तीसरी बार चोटिल मयंक यादव IPL से बाहर, BCCI का 'स्पीड प्रोजेक्ट' फेल? NCA पर उठे सवाल
भारत के सबसे तेज गेंदबाजों में शुमार मयंक यादव की चोट ने एक बार फिर बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (पूर्व में NCA) की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मयंक को एक बार फिर पीठ की पुरानी चोट ने घेर लिया है, जिससे वह आईपीएल 2025 के बाकी सीजन से बाहर हो गए हैं। चोट की ये तीसरी वापसी सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चिंता की बात है।
6 महीने की लंबी रिहैब के बाद मयंक यादव ने आईपीएल 2025 में वापसी की थी। लेकिन उन्होंने सिर्फ दो ही मैच खेले, जिसमें 8 ओवर में 100 रन खर्च किए और सिर्फ 2 विकेट झटके। उनकी गेंदबाजी की रफ्तार में 15 किमी/घंटा तक की गिरावट देखी गई।

पहले मयंक यादव गेंदबाज़ी करते वक्त अपने शरीर को साइड से मोड़कर (side-on action) गेंद डालते थे, लेकिन अब वो सीधे सामने की ओर (chest-on action) आकर बॉलिंग कर रहे हैं- यानी इंजरी के बाद उनके बॉलिंग एक्शन में बड़ा और अहम बदलाव किया गया है। लखनऊ सुपर जॉइंट ने मयंक की जगह न्यूजीलैंड के विलियम ओ रर्के को बीचे हुए मैच के लिए टीम में शामिल किया है।
13 महीने में 9 मैच, तीन बार इंजरी ब्रेक
मयंक ने 30 मार्च 2024 से 4 मई 2025 तक सिर्फ 9 टी20 मैच खेले हैं। 2024 में आईपीएल के दौरान पहली बार चोट लगी थी। इसके बाद बांग्लादेश सीरीज में इंडिया के लिए चुने गए, लेकिन वहां भी पीठ की परेशानी लौट आई। पूरे घरेलू सीजन में बाहर रहे और COE में रिहैब करते रहे। अब IPL 2025 में सिर्फ दो मैच के बाद दोबारा वही चोट- ये उनका तीसरा ब्रेकडाउन है।
COE यानी 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' का फेल सिस्टम?
IPL मीडिया रिलीज में सिर्फ यह बताया गया कि, 'मयंक यादव को पीठ में चोट लगी है और वो शेष सीज़न से बाहर हो गए हैं। लेकिन अंदरखाने से खबरें कहती हैं कि रिहैब प्रक्रिया में ट्रांसपेरेंसी की कमी है।
एक पूर्व ट्रेनर ने PTI को बताया कि, 'अब नितिन पटेल जा चुके हैं, तो ये भी साफ नहीं कि मयंक की रिहैब कौन देख रहा था? क्या उन्हें जल्दी फिट घोषित कर दिया गया? मयंक और उमरान मलिक दोनों के मामलों में COE की भूमिका संदिग्ध रही है।'
BCCI की उम्मीदें, लेकिन भरोसा डगमगाता हुआ
मयंक यादव अभी सिर्फ 22 साल के हैं और BCCI की पेस कॉन्ट्रैक्ट लिस्ट में शामिल हैं। लेकिन लगातार चोटें न सिर्फ उनकी तरक़्क़ी रोक रही हैं, बल्कि सेलेक्शन कमिटी का भरोसा भी डगमगाने लगा है। अब सवाल ये है कि क्या COE उन्हें दोबारा ट्रैक पर ला पाएगा या BCCI को विदेशी एक्सपर्ट की मदद लेनी होगी?












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