वीरेंदर सहवाग ने चौंकाने वाली बात कही, बोले मेरे जैसा कोई नहीं खेल सकता

वीरेंदर सहवाग हर प्रारूप में तेज बल्लेबाजी करते थे, मौजूदा टीम इंडिया में उनको लम्बे समय तक तेज खेलने वाले खिलाड़ी नहीं दिखते।

Virender Sehwag

Virender Sehwag on Indian Batters: वीरेंदर सहवाग किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वर्ल्ड क्रिकेट के कई गेंदबाजों को उन्होंने अपनी धमाकेदार बल्लेबाज से डराया है। हर प्रारूप में सहवाग की बल्लेबाजी एक जैसी रहती थी। उनका मकसद तेजी से रन बनाना होता था। अपने करियर और बैटिंग को लेकर अक्सर सहवाग कहानियां शेयर करते रहते हैं। इस बार उनकी तरफ से एक अलग बयान आया है। सहवाग का मानना है कि मौजूदा भारतीय टीम में उनकी तरह लम्बा खेलने वाला कोई बल्लेबाज नहीं है।

मेरी तरह खेलने वाले खिलाड़ी नहीं हैं

मेरी तरह खेलने वाले खिलाड़ी नहीं हैं

अपने करियर में दो बार टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक जमाने वाले सहवाग का कहना है कि टीम इंडिया में उनकी तरह खेलने की सोच रखने वाले खिलाड़ी नहीं हैं। न्यूज 18 चौपाल पर सहवाग ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि भारतीय टीम में मेरी तरह बल्लेबाजी करने वाला कोई खिलाड़ी है। मेरी नजर में ऐसी बल्लेबाजी करने में ऋषभ पन्त और पृथ्वी जैसे खिलाड़ी आते हैं। ऋषभ पन्त ज्यादा नजदीक हैं जो मेरी तरह बैटिंग करते हैं। वह 90-100 रन से संतुष्ट हो जाते हैं और मैं 200, 250 और 300 रन के लिए जाता था। अगर पन्त इस स्तर पर सोचे, तो मैं समझता हूं कि वह फैन्स को और ज्यादा एंटरटेन कर सकते हैं।

सहवाग ने पाकिस्तान में जड़ा था तिहरा शतक

सहवाग ने पाकिस्तान में जड़ा था तिहरा शतक

साल 2004 में पाकिस्तान दौरे पर भारतीय टीम गई थी। उस समय मुल्तान टेस्ट मैच में वीरेंदर सहवाग ने 309 रन बनाये थे। उसके बाद उन्होंने उसी तरह की पारी भारत में चार साल बाद दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेली थी। इसके बाद एक बार फिर से तिहरा शतक जड़ने के करीब आ गए थे लेकिन 293 पर आउट हो गए थे। सहवाग बल्लेबाजी के दौरान तेजी से खेलने का इरादा रखते थे।

ज्यादा बाउंड्री मारने का कारण सहवाग ने बताया

ज्यादा बाउंड्री मारने का कारण सहवाग ने बताया

सहवाग ने कहा कि मैं टेनिस बॉल क्रिकेट खेलता था तो ज्यादा बाउंड्री मारने का माइंडसेट रहता था। उसी तरह मैं इंटरनेशनल क्रिकेट में जाकर केल्क्युलेट करता था कि शतक के लिए कितनी बाउंड्री चाहिए। सहवाग ने कहा कि 90 से 100 तक जाने के लिए अगर मैं 10 गेंद लेता, तो विपक्षी टीम के पास आउट करने के लिए 10 बॉल रहती। इस वजह से मैं शतक तक जाने के लिए दो गेंद लेता था ताकि आउट करने का मौका ही नहीं मिले।

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