2014 का T-20 वर्ल्ड कप जीत सकता था भारत, लेकिन युवराज और धोनी ने डुबो दी कश्ती

स्पोर्ट्स डेस्क, 12 सितंबर: भारत 2014 में भी टी-20 विश्वकप जीत सकता था। लेकिन धुरंधर धोनी और युवराज सिंह ने भारत की कश्ती डूबो दी थी। धोनी और युवराज छक्का मारने में माहिर थे। दोनों विस्फोटक बल्लेबाजी की काबिलियत रखते थे। लेकिन इस खूबी के बावजूद उन्होंने फाइनल मुकाबले में बेहद धीमी बल्लेबाजी की थी। जिसका खामियाजा भारत को भुगतना पड़ा। भारत ने सेमीफाइनल में मजबूत दक्षिण अफ्रीका को हराया था। उम्मीद थी कि फाइनल में भी वह शानदार बल्लेबाजी का मुजाहिरा करेगा। लेकिन श्रीलंकाई गेंदबाजों ने भारत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। युवराज और धोनी जैसे धाकड़ हिटर भी रन के लिए तरस गये थे।

10.3 ओवर में भारत का स्कोर- 64/2

10.3 ओवर में भारत का स्कोर- 64/2

2014 टी-20 वर्ल्ड कप का फाइनल मीरपुर (बांग्लादेश) में खेला गया था। श्रीलंका के कप्तान कुमार संगकारा ने टॉस जीत कर पहले गेंदबाजी चुनी। भारत का स्कोर अभी 4 रन ही था कि अंजिक्य रहाणे के रूप में पहला विकेट गिर गया। स्लो मीडियम पेसर एंजेलो मैथ्यूज ने उनका विकेट लिया। इसके बाद रोहित शर्मा और विराट कोहली ने 60 रनों की साझेदारी की। रंगना हेराथ ने रोहित को 29 रनों पर आउट कर दिया। भारत के 10.3 ओवर में 64 रन बने थे।

फिर मैदान पर आए युवराज सिंह

फिर मैदान पर आए युवराज सिंह

शुरू में ही रहाणे का विकेट गिर जाने से भारत की बल्लेबाजी दबाव में आ गयी। पावर प्ले के पहले छह ओवरों में सिर्फ 31 रन बने थे। रोहित के बाद कोहली ने एक छोर संभाले रखा। उनका साथ देने के लिए युवराज सिंह आये। लेकिन वे अपनी छवि के बिल्कुल उलट खेलने लगे। ऐसा लग रहा था जैसे श्रीलंकाई गेंदबाजों ने उनके पांवों में जंजीर बांध दी हो। इस धीमी बल्लेबाजी का असर ये हुआ कि भारत के 100 रन 15.1 ओवर में बने। हालांकि कोहली ने 43 गेंदों में 50 बना दिये थे।

17वें, 18वें ओवर में धीमी बल्लेबाजी

17वें, 18वें ओवर में धीमी बल्लेबाजी

टी-20 के खेल में बल्लेबाजी के लिहाज से 17 वां ओवर बहुत खास होता है। यहीं से बैटर अपना गियर चेंज करते हैं। अब देखिए 17वें ओवर में क्या हुआ। श्रीलंका के ऑफ स्पिनर सचित्रा सेनानायके 17वां ओवर फेंकने के लिए आये। कोहली अन्य बल्लेबाजों की अपेक्षा तेज खेल रहे थे। आमतौर पर डेथ ओवरों में बल्लेबाज स्पिनरों पर हल्ला बोल देते हैं। लेकिन कोहली और युवराज सेनानायके के सामने बिल्कुल सहमे रहे। युवराज पहली दो गेंदों पर कोई रन नहीं बना सके। तीसरी गेंद पर एक रन लिया। चौथी गेंद पर कोहली ने भी एक रन लिया। आखरी चार गेंदों पर केवल सिंगल आये। 17वें ओवर में सिर्फ 4 रन बने। एक ओवर में छह छक्के मारने वाले युवराज की पकाऊ बल्लेबाजी देख कर भारत के क्रिकेट प्रेमी हैरान थे। ये टी-20 का फाइनल मैच था और युवी टेस्ट मैच खेल रहे थे। हद तो तब हो गयी जब 18वें ओवर में भी सिर्फ 4 रन बने। मलिंगा के इस ओवर में युवी ने फिर दो डॉट गेंदें खेलीं। कोहली भी केवल सिंगल ही ले रहे थे।

19वें ओवर में क्या हुआ ?

