फिर से पंजाब के शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों ने डाला हथियार, शिखर की लचर कप्तानी ले डूबी मैच
पंजाब की टीम को पंजाब में ही हैदराबाद की टीम ने हरा दिया है। मैच के हीरो यूं तो नितीश रेड्डी रहे लेकिन जिस तरह से आशुतोष शर्मा और शशांक सिंह ने तूफानी पारी खेलकर मैच को आखिरी गेंद तक जीवंत रखा उसके लिए भी इस मैच को याद रखा जाएगा।
कई लोगों को उम्मीद थी कि पिछले मुकाबले की तरह इस मुकाबले में शशांक का जादू चलेगा और वह पंजाब को अकेले ही दम पर मैच जिता देंगे। लेकिन क्रिकेट के मैदान पर हर रोज आप किसी करिश्मे की उम्मीद नहीं कर सकते।

सस्ते में सिमटा पंजाब का शीर्ष क्रम
हर बार की तरह एक बार फिर से पंजाब का शीर्ष क्रम अपना विकेट आसानी से देकर पवेलियन में दूसरे खिलाड़ियों से उम्मीद लगा रहा था कि वह मैच को जिताएं। शीर्ष क्रम की बात करें तो कप्तान शिखर धवन 14, जॉनी बेयरस्टो शून्य, प्रभसिमरन सिंह 4 रन बनाकर आउट हो गए।
मध्य क्रम ने जीवित रखी सांसें
पंजाब के मध्य क्रम के बल्लेबाजों ने मैच में अपनी टीम को जीवंत रखा लेकिन मैच की दूसरी पारी में शुरू से ही हैदराबाद की टीम हावी रही और हैदराबाद के गेंदबाजों ने जबरदस्त गेंदबाजी की।
हर रोज करिश्मे नहीं होते
मैच के आखिरी ओवर में हालांकि कुछ समय के लिए किसी करिश्मे की उम्मीद लोगों में जगी थी, लेकिन आखिर में भी वह भी ठंडी हो गई। आखिरी ओवर में उम्मीद जगने की एक वजह जयदेव उनादकट की घटिया गेंदबाजी भी थी।
आखिरी ओवर में उनादकट ने तीन वाइड गेंद डाली और कुल 26 रन लुटा दिए। भला यह हो कि आखिरी ओवर में 29 रन चाहिए थे नहीं दो उनाकट ने तो लगभग हैदराबाद की नाक कटा ही दी थी।
कप्तानी पर सवाल
बहरहाल इस मैच में कप्तान शिखर धवन की बात होनी बेहद जरूरी है। जिस तरह से पहली पारी में पंजाब की टीम ने जबरदस्त गेंदबाजी करते हुए 64 रन के स्कोर पर हैदराबाद के 6 बल्लेबाजों को पवेलियन भेज दिया, उसके बाद पंजाब की टीम मैच में लगभग पूरी तरह से हावी हो चुकी थी।
लेकिन जिस तरह से चार विकेट गिरने के बाद कप्तान धवन ने गेंदबाजों का इस्तेमाल किया, उसको लेकर जरूर सवाल खड़े होंगे। ऐसे वक्त में जब आपको आक्रामक गेंदबाजी जारी रखनी चाहिए थी और कैगिसो रबाडा या अर्शदीप सिंह से गेंदबाजी करानी चाहिए थी, कप्तान धवन ने गेंद को हर्शल पटेल और हरप्रीत बरार को थमा, जिन्होंने जमकर रन लुटाए।
जमकर लुटे बरार
अकेले बरार ने 4 ओवर में 48 रन लुटा दिए। शुरुआती सफलता के बाद कप्तान धवन की लचर कप्तानी का खामियाजा भी टीम को भुगतना पड़ा। एक समय जहां हैदराबाद की टीम के लिए 150 रन पहुंचना मुश्किल हो रहा था, ऐसे समय में हैदराबाद की टीम ने 182 रन का स्कोर खड़ा कर दिया।












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