100वां टेस्ट खेलने वाले भारत के 13वें खिलाड़ी बने पुजारा, नाकामी से उबर कर वापसी की

भारतीय टीम के नंबर 3 के बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा टीम से अंदर-बाहर होते रहे और कई ऐसे मौके आए जब करियर में उनकी प्रतिष्ठा और बल्लेबाजी क्षमता की साख दांव पर लगी।

Cheteshwar Pujara

दिल्ली टेस्ट चेतेश्वर पुजारा के लिए यादगार मैच होगा। वे भारत के 13वें खिलाड़ी होंगे जो 100वां टेस्ट मैच खेल रहे होंगे। पुजारा के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि होगी। सौ टेस्ट मैच खेलना आसान नहीं। भारत के 91 साल के टेस्ट इतिहास में अभी तक केवल 12 खिलाड़ी ही 100 टेस्ट मैच खेल पाये हैं। इस मुकाम पर वही पहुंच सकता है जिसके खेल में निरंतरता हो। सौ फीसदी फिटनेस हो। पिछले एक दो दशक में खिलाड़ी जिस चोटिल हो रहे हैं उससे उनके लगातार खेलने की संभावना कम होती जा रही है। आधुनिक क्रिकेट में इंजरी एक प्रमुख समस्या के रूप में उभरी है। बहरहाल चेतेश्वर पुजारा अपने करियर की धूप-छांव से गुजरते हुए इस मुकाम को हासिल कर चुके हैं।

भारत के 8वें सबसे सफल बल्लेबाज

भारत के 8वें सबसे सफल बल्लेबाज

राहुल द्रविड़ के रिटायर होने के बाद चेतेश्वर पुजारा को भी ‘दीवार' की उपमा दी गयी। वे कॉपी बुक स्टाइल में बैटिंग करते हैं। विकेट पर टिक कर खेलने की क्षमता है। उन्हें टेस्ट मैच के लिए आदर्श बल्लेबाज माना जाता है। उन्होंने 99 टेस्ट मैचों में 44.15 की औसत से 7 हजार 21 रन बनाये हैं जिसमें 19 शतक शामिल हैं। सचिन, द्रविड़, गावस्कर, लक्ष्मण, सहवाग, कोहली, गांगुली के बाद भारत के आठवें सबसे सफल बल्लेबाज हैं। वे 13 साल से भारत के लिए क्रिकेट खेल रहे हैं।

डेब्यू टेस्ट की दूसरी पारी में 72 रन

डेब्यू टेस्ट की दूसरी पारी में 72 रन

पुजारा ने पहले ही टेस्ट मैच में अपनी विश्वसनीय बल्लेबाजी की झलक दिखा दी थी। 2010 में ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच बेंगलुरु में दूसरा टेस्ट मैच खेला गया था। इस मैच की दूसरी पारी में उन्होंने वन डाउन खेलते हुए 72 रन बनाये थे। उस मैच में राहुल द्रविड़ भी खेल रहे थे लेकिन पुजारा वन डाउन खेलने आये थे। कुछ साल बाद यह जगह उनके लिए पक्की हो गयी। पुजारा ने ये रन तब बनाये थे जब भारत को जीतने के लिए चौथी पारी में 207 रनों की जरूरत थी। पुजारा और सचिन के अर्धशतकों की बदौलत भारत ने ये टेस्ट मैच 7 विकेट से जीत लिया था। रिकी पोंटिग की कप्तानी वाली इस मजबूत ऑस्ट्रेलियाई टीम को भारत ने आसानी से हरा दिया था।

एकाग्रता के धनी

एकाग्रता के धनी

चेतेशेवर पुजारा ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ही अपने टेस्ट जीवन की शुरूआत की थी। ये सुखद संयोग है कि वे 100वां टेस्ट भी इसी टीम के साथ खेलने वाले हैं। पिछले साल चेतेश्वर पुजारा की बैटिंग पर पाकिस्तान के विकेटकीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान ने कहा था, मैंने अपनी जिंदगी में उनके जैसी एकाग्रता किसी दूसरे बल्लेबाज में नहीं देखी। 2022 में पुजारा और रिजवान एक साथ ससेक्स के लिए काउंटी क्रिकेट खेल रहे थे। आखिर इतनी एकाग्रता उनमें आती कैसे है ? इसका जवाब उन्होंने खुद दिया, जब मैं विकेट पर होता हूं तो अपने दिमाग को बिल्कुल खाली रखता हूं। पिछल मैच में क्या हुआ ? सामने कौन गेंदबाज है ? इसके बारे में कुछ सोचता ही नहीं। बस यही सोचता हूं कैसे अधिक से अधिक समय तक विकेट पर रहूं।

मेहनत से खेल को निखारा

मेहनत से खेल को निखारा

2010 में भारतीय क्रिकेट टीम दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर गयी थी। पुजारा भी टीम में थे। उस समय दक्षिण अफ्रीका की टीम में डेल स्टेन और मोर्ने मोर्केल जैसे तूफानी तेज गेंदबाज थे। तेज और बाउंसी पिच पर उनकी मारक क्षमता और बढ़ जाती थी। पुजारा का यह पहला विदेश दौरा था। वे तेज और उछाल वाली पिचों पर खुद को संभाल नहीं पाये। इसकी वजह से उनकी बल्लेबाजी नाकाम रही। दूसरे टेस्ट में 19, 10 और तीसरे टेस्टमें 2 रन ही बना सके। तब उन्होंने राहुल द्रविड़ से अपनी परेशानी बतायी कि वे स्टेन और मोर्केल को ठीक से खेल नहीं पा रहे हैं। द्रविड़ ने उन्हें कुछ तकनीकी सलाह दी। उस सलाह पर पुजारा ने खूब मेहनत की। इसके बाद जब वे 2013 में फिर दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर गये तो पूरी तरह बदल चुके थे। पहले टेस्ट में उसी तेज पिच पर उन्होंने 153 रनों की पारी खेली थी। पहला शतक उन्होंने विदेश में बनाया था।

नाकामी से उबर कर वापसी

नाकामी से उबर कर वापसी

जनवरी 2022 में उनके लिए मुश्किल वक्त भी आया। दक्षिण अफ्रीका में खराब प्रदर्शन के बाद उन्हें टेस्ट टीम से बाहर कर दिया गया था। कुछ लोग यह कहने लगे कि अब उनका टेस्ट करियर खत्म हो गया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। टीम से बाहर होने के बाद वे काउंटी क्रिकेट खेलने इंग्लैंड चले गये। ससेक्स की तरफ से खेलते हुए चार मैचों की सात पारियों में उन्होंने 4 शतक लगाये जिसमें से 2 दोहरे शतक थे। 143.40 की औसत से कुल 717 रन बनाये। इस धाकड़ बल्लेबाजी के बाद उनकी उपेक्षा मुश्किल थी। पांच महीने बाद ही उनकी भारतीय टीम में वापसी हो गयी। भारत को इंग्लैंड के खिलाफ एक टेस्ट मैच खेलना था। इस टीम में उन्हें भी शामिल किया गया। ये बुरा वक्त था, बीत गया। अब वे दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में 100 वां टेस्ट मैच खेलने वाले हैं।

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