चयनकर्ताओं ने कानों में ठूस ली है रुई जो संजू सैमसन के चौकों-छक्कों की नहीं सुनाई दे रही धमक?
भारत के पूर्व क्रिकेटरों की राय है कि संजू सैमसन लिमिटेड ओवर क्रिकेट में नम्बर पांच के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हैं। वे जेनुइन पावर हिटर हैं। वे अपने दम पर मैच पलटने की काबिलियत रखते हैं। उन्होंने लखनऊ एकदिवसीय मैच में अपने अद्भुत कौशल का प्रदर्शन किया। संजू की काबिलियत ऋषभ पंत या दीपक हुड्डा से बेहतर है। इसलिए उन्हें टी-20 विश्वकप टीम में होना चाहिए था। नम्बर पांच पर खेलने के लिए वही वाजिब हकदार थे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। सैमसन को रिजर्व प्लेयर के रूप में शामिल किया जाना चाहिए था। लेकिन यह भी नहीं हुआ। इसके बदले श्रेयस अय्यर को स्टैंड बाई खिलाड़ी चुन लिया गया। वे लगातार मौके गंवा रहें हैं फिर भी टीम से जुड़े हुए हैं। लेकिन अब ये बात खटक रही है। श्रेयस अय्यर को जितने मौके मिले क्या संजू सैमसन को उतने मिले ? भारत के पूर्व टेस्ट खिलाड़ी डोडा गणेश ने तो यहां तक कहा था कि श्रेयस अय्यर के चलते संजू सैमसन की लगातार अनदेखी की जाती रही है।

लखनऊ का अंतिम ओवर
लखनऊ एकदिवसीय मैच के आखिरी ओवर पर डालते हैं एक नजर। अंतिम 40वें ओवर में भारत को जीत के लिए 30 रन बनाने थे। पांच छक्कों की दरकार थी। जाहिर है यह बहुत मुश्किल काम था। स्ट्राइक पर संजू सैमसन थे। लक्ष्य कठिन था फिर भी संजू ने हिम्मत नहीं छोड़ी। इसकी वजह भी थी। सामने तबरेज शम्सी थे। शम्सी की पहली गेंद वाइड हो गयी। गेंद की गिनती भी नहीं हुई और एक रन बन गया। पहली गेंद पर संजू ने छक्का जमा दिया। अब लगा कि शायद चमत्कार होने वाला है। लेकिन संजू अगली दो गेंदों पर दो चौका ही लगा पाये। अब अंतिम तीन गेंदों पर 15 रन चाहिए थे। चौथी गेंद पर कोई रन नहीं बना। मैच का नतीजा यहीं तय हो गयी। इसके बाद संजू ने पांचवीं गेंद पर चौका और छटी गेंद पर एक रन लिया। इस तरह अंतिम ओवर में कुल 20 रन ही बने। भारत 9 रनों से यह मुकाबला हार गया। लेकिन संजू सैमसन ने 63 गेंदों पर 86 रनों की शानदार पारी खेली।

"यदि 24 रन रहते तो हम जीत जाते"
मैच के बाद संजू ने कहा था, यदि आखिरी ओवर में 24-25 रन बनाने होते तो हम ये मैच जीत सकते थे। मैं यही सोच कर गेम को आगे बढ़ा रहा था। लेकिन 39वें ओवर में सिर्फ 7 रन ही बन पाये जिससे सारा दबाव आखिरी ओवर पर शिफ्ट हो गया। मैं सोच रहा था कि जब तबरेज शम्सी आखिरी फेंकेंगे तब मैं उनकी गेंदों पर बड़े प्रहार करूंगा। मैं चार छक्के मार सकता था। लेकिन 30 रनों का दबाव बहुत बड़ा था। एक चौके और एक छक्के की कमी से हम चूक गये।

नम्बर पांच या छह पर अहम जिम्मेवारी
भारत के पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ का भी मानना है कि संजू सैमसन नम्बर पांच या छह के लिए सर्वश्रेष्ठ विकल्प हैं। इस पोजिशन पर खेल रहे खिलाड़ी के कंधों पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। उसमें बड़े शॉट्स खेलने की क्षमता होनी चाहिए ताकि रनों की गति को टीम की जरूरत के हिसाब से रफ्तार दी सके। उसके पास खेलने के लिए कम गेंदें होती हैं। पहली गेंद से ही शॉट्स खेलने की जरूरत होती है। अगर टॉप ऑर्डर धाराशायी न हुआ तो लोअर मिडिल ऑर्डर को 14- 15 ओवर के बाद ही बल्लेबाजी मिलती है। ऐसे में उसे तेज खेलना पड़ता है। संजू सैमसन ने जिम्बाब्वे दौरे पर अपनी यह काबिलियत दिखायी थी।

संजू को तो विश्वकप में होना चाहिए
लखनऊ की नवाबी पारी के बाद अब क्रिकेटप्रेमी कह रहे हैं कि संजू को विश्वकप टीम में होना चाहिए था। कुछ लोगों की राय है कि संजू को दिनेश कार्तिक के साथ टीम में रखना चाहिए। इसके लिए केएल राहुल को रिप्लेस करना पड़ता तो पड़ता। वैसे भी राहुल अपनी पुरानी लय में नहीं हैं। भारत तो विराट कोहली और सूर्य कुमार यादव को सलामी बल्लेबाज के रूप में परख चुका है जिसमें वे सफल रहे हैं। इन्हें ऊपर भेज कर संजू के लिए जगह बनायी जा सकती है। पाकिस्तान जैसी धाकड़ टीम के खिलाफ भारत की तैयारी भी धाकड़ होनी चाहिए।

भारतीय चयनकर्ताओं को जवाब
भारत के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी और चयनकर्ता चंदू बोर्डे भी संजू सैमसन की क्षमता के मुरीद हैं। उनका कहना है कि संजू एक शानदार बल्लेबाज हैं। वे मैच विजेता खिलाड़ी हैं। उनके होने से कोई भी टीम मजबूत होगी। क्रिकेट के जानकार और प्रशंसक चाहे कुछ भी सोचे लेकिन चयनकर्ता संजू को दरकिनार करते रहे हैं। उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ भी 54 रनों की पारी खेली थी। लेकिन लखनऊ में तो उन्होंने धमाका कर दिया। इस धमाके की गूंज जरूर भारतीय चयनकर्ताओं तक पहुंची होगी।












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