प्लेयर ऑफ द मैच बने विराट कोहली, कप्तान केएल राहुल ने कहा- जितना आसान आप सोचते हैं, वैसा नहीं होता...
भारत ने एशिया कप के आखिरी मुकाबले को 111 रनों से जीत लिया है। अफगानिस्तान के खिलाफ भारतीय खिलाड़ियों ने गेंद और बल्ले दोनों से ही धमाकेदार प्रदर्शन किया।
नई दिल्ली, 8 सितंबर। भारत ने एशिया कप के आखिरी मुकाबले को 111 रनों से जीत लिया है। अफगानिस्तान के खिलाफ भारतीय खिलाड़ियों ने गेंद और बल्ले दोनों से ही धमाकेदार प्रदर्शन किया। बल्लेबाजी में विराट कोहली ने शतक जड़कर आलोचकों का मुंह बंद किया तो वहीं गेंदबाजी में भुवनेश्वर कुमार ने सिर्फ 4 रन देकर पांच विकेट झटक लिए। भारत का एशिया कप का सफर इस मुकाबले के साथ खत्म हुआ।

जीत के बाद केएल राहुल ने कही यह बात
आज के मुकाबले में टीम की कप्तानी करने वाले केएल राहुल ने जीत के बाद कहा कि बड़ी चोट और सर्जरी के बाद वापसी करना आसान नहीं होता। बल्लेबाजी के दौरान मैंने महसूस किया कि पिछले कुछ मैच खेलना इतना आसान नहीं था जितना आप सोचते हैं। मैं एशिया कप में आकर खेलने के लिए काफी एक्साइटेड था। लेकिन जैसा मैंने सोचा था चीजें वैसे नहीं हुई और मुझे लय हासिल करने में समय लग गया।

फाइनल मैच खेलना चाहता था- केएल राहुल
केएल राहुल ने कहा कि एक खिलाड़ी के तौर पर यह मेरे लिए सीख है, इस बात की खुशी है कि आज मैंने बल्ले से टीम के लिए योगदान दिया। मैं धीरे-धीरे लय में आ रहा हूं, परिणाम निराशाजनक रहा है। सच कहूं तो हम फाइनल खेलना चाहते थे और खुद को वर्ल्ड कप से पहले परखना चाहते थे। फिर भी हम पॉजिटिव हैं और इस टूर्नामेंट से कई सारी सीख को अपने साथ ले जा रहे हैं।

कोहली ने अनुष्का शर्मा को दिया क्रेडिट
इस मुकाबले में शतक जड़ने वाले कोहली को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। कोहली ने जीत के बाद कहा कि आज का दिन बेहद शानदार रहा। कोहली ने अनुष्का शर्मा की तारीफ करते हुए कहा कि उसने मेरा कठिन समय में हौसला बढ़ाया। मुझे सही तरह का मार्गदर्शन देती रही, जिस कारण मैं आज इस तरह की पारी खेल पाया। ईमानदारी से कहूं तो मैंने अपनी पूरी ताकत से आज बल्लेबाजी की।

ब्रेक से लौटने के बाद आई नई इनर्जी
कोहली ने कहा कि ब्रेक से लौटने के बाद उनकी बल्लेबाजी बेहतर हुई है। कोहली ने कहा कि जब मैं ब्रेक से वापस लौटा तो मैंने चीजों को नए तरीके से देखना शुरू किया। मौजूदा समय में मेरी फॉर्म को लेकर हो रही चर्चाओं की तरफ अधिक ध्यान नहीं दिया। मैंने बस ये सोचा कि मैंने सालों तक भारत के लिए क्या किया है और मुझे उसे ही आगे भी करना है। इसके बाद चीजें सकारात्म होती चली गई।












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