'कप्तान भी मस्त था, ना प्रेशर था ना कोई ड्रामा', हरभजन सिंह ने बताए करियर के बेस्ट दो साल
Harbhajan Singh: पूर्व ऑफ स्पिनर का मानना है कि क्रिकेट खेलने के उनके "बेस्ट साल" भारतीय जर्सी के साथ नहीं थे बल्कि वे बाद में आए जब हरभजन सिंह ने एक ऐसे कप्तान के अंडर में खेला जिसके अंडर में उनको कोई दबाव नहीं रहा।

21वीं सेंचुरी में भारतीय क्रिकेट टीम ने काफी सफलताएं देखी हैं जहां 2022 में चैम्पियंस ट्रॉफी में संयुक्त तौर पर विजेता का खिताब जीतन से शुरुआत की गई। अगले ही साल वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचे और टी20 के आने के बाद तो 2007 का वर्ल्ड कप भी जीत लिया गया। ये कप धोनी की कप्तानी में खेला गया और टीम युवा थी। इसके बाद धोनी की ही कमान में और बड़ा वर्ल्ड कप 2011 मे आया। दोनों ही बार हरभजन सिंह टीम के अहम सदस्य थे। टेस्ट क्रिकेट में वे कुंबले के साथ अपनी मजबूत जोड़ी बना चुके थे और भारत रेड बॉल फॉर्मेट में भी बहुत सफलता मिली।
लेकिन भज्जी के करियर के सबसे बेहतरीन साल इसके भी कुछ समय बाद 2018 और 2019 में आए जब वे चेन्नई सुपर किंग्स में महेंद्र सिंह धोनी की कमान में खेले। हरभजन का कहना है कि वो समय उनके करियर का बेस्ट टाइम था। उनका कहना है कि धोनी के अंडर में सीएसके को खेलना कुछ अलग अहसास था। हरभजन ने स्टार स्पोर्ट्स से बात करते हुए कहा, वे दो साल मेरे क्रिकेट के बेस्ट थे। अविश्वसनीय। ना कोई दबाव ना कोई ड्रामा। आपको बस जाना होता था और खेलना होता था। रिजल्ट की कोई टेंशन नहीं थी। हार भी गए तो भी दिक्कत नहीं थी। बहुत मजेदार समय था। हर कोई साथ था, ना केवल खिलाड़ी बल्कि परिवार भी। हम भारत में एक साथ घूमते रहते थे और बड़ा मजा आता था।
हरभजन ने इस तनावमुक्त माहौल में 2018 में सीएसके के लिए ट्रॉफी उठाई। आईपीएल में वे आखिरी बार 2021 में खेले जब उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स को रिप्रजेंट किया लेकिन उनके लिए सीएसके का वो खेमा और समय हमेशा यादगार रहेगा। सीएसके टीम में अब भी धोनी कप्तान हैं लेकिन इस बात को लेकर लगभग पूरा यकीन है कि आईपीएल 2023 धोनी का कप्तान और खिलाड़ी के तौर पर अंतिम सीजन होने जा रहा है। हालांकि वो सीएसके के साथ आगे भी किसी ना किसी रूप में जुड़े रहना चाहेंगे।












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