IND vs AUS: वनडे World Cup साल में बड़ी ODI सीरीज गंवाई, क्या रहे इस हार के बड़े कारण

IND vs AUS: ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपनी जमीन पर भारत को एक ऐसी हार मिली है जिसने उनकी वनडे वर्ल्ड कप की तैयारियों पर सवाल उठाया है। क्या रहे इस हार के कारण और क्या ले सकते हैं सबक-

IND vs AUS ODI

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वनडे सीरीज कंगारूओं के पक्ष में 2-1 से समाप्त हो गई है। भारतीय क्रिकेट टीम पिछली पांच वनडे सीरीज में पहली बार हारी है। इतना ही नहीं उन्होंने पिछली 10 घरेलू द्विपक्षीय वनडे सीरीज में यह केवल दूसरी हार पाई है। भारत को 2019 में आस्ट्रेलिया ने 3-2 से हराया था। जाहिर है कि यह एक बड़ा झटका है क्योंकि भारत में ही इसी साल वनडे वर्ल्ड कप होना है और वहां पर भी लगभग यही टीम खेलने के लिए उतरेगी। सिर्फ एक या दो बदलाव और संभव है।

ताजा मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने चेन्नई में टॉस जीतने के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए 49 ओवर में 269 रन बनाए थे जिसके जवाब में भारतीय टीम 49.1 ओवर में 248 रन ही बना सकी। इससे पहले सीरीज का पहला मैच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला गया था जहां भारत ने केएल राहुल और रवींद्र जडेजा की अच्छी साझेदारी के दम पर मुकाबला जीतने में कामयाबी हासिल की थी। लेकिन दूसरे मैच में ऑस्ट्रेलिया ने बुरी तरह से भारत को रौंदते हुए केवल 11 ओवर में ही 118 रनों का टारगेट हासिल कर लिया था।

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स्पिनरों के सामने हो रही परेशानी-

इसमें कोई भारत की हार के बड़े कारण ढूंढने की कोशिश करें तो ऑस्ट्रेलिया की टीम ने चुनौतीपूर्ण पिचों पर टेस्ट मैच के बाद वनडे में भी मेजबानों को तंग किया है। वहीं भारतीय टीम के लिए चुनौतीपूर्ण हालातों में बैटिंग अब एक बड़ी समस्या है। भारत को चेन्नई मैच केवल स्पिनरों ने ही हरा कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया के पास एडम जांपा ने 10 ओवर में 45 रन देकर चार विकेट लिए तो एस्टन एगर ने 41 रन देकर दो विकेट लिए। चेन्नई की पिच स्पिन के बहुत अनुकूल मानी जाती है और टीम इंडिया ने साबित किया है कि वह टर्निंग ट्रैक पर ना केवल रेड बॉल में बल्कि व्हाइट बॉल में भी दिक्कत महसूस करते हैं।

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बाएं हाथ के तेज गेंदबाजों से पुरानी दिक्कत

भारतीय टीम बाएं हाथ के तेज गेंदबाजों के सामने कई बार एक्सपॉज हो चुकी है। चैंपियंस ट्रॉफी 2017 के फाइनल में उनको मोहम्मद आमिर ने आउट किया था तो वहीं 2019 के वर्ल्ड कप में ट्रेंट बोल्ट ने टॉप आर्डर उड़ा दिया था। इसी तरह से 2020 के T20 वर्ल्ड कप में शाहीन अफरीदी ने जबरदस्त गेंदबाजी की थी। अब स्टार्क ने ताजा सीरीज में अपने पहले मुकाबले में तीन और दूसरे मैच में 5 विकेट लेकर भारतीय टीम की हार में बड़ी भूमिका निभाई। दूसरे मुकाबले में टीम इंडिया 117 पर ही ढेर हो गई थी। भारत को वनडे वर्ल्ड कप में अपनी यह बीमारी भी ठीक करनी होगी।

