखा आखिरकार उनके कार्यकाल में मिट सकता है। ऐसे में पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री और वर्तमान कोच राहुल द्रविड़ को लेकर अक्सर तुलनाओं की खबर भी सामने आती है।

गांंगुली ने द्रविड़-शास्त्री की तुलना पर सुनाया अपना फैसला
यह तुलना अक्सर फैन्स के बीच की जाती है लेकिन जब यह सवाल बीसीसीआई के अध्यक्ष सौरव गांगुली से पूछा गया तो उन्होंने इसको लेकर अपना फैसला सुनाया है। सौरव गांगुली ने रवि शास्त्री और राहुल द्रविड़ की कोचिंग स्टाइल पर अपना मत रखा है। उल्लेखनीय है कि राहुल द्रविड़ को पिछले साल श्रीलंका दौरे के लिये पहली बार टीम का पार्ट टाइम कोच नियुक्त किया गया लेकिन 2021 टी20 विश्वकप के बाद उन्हे पूरी तरह से टीम की कमान सौंप दी गई। राहुल द्रविड़ ने अपने अब तक के कार्यकाल में न्यूजीलैंड, वेस्टइंडीज और श्रीलंका की टीम को टी20 सीरीज में क्लीन स्वीप किया तो वहीं पर वेस्टइंडीज का वनडे सीरीज में भी सूपड़ा साफ किया। न्यूजीलैंड के खिलाफ घर पर 2 मैचों की टेस्ट सीरीज को 1-0 से जीता तो वहीं पर साउथ अफ्रीका में उस मैदान पर टेस्ट मैच जीता जहां भारत ने कभी कोई जीत हासिल नहीं की थी।

करिश्माई है द्रविड़ का कोचिंग स्टाइल
कोलकाता में आयोजित एक प्रमोशनल इवेंट में मीडिया से बात करते हुए सौरव गांगुली ने कहा कि द्रविड़ की कोचिंग स्टाइल काफी जुनूनी, प्रोफेशनल और करिश्माई है और वो भारतीय टीम का सफल कोच बनने की सारी काबिलियत रखते हैं।
उन्होंने कहा,'द्रविड़ जुनूनी हैं और जितने प्रोफेशनल हैं उतने ही व्यवाहारिक और करिश्माई भी। वह अपने खेल के दिनों से ये काबिलियत रखते हैं। उनके तब के और अब के दिनों में कोई खास बदलाव नहीं आया है, हां एक बदलाव कह सकते हैं कि उन्हें अब 3 नंबर पर बल्लेबाजी नहीं करनी पड़ती है। जो कि मेरे हिसाब से काफी मुश्किल काम था क्योंकि उस वक्त दुनिया के सबसे अच्छे गेंदबाजों का सामना करना पड़ता था। हालांकि उन्होंने यह काम भी न सिर्फ बखूबी ढंग से किया बल्कि लंबे समय तक किया।'

द्रविड़ की कोचिंग में क्या है खासियत
गौरतलब है कि राहुल द्रविड़ पहले भारतीय टीम के हेड कोच की भूमिका निभाने से मना कर रहे थे, लेकिन सौरव गांगुली से बात करने के बाद उन्होंने यह जिम्मेदारी लेने का फैसला किया। इस वजह से यह कहना गलत नहीं होगा कि गांगुली ने द्रविड़ की नियुक्ति में अहम भूमिका निभायी है।
उन्होंने कहा,'एक कोच के रूप में द्रविड़ बहुत अच्छा काम करेंगे क्योंकि अपने काम और टैलेंट के प्रति काफी ईमानदार हैं, जो कि सबसे जरूरी चीज है। ऐसा नहीं है कि वो गलतियां नहीं करेंगे, हर कोई करता है लेकिन जबतक आप चीजों को सही करने की कोशिश करते हैं आप दूसरों के मुकाबले ज्यादा सफल हो सकते हैं।'

क्या है शास्त्री-द्रविड़ के बीच अंतर
सौरव गांगुली ने इसके बाद पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री और राहुल द्रविड़ के कोचिंग स्टाइल पर अपनी राय देते हुए दोनों के बीच के अंतर को बताया।
उन्होंने कहा,'वो दोनों अलग-अलग व्यक्तित्व वाले दो अलग लोग हैं। एक हमेशा आपके साथ रहता है जो आपकी ताकत बनता है जबकि दूसरा चुपचाप अपना काम करता है और दूसरों की सफलता और उनके टैलेंट को बाहर लाने में मदद करता है। वह क्रिकेट के सबसे महान खिलाड़ियों में होने के बावजूद ज्यादा नहीं बात करता। ऐसे में दोनों की तुलना नहीं का जा सकती क्योंकि दो अलग व्यक्ति एक तरीके से सफलता नहीं प्राप्त कर सकते।'












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