IPL 2026: महंगी फीस और फ्लॉप प्रदर्शन, करोड़ों रुपये लेकर टीम की लुटिया डुबोने वाले 5 खिलाड़ी

IPL 2026: आईपीएल की चकाचौंध में अक्सर खिलाड़ियों पर लगने वाली बोली उनके प्रदर्शन का पैमाना बन जाती है। लेकिन 2026 का सीजन गवाह रहा है कि भारी-भरकम बैंक बैलेंस हमेशा मैदान पर रनों की गारंटी नहीं होता। इस साल कई फ्रेंचाइजियों ने पानी की तरह पैसा बहाया, पर बदले में उन्हें सिर्फ निराशाजनक प्रदर्शन मिला।

लिस्ट में कई बड़े नाम शामिल हैं, जिनसे बड़ी उम्मीदें थीं लेकिन प्रदर्शन बहुत फिसड्डी रहा। ऐसे ही पांच महंगे प्लेयर्स के बारे में इस आर्टिकल में बताया गया है, जो करोड़ों डकार गए लेकिन टीम को डुबो गए। इनके बारे में आपको भी जरूर जानना चाहिए।

IPL 2026

ऋषभ पंत (लखनऊ सुपर जायंट्स)- 27 करोड़

आईपीएल इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी होने का ठप्पा ऋषभ पंत के लिए इस बार सबसे बड़ा बोझ साबित हुआ। लखनऊ ने उन पर 27 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक दांव खेला था, लेकिन कप्तान और विकेटकीपर के तौर पर वह उम्मीदों के बोझ तले दबे नजर आए। पंत ने 11 मैचों में केवल 251 रन बनाए और पूरे सीजन में उनके बल्ले से महज एक अर्धशतक निकला। 27.89 का औसत और 138.67 का स्ट्राइक रेट उनकी उस आक्रामक छवि के साथ बिल्कुल न्याय नहीं करता जिसके लिए वह जाने जाते हैं। उनकी इस फॉर्म का असर टीम के नतीजों पर भी पड़ा और लखनऊ की टीम प्लेऑफ की रेस से बाहर हो गई।

कैमरन ग्रीन (कोलकाता नाइट राइडर्स)- 25.20 करोड़

केकेआर ने ग्रीन को एक गेम-चेंजर ऑलराउंडर मानकर रिकॉर्ड कीमत पर अपनी टीम में शामिल किया था। हालांकि उनके आंकड़े देखने में सामान्य लग सकते हैं, लेकिन 25 करोड़ से ज्यादा की फीस वाले खिलाड़ी से जिस 'मैच विनिंग इम्पैक्ट' की उम्मीद थी, वह गायब रहा। ग्रीन ने 10 पारियों में 33.14 की औसत से 232 रन बनाए, लेकिन एक विदेशी मुख्य खिलाड़ी के रूप में वह टीम को जीत दिलाने वाली पारियां नहीं खेल सके। गेंदबाजी में भी उनका प्रदर्शन फीका रहा, जहां उन्होंने 6 पारियों में केवल 4 विकेट हासिल किए।

निकोलस पूरन (लखनऊ सुपर जायंट्स)- 21 करोड़

लखनऊ ने पूरन की 'पावर हिटिंग' पर भरोसा जताते हुए उन्हें 21 करोड़ रुपये की मोटी रकम में रिटेन किया था, पर इस सीजन में उनका बल्ला पूरी तरह खामोश नजर आया। मुंबई इंडियंस के खिलाफ 21 गेंदों में खेली गई 63 रनों की पारी को अगर छोड़ दें, तो बाकी पूरे टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन बेहद साधारण रहा। 11 पारियों में पूरन के बल्ले से मात्र 184 रन निकले और उनका औसत गिरकर 16.73 पर आ गया। 124.32 का स्ट्राइक रेट यह बताने के लिए काफी है कि वह इस सीजन में अपनी लय हासिल करने के लिए संघर्ष करते रहे, जिससे टीम का मिडिल ऑर्डर पूरी तरह चरमरा गया।

हार्दिक पांड्या (मुंबई इंडियंस)- 16.35 करोड़

मुंबई इंडियंस की कमान संभाल रहे हार्दिक पांड्या के लिए यह साल किसी व्यक्तिगत और कप्तानी के बुरे सपने जैसा रहा। ऑलराउंडर की भूमिका में वह न तो बल्ले से योगदान दे पाए और न ही गेंद से कोई प्रभाव छोड़ सके। 8 मैचों में उनके बल्ले से महज 146 रन निकले और गेंदबाजी में वह केवल 4 विकेट ही चटका पाए। सबसे ज्यादा चिंता की बात उनकी गेंदबाजी रही, जहां वह प्रति ओवर 10 से ज्यादा रन लुटाते रहे। एक कप्तान और फिनिशर के तौर पर वह अपनी टीम को प्रेरित करने में पूरी तरह नाकाम रहे, जिसका खामियाजा मुंबई को भुगतना पड़ा।

सूर्यकुमार यादव (मुंबई इंडियंस)- 16.35 करोड़

टी-20 फॉर्मेट के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज माने जाने वाले 'मिस्टर 360' सूर्यकुमार यादव का बल्ला इस सीजन लगभग खामोश रहा रहा। मुंबई इंडियंस को जिस विस्फोटक बल्लेबाजी और स्थिरता की उम्मीद सूर्या से थी, वह इस बार देखने को नहीं मिली। 11 मैचों में उन्होंने केवल 195 रन बनाए और उनके बल्ले से दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ सिर्फ एक अर्धशतक निकला। 17.73 का बल्लेबाजी औसत यह साफ करता है कि वह अपनी पुरानी फॉर्म से कोसों दूर थे। जो खिलाड़ी टीम की बल्लेबाजी की रीढ़ माना जाता था, उसका इस तरह फ्लॉप होना मुंबई के लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुआ।

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