IND vs AUS: लो जी ! अब तो मिल गया बैटिंग विकेट, खेलो 5 दिन
अब तक खेले गए तीन टेस्ट मैचों में टर्न वाले विकेट देखने को मिले थे, इस बार बल्लेबाजों के लिए मददगार विकेट देखने को मिला है।

IND VS AUS 4th Test: अहमदाबाद का नरेन्द्र मोदी स्टेडियम। भारत ऑस्ट्रेलिया के बीच सीरीज का चौथा और आखिरी टेस्ट मैच। पहले दिन, पहले सेशन के खेल में पिच से स्पिनरों को कोई मदद नहीं मिली। तेज गेंदबाजों को भी कोई स्विंग नहीं मिली। बल्लेबाजी के लिए अनुकूल पिच पर ऑस्ट्रेलिया ने ठोस बल्लेबाजी की। उस्मान ख्वाजा ने शतक बनाया। अब इस पिच पर अश्विन, जडेजा, अक्षर, नाथन लियोन, टॉड मर्फी और मैथ्यू कुहनमेन को अपनी काबिलियत से विकेट लेनी होगी। पिच से चांदी काट चुके इन गेंदबाजों को अब मेहनत करनी होगी। अब तक हुए खेल को देख कर यही लगता है कि मैच चार या पांच दिन तक चल सकता है।
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न स्पिनर चले, न तेज गेंदबाज
पिछले तीन टेस्ट मैचों की पिच पर बहुत हल्ला मचा। टर्निंग ट्रैक है, टर्निंग ट्रैक है का जबर्दस्त शोर-शराबा हुआ। तीनों टेस्ट करीब ढाई दिनों में ही खत्म हो गये थे। लेकिन चौथे टेस्ट मैच में गेंदबाज विकेट के लिए तरसने लगे। भारतीय तेज गेंदबाजों (मोहम्मद शमी और उमेश यादव) ने सीरीज में पहली बार एक दिन में 15 ओवर से अधिक बॉलिंग की। शमी ने दो विकेट लिये थे। इसके बाद भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने 80 ओवर पूरे होने के बाद नयी गेंद ले ली। तब तक ऑस्ट्रेलिया का स्कोर 4 विकेट के नुकसान पर पर 201 रन था। सीरीज में रोहित शर्मा ने पहली बार स्पिनरों की बजाय तेज गेंदबाजों पर भरोसा किया। अगर स्पिनरों पर भरोसा होता तो वे दूसरी नयी गेंद नहीं लेते। यानी अहमदाबाद टेस्ट के पहले दिन स्पिनरों का हौव्वा खत्म हो गया। ऐसा नहीं है कि दूसरी नयी गेंद से तेज गेंदबाजों ने प्रभावित किया। कामरून ग्रीन और ख्वाजा आराम से शमी और उमेश को खेलते रहे।
गेंदबाजी में बार-बार बदलाव
रोहित शर्मा इस असमंजस में फंसे रहे कि तेज गेंदबाजों को तवज्जो देंया स्पिनर को। अश्विन ने 22 ओवर और जडेजा ने 18 ओवर में केवल 1-1 विकेट लिये। अक्षर को 12 ओवर मिले और उन्हें कोई विकेट नहीं मिला। इसके बाद भी रोहित को मजबूरी में फिर स्पिनरों की तरफ आना पड़ा। वह इसलिए क्यों कि दूसरी नयी गेंद पर तेजी रन बनने लगे थे। उमेश ने नयी गेंद से जो पहला ओवर किया था जिसमें 12 रन बने थे। नयी गेंद से अभी तीन ओवर ही हुए थे कि अश्विन मोर्चे पर लग गये। इसके बाद एक तरफ से स्पिनर और एक तरफ से तेज गेंदबाज (मोहम्मद शमी) विकेट की तलाश में लग गये। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इस प्रयोग के बाद भी ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज रन बनाते रहे। फिर 87 वें ओवर में एक और बदलाव हुआ और रवीन्द्र जडेजा को लगाया गया। उन्हें भी कामयाबी नहीं मिली।
ख्वाजा की 14वीं सेंचुरी
उस्मान ख्वाजा ने इस मैच में शतक बना कर ऑस्ट्रेलिया की स्थिति को मजबूत कर दिया। ये ख्वाजा की 14वीं टेस्ट सेंचुरी है। इसके पहले ऑस्ट्रेलिया की तरफ 2015 में किसी सलामी बल्लेबाज (डेविड वार्नर) ने शतक बनाया था। कैमरून ग्रीन ने भी उनका अच्छा साथ दिया। पहले दिन वे 49 रनों पर नाबाद रहे । वे ऑलराउंडर हैं लेकिन इस मैच में उन्होंने एक दक्ष बल्लेबाज की तरह बैटिंग की और आठ चौके लगाये। ख्वाजा और ग्रीन के बीच 116 गेंदों पर 85 रनों की अटूट साझेदारी हुई। पहले दिन का खेल खत्म होने पर ऑस्ट्रेलिया ने 4 विकेट पर 255 रन बनाये।
अंतिम 9 ओवर में 54 रन
आखिरी 9 ओवर में 54 रन बने। इससे पता चलता है कि गेंद नयी हो या पुरानी, इससे बल्लेबाज पर कोई फर्क नहीं पड़ता। विकेट में न तो तेजी है और न ही स्पिन। बॉलर को अपनी कला से विकेट लेनी होगी। लेकिन भारत के बॉलर अभी तक अपनी कला का प्रदर्शन नहीं कर पाये हैं। उस्मान ख्वाजा ने पूरे दिन बैटिंग की और उन्हें कोई आउट नहीं कर पाया। दूसरी तरफ ग्रीन ने तेजी से रन बनाये। इसके पहले इस सीरीज में इतनी बेहतरीन बल्लेबाजी नहीं देखी गयी। भारतीय गेंदबाज अगर नहीं चले तो यह बल्लेबाजों को सावधान रहने की चेतावनी है। उन्हें अब हर हाल में बड़ा स्कोर बनाना होगा, क्यों कि तभी भारत इस मैच में बरकरार रह सकता है। नागपुर के पहले टेस्ट में रोहित शर्मा ने शतक बनाया था। उन्हें फिर ऐसी ही पारी खेलनी होगी। विराट कोहली को भी इस मैच में अपना जलवा दिखाना होगा क्यों कि पिछले तीन टेस्ट मैचों में वे नाकाम रहे हैं।












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