Fifa World Cup : जापान में फुटबॉल की प्रगति बेमिसाल, 3 बार पहुंचा अंतिम 16 में
जापान सातवीं बार विश्वकप फुटबॉल प्रतियोगिता खेल रहा है। दक्षिण कोरिया के बाद किसी एशियाई देश का यह दूसरा सर्वाधिक प्रतिनिधित्व है। जापान की फीफा वर्ल्ड रैंकिंग 24 है। एशिया में वह ईरान (20) के बाद दूसरे स्थान पर है। वह एशिया का पहला देश है जिसने ओलम्पिक में फुटबॉल का कोई पदक जीता। 1968 के ओलम्पिक में जापान ने मैक्सिको को 2-0 से हरा कर कांस्य पदक जीता था। जापान की यह कामयाबी चमत्कारी थी। इसके 44 साल बाद लंदन ओलम्पिक में एशिया के दो देश सेमीफाइनल में पहुंचे- जापान और दक्षिण कोरिया। कांस्य पदक के मुकाबले में दक्षिण कोरिया ने जापान को 2-0 से हरा दिया था। इस तरह कोरिया ओलम्पिक फुटबॉल मेडल जीतने वाला एशिया का दूसरा देश बना था। 2022 के विश्वकप फुटबॉल में जापान ग्रुप ई में है। इस ग्रुप की अन्य टीमें हैं जर्मनी, स्पेन और कोस्टारिका। जापान का पहला मैच 23 नवम्बर को जर्मनी से है।

बेमिसाल जापान
जापान में फुटबॉल की प्रगति बेमिसाल है। कम समय में कैसे फुटबॉल के खेल को विकसित किया सकता है, यह जापान से सीखा जा सकता है। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जापान पुनर्निर्माण के दौर से गुजर रहा था। दो एटम बम की विभीषिका झेलने वाला जापान पूरी तरह बर्बाद हो चुका था। फुटबॉल भी इससे अछूता नहीं था। जापान को जीवन के हर क्षेत्र में नयी शुरुआत करनी थी। नये संसाधन खड़े करने थे। उसने अपने नागरिकों की प्रबल इच्छा शक्ति और मेहनत के बल पर नवनिर्माण की तरफ कदम बढ़ाया। विकास का नय़ा ढांचा खड़ा हुआ तो देश की प्रगति के साथ फुटबॉल भी आगे बढ़ा। महाविनाश के छह साल बाद (1951) नयी दिल्ली में पहला एशियाई खेल हुआ। इस एशियन गेम्स की फुटबॉल प्रतियोगिता में जापान ने कांस्य पदक जीत कर अपनी जीवटता साबित कर दी थी। फिर वह जल्द ही एशिया में फुटबॉल की महाशक्ति बन गया।
जापान के बहाने भारत का जिक्र
फुटबॉल में मेहनत की बात निकली है तो जापान के बहाने भारत का जिक्र भी किया जा सकता है। 1951 के एशियन गेम्स में फुटबॉल का गोल्ड मेडल भारत ने जीता था। भारत ने फाइनल में ईरान को 1-0 स हरा कर स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद जापान ने अफगानिस्तान को 2-0 से हरा कर कांस्य पदक जीता। उस समय एशिया में भारतीय फुटबॉल का स्थान बहुत ऊंचा था। भारत ईरान और जापान से भी बेहतर था। तब भारत में एशिया की सबसे पुरानी फुटबॉल प्रतियोगिता (डुरंड कप) खेली जाती थी। लेकिन विडम्बना देखिए कि जापान और ईरान फुटबॉल में आगे बढ़ते गये और भारत अपनी पहचान खोता चला गया। भारत की हालत उस राजा की तरह है जो अपनी बदइंतजामी के कारण कंगाल हो गया। एशियन गेम्स में फुटबॉल का पहला गोल्ड मेडल जीतने वाले भारत का आज कोई वजूद नहीं जब कि कांस्य पदक जीतने वाला जापान सातवीं बार विश्वकप खेल रहा है।
2002 के विश्वकप में जापान ने रूस को हराया था
जापान ने पहली बार 1998 में फीफा विश्वकप के लिए क्वालिफाई किया था। पहली बार ही इसने दुनिया की दिग्गज टीम अर्जंटीना को चौंका दिया था। अर्जेंटीना मुश्किल से जापान को 1-0 से हरा पाया था। क्रोएशिया को भी जापान को हराने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। वह भी केवल एक गोल से ही जीत पाया। 2002 के विश्वकप में जापान मेजबान था। इसने पहले मैच में ही बेल्जियम को 2-2 पर रोक कर तहलका मचा दिया था।(बेल्जियम अभी दुनिया की नम्बर दो टीम है)। इसके बाद जापान ने रूस को 1-0 से हरा कर एक बड़ा धमाका किया। तीसरे मैच में जापान ने ट्यूनिशिया को 2-0 से हरा कर सात अंक बटोरे और अपने ग्रुप में शीर्ष पर रहा। जापान अंतिम 16 में पहुंचा। इस दौर में उसका मुकाबला तुर्की से हुआ जिसमें वह 0-1 से हार गया। इस तरह जापान का सफर यहीं खत्म हो गया।
जापान 3 बार अंतिम 16 में
2002 के बाद जापान 2010 और 2018 के विश्वकप में भी अंतिम 16 में पहुंचा था। 2010 के विश्वकप फुटबॉल में जापान ने डेनमार्क को 3-1 से हरा कर बड़ा उलटफेर किया था। ( अभी डेनमार्क की वर्ल्ड रैंकिंग 10) इसके पहले उसने कैमरून को 1-0 से हराया था। नीदरलैंड से वह एक गोल से हार गया था। जापान ने फिर अंतिम 16 में जगह बनायी लेकिन वह पराग्वे से पेनल्टीशूटआउट में 3-5 से हार गया। 2018 में जापान ने कोलंबिया को 2-1 से हरा कर एक बड़ी जीत हासिल की थी। सेनेगल से ड्रा खेला। पौलैंड से वह 0-1 से हार गया। अंतिम 16 में जगह बनाने के बाद जापान का बेल्जियम से मुकाबला हुआ। इस मैच में वह 2-3 से हार गया था।












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