युवराज-सहवाग के साथ दोबारा विश्वकप न खेल पाने पर हरभजन ने तोड़ी चुप्पी, कहा- आज तक जवाब नहीं मिला

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे बड़े स्पिनर्स की बात करें तो टर्बनेटर के नाम से मशहूर ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह का नाम जरूर आता है, जिन्होंने भारत को 2007 का टी20 विश्वकप और 2011 वनडे विश्वकप जिताने में अहम भूमिका निभाई थी। टेस्ट क्रिकेट में 400 से ज्यादा विकेट हासिल करने वाले हरभजन सिंह ने हाल ही में क्रिकेट के हर प्रारूप को अलविदा कह दिया है। वह 2016 के बाद से भारत के लिये अंतर्राष्ट्रीय मैच का हिस्सा नहीं बने हैं लेकिन आईपीएल में नियमित रूप से खेलते नजर आ रहे थे, हालांकि जब 2021 के सीजन में उन्हें सिर्फ एक ही मैच में खेलने का मौका मिला तो उन्होंने संन्यास लेने का फैसला कर लिया।
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संन्यास का ऐलान करने के बाद से हरभजन सिंह अपने करियर के बड़े विवाद पर खुलकर बात करते नजर आ रहे हैं। इस बीच हरभजन सिंह ने 2011 विश्वकप के मैच विनर रहे युवराज सिंह, जहीर खान, वीरेंदर सहवाग और गौतम गंभीर के साथ दोबारा विश्वकप नहीं खेल पाने को लेकर चुप्पी तोड़ी है और कहा कि मुझे आज तक इस सवाल का जवाब नहीं मिला है।
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साथ न खेल पाने के सवाल का जवाब आज तक नहीं मिला
हरभजन को अपने करियर में इन दिग्गज खिलाड़ियों के साथ 2015 विश्वकप में दोबारा खेल पाने का मौका नहीं मिल पाने का मलाल है। 2015 विश्वकप की टीम से खुद को बाहर किये जाने की बात को याद करते हुए हरभजन ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में खेले गये इस टूर्नामेंट के दौरान मैं और बाकी के चारों खिलाड़ी फिट थे, लेकिन मुझे आज तक इस सवाल का जवाब बीसीसीआई से नहीं मिला कि हमें बाहर क्यों किया गया।
न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए हरभजन ने कहा,'युवराज सिंह और वीरेंदर सहवाग जैसे साथी खिलाड़ियों के साथ एक और विश्वकप खेलना काफी शानदार होता। जब मैंने 400 टेस्ट विकेट पूरे किये थे तब 2011 में मैं सिर्फ 31 साल का था। 31 की उम्र में मैं काफी अच्छा कर रहा था और टीम में खेल रहे कई प्लेयर्स से ज्यादा फिट था। 2011 विश्वकप के बाद चीजें हमारे हिसाब से नहीं गई। मुझे नहीं पता कि क्या हुआ और कौन इसके पीछे था लेकिन जो भी था वो जा चुका है। अब इस बारे में बात करके कोई फायदा नहीं है। लेकिन हां अगर वीरू, युवी और गंभीर के साथ एक विश्वकप और खेलने का मौका मिल पाता तो काफी अच्छा होता। हम सभी खिलाड़ी 2015 विश्वकप का हिस्सा बनने के लिये फिट थे जो कि हुआ नहीं, कुछ चीजें हमारे हाथ में नहीं होती।'

2015 विश्वकप में मिलना चाहिये था साथ खेलने का मौका
हरभजन सिंह ने आगे बात करते हुए कहा कि मैं बस इतना कहना चाहूंगा कि हमें बीसीसीआई की तरफ से जो भी मौके मिले और भारतीय क्रिकेट के लिये हम जो भी हासिल कर सके हम उसके ताउम्र शुक्रगुजार रहेंगे। हमें भारत का प्रतिनिधित्व करने पर गर्व है।
उन्होंने कहा,'मैं खुद को मिले मौकों के लिये शुक्रिया कहना चाहता हूं। 2102, 2013 और 2014 को लेकर लोग अक्सर यह सवाल करते हैं कि जिन खिलाड़ियों ने विश्वकप जीता वो एक साथ फिर क्यों खेलते नजर नहीं आये। इस सवाल का जवाब मेरे पास नहीं है, मुझे नहीं पता कि इसका जवाब कौन दे सकता है लेकिन मुझे लगता है कि आपको बीसीसीआई से पूछना चाहिये। आपको उस समय की बीसीसीआई में कार्यरत लोगों से पूछना चाहिये कि 2011 के विश्वकप में जीत के बाद ये खिलाड़ी एक साथ क्यों नहीं खेले। ऐसा नहीं था कि हम सभी 30 के आखिरी सालों में थे। हम कुछ समय पहले ही 30 की उम्र को पार किया था, मैं 31 का था, वीरू भी 31-32 की उम्र में था जबकि युवी 29-30 के दौर में था। लेकिन हमें दोबारा साथ में दूसरा विश्वकप खेलने का मौका नहीं मिला।'

हरभजन ने बताया करियर का सबसे खास लम्हा
गौरतलब है कि हरभजन सिंह ने अपने करियर के दौरान भारत को कई ऐतिहासिक जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई जिसमें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2001 में खेली गई टेस्ट सीरीज में कोलकाता पर हासिल की गई जीत भी शामिल है। इस मैच में हरभजन ने हैट्रिक चटकाई थी लेकिन जब उनके करियर का सबसे बेहतरीन लम्हा पूछा गया तो उन्होंने 2011 विश्वकप चुना।
उन्होंने कहा,'मेरे लिये इस बात का चयन कर पाना काफी मुश्किल है। जाहिर सी बात है कि आपको बस एक लम्हा चुनना है लेकिन घर पर 2011 विश्वकप जीतने से बेहतर कुछ भी नहीं हो सकता। एक क्रिकेटर के तौर पर मैं ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घर पर खेली गई सीरीज में मिली कामयाबी को भूलना नहीं चाहता जिसमें मैंने 32 विकेट हासिल किये और हैट्रिक लेने वाला पहला भारतीय टेस्ट गेंदबाज बना। उस सीरीज ने मुझे काफी आत्मविश्वास दिया और मैं उस तरह से गेंदबाजी कर सका जिसके लिये आप सभी जानते हैं। मैंने 2007 का विश्वकप खेला और जीता जो कि मेरे लिये काफी खास लम्हा है पर 2011 विश्वकप की जीत सबसे खास है। यह सभी लम्हें मेरे दिल के करीब रहेंगे।'












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