'2015 WC में झटके थे सबसे ज्यादा विकेट फिर सबकुछ बदल गया', उमेश यादव ने याद किया करियर का पतन
नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग के 15वें सीजन का आगाज हो चुका है और अब तक 11 मैच खेले जा चुके हैं। 11 मैचों के दौरान फैन्स को कई रोमांचक मुकाबले देखने को मिले हैं जहां पर धोनी की फॉर्म में वापसी से लेकर उमेश यादव की खतरनाक गेंदबाजी देखने का मौका मिला है। पहले 11 मैचों के बाद सबसे ज्यादा विकेट हासिल करने वाले गेंदबाजों की बात करें तो उमेश यादव इस लिस्ट को टॉप करते नजर आ रहे हैं जिन्होंने 3 मैचों में 8 विकेट हासिल कर लिये हैं और लगातार खतरनाक अंदाज में अपनी टीम को सफलता दिला रहे हैं।

केकेआर की टीम ने पहले 3 मैचों में से 2 में जीत हासिल की है और अच्छी बात यह रही है कि तीनों ही मुकाबलों में कोलकाता नाइट राइडर्स के गेंदबाजों ने अच्छी गेंदबाजी की है, खासतौर से उमेश यादव ने जिन्होंने अब तक खेले गये सभी मैचों के पहले ही ओवर में विकेट निकाली है तो वहीं पर आखिरी मैच में 2013 के बाद पहली बार 4 विकेट हॉल अपने नाम किया।
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बदलावों को समझने में नाकाम रहे थे उमेश
इस बीच कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम ने अपने इस तेज गेंदबाज का एक वीडियो रिलीज किया है जिसमें उमेश यादव ने अपने गेंदबाजी करियर के उस समय का खुलासा किया, जहां पर उनका पतन शुरू हुआ। उमेश यादव ने बताया कि कैसे वो 2018 तक भारतीय टीम में वापसी करने के दावेदार थी लेकिन एक घटना ने न सिर्फ उनकी वापसी के रास्ते बंद कर दिये बल्कि 2019 विश्वकप की टीम की दावेदारी भी खत्म कर दी। उमेश यादव ने अपने करियर के पतन को याद करते हुए इस बात को स्वीकार किया कि 2015 विश्वकप के बाद वो अपने आस-पास के बदलावों को एडाप्ट कर पाने में नाकाम रहे थे।

2015 विश्वकप के बाद अचानक बदल गया सबकुछ
2015 विश्वकप के दौरान उमेश यादव ने बेहतरीन गेंदबाजी की थी और 8 मैचों में 17.38 की औसत और 21.4 की स्ट्राइक रेट से 18 विकेट हासिल कर सबसे ज्यादा विकेट चटकाने वाले भारतीय गेंदबाज बने थे। वहीं ओवर ऑल मामले में ट्रेंट बोल्ट (22) और मिचेल स्टार्क (22) के बाद दूसरे पायदान पर काबिज थे। उल्लेखनीय है कि उमेश यादव ने अपने इस प्रदर्शन के साथ ही आईसीसी वनडे विश्वकप में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले दूसरे भारतीय गेंदबाज का रिकॉर्ड अपने नाम किया था और रोजर बिन्नी (1983 विश्वकप, 18 विकेट) के साथ संयुक्त रूप से इस पायदान पर काबिज हैं। इस फेहरिस्त में जहीर खान (2011 विश्वकप, 21 विकेट) टॉप पर काबिज हैं।

अचानक बदल गई सारी चीजें
हालांंकि 2015 विश्वकप के बाद से उमेश यादव लगातार टीम से अंदर बाहर होते रहे और 2019 विश्वकप से पहले पूरी तरह से टीम से बाहर हो गये थे। भारतीय क्रिकेट टीम में अपनी जगह गंवाने पर बात करते हुए उमेश यादव ने कहा,'सीमित ओवर्स प्रारूप में मेरे क्रिकेट का असली करियर 2014 में शुरू हुआ था। मुझे काफी बुरा लगा था जब मैंने अपने करियर का पतन देखा और मैं लगातार टीम से अंदर बाहर हो रहा था। लोगों ने अचानक ही यह कहना शुरू कह दिया कि मैं सफेद बॉल प्रारूप का गेंदबाज नहीं हूं। और फिर जब वो होना शुरू हुआ तो मुझे समझ नहीं आया कि अचानक से चीजें कैसे बदल गई, अभी एक साल पहले तक मैं विश्वकप में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाला गेंदबाज था और अचानक ही सब कुछ बदल गया।'

6 साल बाद टी20 में हुई वापसी पर फिर खो दी जगह
गौरतलब है कि 2018 में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर की ओर से शानदार प्रदर्शन करने के बाद उमेश यादव को भारत की टी20 टीम में 6 साल बाद वापसी करने का मौका मिला लेकिन उन्होंने अचानक ही अपनी जगह को खो दिया। हालांकि इंडियन प्रीमियर लीग के 15वें सीजन में उमेश यादव एक नये अंदाज में नजर आ रहे हैं। पिछले सीजन वो दिल्ली की टीम में थे लेकिन उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला था लेकिन इस सीजन उन्होंने जबरदस्त वापसी की है।

भारत के लिये खेलने का सपना भी नहीं देखा था
उन्होंने कहा,'जहां से मैं आता हूं, वहां पर बहुत कम लोग ही इस बात पर विश्वास करते थे कि मैं कभी भारत के लिये खेल पाउंगा। वहां पर क्रिकेट खेलना और उसके सपने देखना दोनों ही काफी महंगे हैं। किट, बैट, पैड, जूते सबकुछ..आप यह सब नहीं कर सकते क्योंकि आप कोयले की खदान में रहते हैं, आपके पिता कोयले की खदान में हर रोज जाकर मेहनत करते हैं। उस वक्त मैंने भी कभी इस बारे में नहीं सोचा और भारत के लिये खेलना मेरी कल्पना से भी परे था।'












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