गावस्कर धोनी को हेड कोच बनाना चाहते हैं! आजतक खुद क्यों नहीं बने?

सुनील गावस्कर महेंद्र सिंह धोनी को कोच बनते हुए देखना चाहते हैं लेकिन खुद इतने महान बल्लेबाज होकर भी उन्होंने कभी टीम इंडिया का कोच बनना स्वीकार नहीं किया। इसका कारण क्या है?

 Sunil Gavaskar

भारत के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर अभी आइपीएल में कमेंट्री कर रहे हैं। उन्होंने कहा है, महेन्द्र सिंह धोनी टीम इंडिया के हेड कोच बनने के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं। इस भूमिका में वे कुछ समय बाद नजर आएंगे। जाहिर है गावस्कर ने ये राय धोनी के अनुभव और योग्यता को ध्यान में रख कर जाहिर की है। लेकिन अगर अनुभव और योग्यता ही इस पद के लिए सबसे बड़ी शर्त है तो सुनील गावस्कर से बेहतर उम्मीदवार कौन हो सकता है? लेकिन हैरत की बात ये है कि भारत के इस प्रतिष्ठित बल्लेबाज ने आज तक कभी हेड कोच बनने में दिलचस्पी नहीं दिखायी। गावस्कर के क्रिकेट ज्ञान का हर कोई लोहा मानता है। उनकी बल्लेबाजी का पूरी दुनिया लोहा मानती है। फिर गावस्कर क्यों नहीं टीम इंडिया के हेड कोच बने ? वे महेन्द्र सिंह धोनी को क्यों इस पद के लिए सबसे उपयुक्त बता रहें हैं ? धोनी ने तो अभी रिटायरमेंट की घोषणा भी नहीं की है।

धोनी जब टीम इंडिया के मेंटर थे तब क्या हुआ था?

महेन्द्र सिंह धोनी को 2021 टी-20 विश्वकप के लिए टीम इंडिया का मेंटर बनाया गया था। उस समय रवि शास्त्री हेड कोच थे। विराट कोहली कप्तान थे। इन दिग्गजों के रहने के बावजूद धोनी को इंसलिए मेंटर बनाया गया था ताकि टीम इंडिया प्रेशर हैंडल करने का गुर सीख सके। ये बात ध्यान रखने की है कि दबाव सोखने की योग्यता नैसर्गिक होती है। इसे सीखा नहीं जा सकता। अगर ऐसा ही होता तो विराट कोहली भी धोनी की तरह मैदान पर शांतचित्त हो कर मैच चलाने में सफल हो जाते। लेकिन क्या ऐसा हो सका ? यहां तक कि धोनी भी किसी को 'कैप्टन कूल' नहीं बना सकते। 2021 के टी-20 विश्वकप में धोनी को मेंटर बनने से क्या भारत को फायदा हुआ था ? प्रतियोगिता का पहला मैच ही वह पाकिस्तान से हार गया था। वह भी 10 विकेट से। बल्लेबाजी में भारत का टॉप ऑर्डर बुरी तरह नाकाम रहा। सुपर-12 चरण के बाद ही टीम इंडिया की टूर्नामेंट से विदाई हो गयी।

कम सफल खिलाड़ी भी बेहतर कोच हो सकता है

क्या सबसे सफल खिलाड़ी, सबसे बेहतर कोच भी बन सकता है ? क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर अभी मुम्बई इंडियंस के मेंटर हैं। फिलहाल मुम्बई की जो दुर्दशा है वह सबके सामने हैं। भारत के महानतम खिलाड़ियों में से एक कपिल देव 1999 में टीम इंडिया के कोच बने थे। लेकिन एक वर्ष से कम समय में ही उन्हें दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों के बीच कोच पद से इस्तीफा दे दिया था। कपिलदेव के कोचिंग कार्यकाल में भारत का प्रदर्शन औसत से भी नीचे था। कप्तानी की तरह कोचिंग भी एक आंतरिक क्षमता है। यह क्षमता किसी कम सफल खिलाड़ी में भी हो सकती है। जैसे जॉन बुकनान ने कोच के रूप में ऑस्ट्रेलिया को 2003 और 2007 का विश्व कर दिलाया था। लेकिन एक क्रिकेटर के रूप में उनका योगदान बहुत कम था। इन्होंने सिर्फ 7 फर्स्ट क्लास मैच और 1 लिस्ट ए मैच खेला था। इसके वाबजूद वे सर्वश्रेष्ठ कोच बने थे।

गावस्कर आजतक कोच क्यों नहीं बने?

गावस्कर आज तक कोच क्यों नहीं बने ? इस सवाल का उन्होंने खुद जवाब दिया था। उन्होंने कहा था, अगर आप कोच या चयनकर्ता बनना चाहते हैं तो आपको मैच की एक-एक गेंद का हिसाब रखना होगा। हवा में और पिच पर गेंद का नेचर क्या था, बल्लेबाज ने कैसे उस गेंद को खेला, गेंद के हिसाब से फील्डिंग कैसी थी ? पूरे दिन के मैच में इतने हिसाब रखने के लिए धैर्य और एकाग्रता की जरूरत होती है। फिर उसे खिलाड़ियों के साथ तालमेल बैठाकर ये सारी बातें बतानी भी होती हैं। कोच बनना आसान नहीं, उसके सिर पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। मैं एक-एक गेंद का हिसाब नहीं रख सकता था। इसलिए मैंने कभी कोचिंग के बारे में सोचा ही नहीं। क्रिकेट का ज्ञान रखना अलग बात है और कोच बनना अगल बात।

किसी को बैटिंग टिप्स देना आसान है लेकिन कोचिंग नहीं

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    गावस्कर बैटिंग लिजेंड हैं। वे कोच तो नहीं बने लेकिन उन्होंने भारत के कई बड़े क्रिकेटरों को बैटिंग सुधारने के लिए सलाह दी है। गावस्कर के मुताबिक, बहुत पहले सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, वीरेन्द्र सहवाग जैसे खिलाड़ियों ने सलाह के लिए उनसे सम्पर्क किया था। मैं उनके साथ नोट्स का आदान-प्रदान करता था। मुझे जो कहना होता वो कहता और कुछ बातें लिख कर भी देता था। इस काम में मुझे बहुत मजा आता था। ये सब मैं शौकिया करता था। कोच बनने के बारे में कभी सोचा ही नहीं। 2004 में गावस्कर टीम इंडिया के सलाहकार बनाये गये थे। तब भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज खेली थी। लेकिन उन्होंने कोच बनने में कभी दिलचस्पी नहीं दिखायी थी। यानी गावस्कर के मुताबिक, कोच बनना इतना आसान नहीं जितना सोचा जाता है।

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