IPL 2023: आईपीएल इतिहास में स्पिन vs पेस का रिकॉर्ड क्या है? धारणाओं को पलट देते हैं ये आंकड़े!
IPL Interesting Facts: आईपीएल के पूरे इतिहास में अभी तक स्पिन और पेस गेंदबाजी के बीच के ये रिकॉर्ड्स बताते हैं कि चीजें कई बार धारणाओं से हटकर होती हैं।

इंडियन प्रीमियर लीग 2023 अपने पुराने होम और अवे फॉर्मेट में वापस लौट आया है जहां प्रत्येक टीम को आधे मुकाबले अपने घर और बाकी मुकाबले दूसरी टीमों के घरेलू मैदानों पर खेलने हैं। इससे लीग में काफी रोचकता मिलती है और अलग-अलग मैदानों पर खेलने के चलते टीमों के साथ दर्शकों को भी नए-नए अनुभव मिलते हैं। इससे एक ही मैदान पर सारे मैच खेलने के चलते पिच के खराब होने का खतरा भी कम रहता है। भारत में आईपीएल में आमतौर पर फ्लैट ट्रैक देखने को मिलते हैं। पिच बैटिंग के लिए बढ़िया हों तो स्पिनरों की कुटाई बहुत बुरी तरह से होती है। इस आर्टिकल में हम देखेंगे कि आईपीएल के पूरे इतिहास में अभी तक स्पिन और पेस गेंदबाजी के बीच कैसा इकोनामी रेट रहता है, किसकी कितनी कुटाई होती है और इन दोनों गेंदबाजी में किसने कितनी बाजी मारी है।

स्पिन गेंदबाजों का इकोनामी रेट तेज गेंदबाजों की तुलना में कम
आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि आईपीएल में अभी तक स्पिन गेंदबाजों का इकोनामी रेट तेज गेंदबाजों की तुलना में कम है। जी हां, यह आंकड़ा काफी हैरान करने वाला है क्योंकि भारत में तो फ्लैट ट्रैक पर स्पिनरों को बहुत मार पड़ने की संभावना रहती है और ऊपर से टी20 फॉर्मेट! तो फिर तेज गेंदबाजों का इकोनामी रेट स्पिनरों से ज्यादा कैसे हो गया? यहां हम देख सकते हैं कि पिछला आईपीएल मुंबई की धीमी पिचों में ही सिमट कर रह गया था। इसका फाइनल मुकाबला अहमदाबाद में खेला गया था। स्लो ट्रैक पर स्पिनरों की कसी हुई गेंदबाजी जग जाहिर है। ऐसे ही आईपीएल 2020 और 21 दुबई में हुआ जहां की पिचें बहुत ही स्लो है। इसके अलावा भारत में चेन्नई के एम चिदंबरम स्टेडियम की पिच स्पिनरों को बहुत मदद करती है। साथ ही सुनील नरेन और राशिद खान टी20 के इतिहास के सबसे बेहतरीन स्पिनरों में हैं और आईपीएल में लगातार खेल रहे हैं। हालांकि तेज गेंदबाजी को मदद करने वाली दक्षिण अफ्रीकी पिचों पर भी 2009 में आईपीएल हो चुका है लेकिन इन फैक्ट्स पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता।

तेज गेंदबाजी की भूमिका इन आंकड़ों में बिल्कुल पलट जाती है-
स्पिनरों का आईपीएल इतिहास में इकोनमी रेट 7.51 है जबकि तेज गेंदबाजी का 8.25 रहा है। एक और हैरान करने वाला आंकड़ा यहां पर यह निकलता है कि स्पिनरों ने तेज गेंदबाजों की तुलना में बहुत ही कम गेंदबाजी की है जबकि आईपीएल के नेचर को देखते हुए ऐसा लगता है कि तेज गेंदबाजी स्पिन की तुलना में कम की जाती होगी लेकिन ऐसा नहीं है। स्पिनरों ने जहां आईपीएल के पूरे इतिहास में 27616 ओवर फेंके हैं तो वहीं तेज गेंदबाजों ने 55425 ओवर फेंके हैं। इस दौरान स्पिनरों को 3322 विकेट मिले तो तेज गेंदबाजों को दुगने विकेट मिले हैं। यानी भले ही इकोनमी रेट ज्यादा हो, पर आईपीएल में बल्लेबाजों को आउट करने में स्पिनरों की जगह तेज गेंदबाजों की भूमिका डबल हो जाती है। यहां तेज गेंदबाजों ने 6756 विकेट लिए हैं।

पेसरों और स्पिनरों के औसत में मामूली फर्क-
पेस गेंदबाजी एक और लेवल पर स्पिनरों से आगे निकल जाती है और वह है- औसत। तेज गेंदबाजों ने ना केवल स्पिनरों की तुलना में डबल विकेट लिए बल्कि बेहतर औसत के साथ भी लिए। तेज गेंदबाज आईपीएल में 28.43 के एवरेज से विकेट ले रहे हैं और स्पिनरों ने अभी तक आईपीएल इतिहास में 29.22 के औसत से विकेट लिए।
सबसे ज्यादा छक्के किस पर पड़े-
एक और दिलचस्प फैक्ट देखिए। बात आती है छक्के की तो हम स्पिनरों पर पड़ने वाले छक्कों के बारे में बहुत आसानी से कल्पना कर लेते हैं लेकिन आईपीएल में स्पिनरों पर 4093 छक्के लगाए हैं तो वहीं तेज गेंदबाजों ने 6515 छक्के लगाए हैं जो बताता है कि T20 का बल्लेबाज छक्का लगाने में किसी भी गेंदबाज को बख्शता नहीं है।
यहां तेज गेंदबाजी बहुत पीछे रह जाती है-
लेकिन तेज गेंदबाजी आईपीएल में स्पिन से तब बहुत पीछे रह जाती है जब बात अतिरिक्त रन देने की आती है। अतिरिक्त रन में पेसर स्पिनरों की तुलना में लगभग 3 गुना ज्यादा रन दे बैठे हैं। स्पिनरों ने जहां 3777 एक्स्ट्रा रन दिए हैं तो तेज गेंदबाजों ने 11265 एक्स्ट्रा रन दिए हैं।












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