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टीम संयोजन और बैटिंग ऑर्डर

भारत में अपनी प्लेइंग इलेवन में सूर्यकुमार यादव पर काफी भरोसा दिखाया है लेकिन यह सूर्यकुमार यादव के करियर में पहली बार हुआ है कि वह इतने लंबे समय तक टेस्ट टीम सेटअप का हिस्सा होने के बाद वनडे क्रिकेट जैसे फॉर्मेट में वापसी कर रहे थे। यादव अभी तक ना तो टेस्ट क्रिकेट में अपनी पहचान बना पाए हैं और ना ही वनडे में मिले भरपूर मौकों का फायदा उठा पाए हैं। सूर्यकुमार यादव का अलग-अलग फॉर्मेट में सही समय पर एडजस्ट ना करना टीम इंडिया की एक समस्या के तौर पर सामने आया है। तीसरे मैच में तो उनका बैटिंग ऑर्डर और भी नीचे कर दिया। ऐसे में प्लेइंग इलेवन पर सवाल उठता है कि क्या संजू सैमसन सूर्यकुमार यादव से बेहतर बल्लेबाज साबित हो सकते थे क्योंकि वे स्पिन कहीं अधिक बेहतर खेल लेते हैं और उनकी आक्रामकता सूर्यकुमार यादव से कम नहीं है, साथ ही वो आपको विकेटकीपिंग भी करके देते। भारत को पंत और अय्यर जैसे खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में संजू सैमसन पर विश्वास दिखाना चाहिए।

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बड़े बल्लेबाजों का बड़ा स्कोर नहीं करना-

यह समस्या भी पिच से जुड़ी परेशानी का एक विस्तार ही है जहां टॉप की फॉर्म में चल रहे शुभभन गिल एक अर्धशतक भी लगाने में कामयाब नहीं रहते। रोहित शर्मा भी कोई पारी ढंग की नहीं खेल पाते और विराट कोहली शुरुआत मिलने के बावजूद भी तीन अंकों में स्कोर तब्दील नहीं कर पाते। कोहली ने जिस तरह से तीसरे मैच में 54 रन बनाने के बाद अपना विकेट गंवाया उसकी आलोचना होनी चाहिए। यही स्थिति केएल राहुल की रही जिन्होंने सेट होने के बाद एक खराब शॉट खेला तो वही हार्दिक पांड्या ने भी कुछ ज्यादा ही तेजी दिखाने की कोशिश की और आउट हुए। इससे पहले रोहित शर्मा ने 17 गेंदों पर 30 रन बनाए थे लेकिन अपनी पारी को आगे नहीं बढ़ा सके। भारत को कहीं ना कहीं टी20 की मानसिकता से बाहर आकर वनडे क्रिकेट को पूरे 50 ओवर के खेल की तरह समझना होगा। यह ठीक ऐसे ही है जैसे आप टेस्ट मैच में हर सेशन के हिसाब से अपनी प्लानिंग करते हैं।

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कप्तानों ने क्या बताया हार-जीत का कारण

अगर हम दोनों कप्तानों की बात सुने तो रोहित ने हार का कारण बल्लेबाजी को ही बताया है। उन्होंने यह भी माना है कि यह सामूहिक तौर पर हमारी विफलता है और हम इस सीरीज से बहुत ज्यादा सीख सकते हैं लेकिन साथ ही रोहित ने माना है कि ऑस्ट्रेलियाई स्पिनरों ने बहुत अच्छी गेंदबाजी की और तेज गेंदबाजों ने भी गजब का काम किया। रोहित का यह बयान बताता है कि जिन पिचों पर स्पिन और तेज गेंदबाजी की मदद मौजूद है वहां आला टीम के खिलाफ भारत के बल्लेबाजों को दिक्कत हो रही है। वही स्टीव स्मिथ ने भी अंतिम मुकाबला जीतने का श्रेय अपने स्पिनरों को दिया है।

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