IPL 2026: राजस्थान रॉयल्स बन गई असम रॉयल्स? जुगाड़ वाले कप्तान और लॉबी ने जयपुर वालों को ठगा

IPL 2026: इंडियन प्रीमियर लीग के 2026 सीजन में राजस्थान रॉयल्स का प्रदर्शन अब तक काफी शानदार रहा है। टीम फिलहाल सात में से पांच मैच जीतकर अंक तालिका में दूसरे स्थान पर काबिज है, परंतु इस सफलता के पीछे कप्तान रियान पराग का योगदान नगण्य ही नजर आता है।

राजस्थान रॉयल्स कभी अपनी रणनीतिक स्पष्टता के लिए जानी जाती थी, अब एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहां वह अपनी मूल पहचान खोती नजर आ रही है। टीम में असम से आने वाले रियान पराग के बढ़ते कद और प्रभाव ने इसे राजस्थान रॉयल्स के बजाय 'असम रॉयल्स' जैसा रंग देना शुरू कर दिया है।

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रियान पराग की कप्तानी को लेकर सबसे बड़ा सवाल उनकी व्यक्तिगत फॉर्म और मैदान पर उनके व्यवहार को लेकर उठता रहा है। इस सीजन में भी उनके बल्ले से रन निकलने का नाम नहीं ले रहे हैं। सात मैचों में महज 81 रन बनाने वाले और सिर्फ दो विकेट लेने वाले खिलाड़ी को जब कप्तानी की कमान सौंपी जाती है, तो नेतृत्व की नैतिकता और योग्यता पर प्रश्न उठना लाजिमी है।

पराग दिलाते हैं पांड्या की याद

यह विडंबना ही है कि टीम में कई अनुभवी और दिग्गज खिलाड़ी मौजूद हैं जो कप्तानी के बेहतर विकल्प हो सकते थे, लेकिन उन्हें दरकिनार कर एक ऐसे खिलाड़ी को जिम्मेदारी दी गई जो मैदान पर प्रदर्शन से ज्यादा अपने नखरों के लिए चर्चा में रहता है। पराग का मैदान पर बर्ताव कई बार हार्दिक पांड्या की याद दिलाता है, जहां खेल से ज्यादा ध्यान खुद को बड़ा दिखाने पर होता है।

क्या असम लॉबी है जिम्मेदार?

इस पूरे प्रकरण के पीछे एक मजबूत असम लॉबी का हाथ होने की आशंकाओं को नकारा नहीं जा सकता। राजस्थान रॉयल्स के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन रंजीत बोरठाकुर और बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया दोनों ही असम से आते हैं। शायद यह इसी प्रभाव का नतीजा है कि आईपीएल के इस सीजन में राजस्थान रॉयल्स के तीन सबसे बड़े और महत्वपूर्ण मैच चेन्नई सुपर किंग्स, आरसीबी और मुंबई इंडियंस के खिलाफ असम में आयोजित किए गए।

जयपुर वाले ठगा महसूस कर रहे

जयपुर के प्रशंसक अपनी टीम को घरेलू मैदान पर खेलते देखने के लिए बेताब थे, जो खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। अपनी ही टीम के बड़े मैचों को घर से दूर ले जाना प्रबंधन की क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

जुगाड़ वाले कप्तान की साख दांव पर

अंततः जुगाड़ और साख के बीच झूलती यह फ्रेंचाइजी अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। रियान पराग का राजस्थान रॉयल्स के साथ एक लंबा सफर रहा है और फ्रेंचाइजी ने उन्हें हमेशा से सहारा दिया है, लेकिन पेशेवर क्रिकेट में वफादारी कभी प्रदर्शन का विकल्प नहीं हो सकती। यदि पराग जल्द ही बल्ले और गेंद से अपनी उपयोगिता साबित नहीं करते, तो उनकी कप्तानी को केवल एक प्रशासनिक प्रयोग और क्षेत्रीय जुगाड़ के रूप में देखा जाएगा। फिलहाल तो ऐसा लग रहा है कि टीम की जीत के पीछे कप्तान की व्यक्तिगत विफलताएं छिपी हुई हैं और असम लॉबी के साये में राजस्थान की असली पहचान कहीं खो गई है।

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