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Nitish Reddy ने जो कहा, वो कर दिखाया, 'खुशी के आंसू अभी रुके नहीं हैं', पिता के बाद छलका बहन का दर्द

Nitish Kumar Reddy Siser: नीतीश कुमार रेड्डी ने अपनी धमाकेदार पारी से फैंस का ध्यान अपनी ओर खींचने का काम किया। नीतीश कुमार रेड्डी के पिता मुत्याला रेड्डी ने अपने बेटे के सपने को साकार करने के लिए अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया। जब नीतीश ने शतक लगाया तो स्टेडियम में 83,000 से ज्यादा दर्शक मौजूद थे, जिनमें उनके पिता मुतल्या रेड्डी भी थे।

नीतीश रेड्डी के पिता की आंखों निकले आंसू

नीतीश रेड्डी ने चौका लगाकर शतक पूरा किया तो उनके पिता की आंखों में आंसू थे। बेटे की सफलता पर पिता गर्व से फूले नहीं समा रहे थे। दिन का खेल खत्म होने के बाद जब नीतीश अपनी फैमिली से मिले तो सभी की आंखों में आंसू थे और यह पल सभी के लिए काफी इमोशनल हो गया। नीतीश रेड्डी के कमरे के बाहर उनके पिता रोते हुए नजर आए।

Nitish Kumar Reddy 1

रवि शास्त्री की आंखें भी हुई नम

नीतीश कुमार रेड्डी ने बॉर्डर-गावस्कर सीरीज में 171 गेंदों में शतक जड़कर भारत की दमदार वापसी कराई। यह उनका टेस्ट करियर का पहला शतक था और इसे उन्होंने मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) पर इस महत्वपूर्ण मुकाबले में जमाया। यह शतक तब आया जब भारतीय टीम को इसकी सबसे ज्यादा आवश्यकता थी। नीतीश कुमार रेड्डी के शतक को देखकर कमेंट्री कर रहे रवि शास्त्री की आंखें भी नम हो गई थी।

नीतीश ने जो कहा, वो कर दिखाया

नीतीश कुमार की बहन ने कहा कि नीतीश का सफर कभी भी आसान नहीं रहा। उन्होंने हमेशा मुश्किलों का सामना किया और अपनी मेहनत से सबको प्रभावित किया। जो बातें उन्होंने हम लोगों से कही, वह सिर्फ शब्द नहीं थे, बल्कि उन्होंने उन्हें सच कर दिखाया। उनका संघर्ष और समर्पण ही उनकी सफलता की असली वजह है। नीतीश ने कई चुनौतियों को पार करते हुए अपने लक्ष्य को हासिल किया और आज वह जिस मुकाम पर हैं, वह उनकी मेहनत का नतीजा है।

पिता ने छोड़ दी थी नौकरी

नीतीश कुमार रेड्डी आज जिस मुकाम पर हैं, वहां तक पहुंचने में उनके पिता का बड़ा त्याग रहा है। उनके पिता ने बेटे की क्रिकेट ट्रेनिंग के लिए अपनी नौकरी तक छोड़ दी। वे पहले विशाखापट्टनम में हिंदुस्तान जिंक में काम करते थे, लेकिन जब उनका ट्रांसफर उदयपुर हुआ, तो बेटे की ट्रेनिंग में कोई बाधा न आए, इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी। उनके इस त्याग और समर्पण ने नीतीश को अपने करियर में सफलता हासिल करने के लिए प्रेरित किया, और आज वे अपने सपनों को साकार करने में सफल हैं।

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