IPL में सचिन का एकलौता शतक, फिर भी नहीं जीत पायी थी MI

IPL in Hindi: सचिन ने आईपीएल में अपने एकमात्र शतक के तौर पर 66 गेंदों पर नाबाद 100 रन बना कर विस्फोटक पारी खेली थी लेकिन उनकी टीम एमआई नहीं जीत सकी।

Sachin Tendulkar in ipl

भारत रत्न सचिन तेंदुलकर ने अपने आइपीएल करियर में सिर्फ एक शतक लगाया। लेकिन बदकिस्मती से वे अपनी टीम मुम्बई इंडियंस को जीत नहीं दिला सके थे। सचिन ने 66 गेंदों पर नाबाद 100 रन बना कर विस्फोटक पारी खेली थी। लेकिन लसिथ मलिगां और अन्य गेंदबाजों के फेल होने के कारण मुम्बई अपने 182 रनों के स्कोर की रक्षा नहीं कर पाया था। कोच्ची टस्कर्स केरला ने सिर्फ 2 विकेट के नुकसान पर ही 183 का टारगेट पूरा कर मैच जीत लिया था।

सचिन- 66 गेंद पर नाबाद 100 रन

मुम्बई इंडियंस और कोच्चि टस्कर्स केरला के बीच ये मैच 2011में खेला गया था। सचिन उस समय मुम्बई इंडियंस के कप्तान थे। पहले बल्लेबाजी मुम्बई ने की। सचिन और डेवी जैकब पारी शुरू करने के लिए आये। जैकब सिर्फ 12 रन बना कर आउट हो गये। तब वन डाउन खेलने के लिए अंबाती रायडू आये। उस समय रोहित शर्मा मुम्बई इंडियंस से जुड़ चुके थे लेकिन उन्हें सलामी बल्लेबाज के रूप में नहीं उतारा गया था।

सचिन और रायडू ने काफी तेज बल्लेबाजी की। सचिन ने सिर्फ 66 गेंदों पर शतक पूरा किया जब कि रायडू ने 33 गेंदों पर 53 रन बनाये। डेवी जैकब की धीमी (21 गेंद पर 12 रन) बल्लेबाजी के कारण मुम्बई 200 का आंकड़ा नहीं छू पाया था। सचिन की तेज पारी के बावजूद मुम्बई 20 ओवर में दो विकेट पर 182 रन ही बना सका।

मलिंगा ने 4 ओवर में 42 लुटाये थे

उस समय कोच्ची टस्कर्स केरला की टीम में ब्रैंडन मैकुलम जैसे तूफानी बल्लेबाज शामिल थे। टीम के कप्तान माहेला जयवर्धने थे। मैकुलम ने मुम्बई के गेंदबाजों की जम कर धुलाई की। उन्होंने 60 गेंदों पर 81 रन बनाये। जयवर्धने ने और भी तेज पारी खेली। 36 गेंदों पर 56 रन बनाये।

रवीन्द्र जडेजा भी तब कोच्ची टीम का ही हिस्सा थे। उन्होंने दो छक्कों और दो चौकों की मदद से 11 गेंदों पर नाबाद 25 रन बनाये। मुम्बई की गेंदबाजी लसिथ मलिंगा पर निर्भर थी। लेकिन इस मैच में वे बुरी तरह नाकाम रहे। 4 ओवर में 42 रन लुटा दिये। उन्हों दो विकेट जरूर मिले।

लेकिन उससे मुम्बई को कोई फायदा नहीं मिला। ऑलराउंडर किरोन पोलार्ड पर भी मुम्बई को बहुत भरोसा था। लेकिन पोलार्ड ने 3 ओवरों में ही 43 रन लुटा दिये। 182 का स्कोर एक सम्मानजनक टोटल था। लेकिन गेंदबाजों की निराशाजनक प्रदर्शन से मुम्बई इस मैच में पिछड़ गया। कोच्ची ने अपनी विध्वंसक बैटिंग से मैच को एकतरफा बना दिया और केवल दो विकेट गवां कर ही 184 रन बना दिये। उसने 19 ओवर में ही जीत का लक्ष्य पूरा कर लिया था।

IPL 2011- सचिन के 553 रन

2011 के आइपीएल में सचिन ने कप्तान के रूप में अच्छा प्रदर्शन किया था। उन्होंने इस प्रतियोगिता में एक शतक की बदौलत कुल 553 रन बनाये थे और तीसरे सफल बल्लेबाज बने थे। मुम्बई की टीम को उन्होंने प्ले ऑफ तक पहुंचाया था। लेकिन सेकेंड क्वालिफायर में बैंगलोर से हार जाने के बाद मुम्बई का सफर वहीं खत्म हो गया था।

बैंगलोर के खिलाफ इस अहम मैच में भी सचिन ने अच्छी बल्लेबाजी की थी। लेकिन किसी अन्य खिलाड़ी का साथ नहीं मिलने के कारण मुम्बई 186 का लक्ष्य पूरी नहीं कर पायी था। बैंगलोर की तरफ से क्रिस गेल ने 47 गेंदों पर 89 रनों की आक्रामक पारी खेली थी जिसमें 9 चौके और 5 छक्के शामिल थे। गेल की बैटिंग के कारण बैंगलोर 20 ओवर में 185 रन बनाने में कामयाब रहा था। जवाब में सचिन ने भी 24 गेंदों में 40 रन बना कर मुम्बई को तेज शुरूआत दी थी लेकिन उनका साथ देने वाला कोई नहीं था।

सेकेंड क्वालिफायर में भी सचिन की अच्छी बैटिंग

मुम्बई ने फाइनल में जाने के इरादे से कुछ प्रयोग भी किये थे लेकिन वह सफल नहीं रहा। हरभजन सिंह को वन डाउन खेलने के लिए भेजा गया था। लेकिन वह कोई कमाल नहीं कर सके और 13 रन बना कर चलते बने। रोहित शर्मा भी केवल 13 रनों का ही योगदान दे पाये। अंबाती रायडू 0 तो पोलार्ड 3 रनों पर आउट हो गये।

मुम्बई की टीम 20 ओवरों में 8 विकेट के नुकसान पर 142 रन ही बना सकी। अगर उस दिन अगर रोहित, रायडू या पोलार्ड में किसी एक ने भी सचिन का साथ दिया होता तो मैच का नतीजा कुछ और होता। हालांकि मुम्बई की टीम ये प्रतियोगिता नहीं जीत पायी लेकिन सचिन ने अपनी बैटिंग की छाप जरूर छोड़ी थी।

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