19वें ओवर में क्या हुआ ?

18वें ओवर का जब खेल खत्म हुआ तो भारत का स्कोर था दो विकेट के नुकसान 119 रन। किसी भी लिहाज से ये फाइनल मैच की बैटिंग नहीं थी। भारत के सिर्फ 2 विकेट ही गिरे थे। फिर भी युवी और कोहली ने साहसिक शॉट खेलने की कोशिश नहीं की। इस मुकाम पर जब मैच हाथ से फिसल रहा हो तब कोई टीम विकेट बचा कर भला क्या कर सकती है। अब दो ओवर ही बचे थे। भारतीय समर्थक किसी बड़े ओवर की आशा कर रहे थे। 19वां ओवर कुलशेखरा ने डाला। पहली ही गेंद पर युवराज सिंह आउट हो गये। उन्होंने 21 गेंदें खेल कर 11 रन बनाये। न उनके बैट से चौका निकला और न ही छक्का। ऊपर से 10 डॉट गेंदें भी खेंलीं। टी-20 के खेल में इतनी डॉट गेंदें तो कोई माफ नहीं कर सकता। तब कुछ लोग ये सोच रहे थे कि युवराज जल्द आउट क्यों नहीं हो रहे। वे जाते तो रैना शायद पासा पलट सकते थे। अब कोहली का साथ देने कैपटन कूल आये। धोनी को दुनिया का बेस्ट फिनिशर माना जाता था। लेकिन उस दिन उन्होंने भी खेलप्रेमियों को निराश कर दिया। 19वें ओवर में भी सिर्फ चार बने वो भी सिंगल के रूप में । धोनी सिर्फ 1 रन बना पाये।

20वें ओवर में 7 रन, शर्मनाक ! शर्मनाक!

20वें ओवर में 7 रन, शर्मनाक ! शर्मनाक!

अब 20वें ओवर पर उम्मीद टिकी थी। अंतिम ओवर लसिथ मलिंगा ने डाली। पहली गेंद पर धोनी रन नहीं बना सके। दूसरी गेंद वाइड रही जिससे एक रन आया। दूसरी गेंद फिर डाली गयी जिस पर बाई के दो बने। तीसरी गेंद पर धोनी फिर रन नहीं बना पाये। चौथी गेंद पर धोनी के बल्ले से 2 रन निकले। पांचवी गेंद पर धोनी ने एक रन लिया। आखिरी गेंद पर कोहली आउट हो गये। 20 वें ओवर में सिर्फ 7 रन बने। ये शर्मनाक बैटिंग तब हुई जब कोहली और धोनी जैसे महारथी मैदान पर थे। भारत की बल्लेबाजी को जैसे लकवा मार गया था। अंतिम चार ओवरों में सिर्फ 19 रन बने थे और इसमें कोई चौका या छक्का नहीं था। भारत का स्कोर जैसे-तैसे 130 पर पहुंचा। भारत के छह बल्लेबाजों को बैटिंग का मौका ही नहीं मिला। पता नहीं कप्तान धोनी ने क्या सोच कर विकेट को बचाये रखा। भारत ने जैसे ही 130 का मामूली स्कोर बोर्ड पर टांगा उसी समय उसकी हार पर तय हो गयी थी।

खराब बैटिंग के कारण हारा भारत

खराब बैटिंग के कारण हारा भारत

131 का आसान लक्ष्य पाने में श्रीलंका को कोई परेशानी नहीं हुई। संगकारा ने कप्तानी पारी खेली और नाबाद 52 रन बनाये। जयवर्धने ने 24 और तिसारा परेरा ने तीन छक्कों के साथ 14 गेंदों पर नाबाद 23 रन बनाये। श्रीलंका ने 17.5 ओवर में जीत का लक्ष्य हासिल कर लिया। उसने छह विकेट से जीत दर्ज की। अगर भारत ने 170 प्लस का स्कोर बनाया होता तो मुकाबला कांटे का हो सकता था। खराब बैटिंग की वजह से भारत 2014 का टी-20 वर्ल्ड कप जीतने से चूक गया था।

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