'खुद कौन सा आइकन की तरह बर्ताव कर रहे हो', कोहली-गंभीर को नसीहत देने पर फैंस ने लगाई सहवाग की क्लास
कोहली और गौतम गंभीर को नसीहत देने वाले वीरेंद्र सहवाग और सुनील गावस्कर जैसे दिग्गजों को फैंस ने नसीहत दे दी है कि पहले अपने गिरेबान में झांक लेना चाहिए कि हम खुद आइकन वाला बर्ताव कर रहे हैं या नहीं।

आईपीएल के एक मुकाबले में विराट कोहली और गौतम गंभीर (Virat Kohli vs Gautam Gambhir) के बीच की कहासुनी इतनी बढ़ गई कि कई क्रिकेट एक्सपर्ट और पूर्व क्रिकेटरों को भी मामले में कूदना पड़ा। ऐसे ही भारत के पूर्व बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग (Virender Sehwag) ने इस घटना की आलोचना करते हुए विराट कोहली और गौतम गंभीर को आइकन बताया था।
सहवाग पर सवाल- सहवाग ने क्रिकबज पर एक शो के दौरान कहा कि देश के बच्चे अपने आइकन को फॉलो करते हैं इसलिए ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए। विराट कोहली और गौतम गंभीर को आइकन बताए जाने के बाद वीरेंद्र सहवाग के ऊपर भी सवाल उठ खड़े हो गए हैं।
सहवाग ने खुद अपने बच्चों का ही हवाला देते हुए कहा था कि, मेरे बच्चे यह जानते हैं कि 'बेन स्टोक्स' का मतलब क्या है। यहां वीरेंद्र सहवाग विराट कोहली द्वारा कई बार दी जाने वाली गाली की ओर इशारा कर रहे थे जिसके जिसका उच्चारण बेन स्टोक्स की तरह से होता है। सभी जानते हैं यह गाली क्या है।
कमला पसंद का ऐड नहीं आया पसंद- सहवाग द्वारा यह कहने के बाद, कि जो आइकन करते हैं वही बच्चे फॉलो करते हैं, क्रिकेट फैंस भड़क गए। सहवाग पर गुस्सा होने की सबसे बड़ी वजह उनके द्वारा किया गया कमला पसंद विज्ञापन निकली। आईपीएल 2023 के दौरान यह विज्ञापन खूब प्रसारित हो रहा है।
गावस्कर भी हैं साथ में- यह भारत का एक तंबाकू ब्रांड है जिसमें सहवाग और इंडियन क्रिकेट लीजेंड सुनील गावस्कर साथ नजर आते हैं और इस विज्ञापन के जरिए पान मसाला को बढ़ावा दे रहे हैं। फैंस का साफ कहना है कि इस लॉजिक से तो आपको भी इस तरह के विज्ञापन नहीं करने चाहिए।
इस विज्ञापन में सहवाग नए जमाने को और गावस्कर पुराने जमाने को रिप्रजेंट कर रहे हैं। दोनों का कहना है कि कोई भी पीढ़ी हो, वह कमला पसंद को पसंद करती है। फैंस के रिएक्शन आप यहां पर देख सकते हैं कि किस तरीके से सोशल मीडिया के यूजर वीरेंद्र सहवाग से खफा है। सहवाग द्वारा किए जा रहे पान मसाला का ऐड उनके गले नहीं उतर रहा है।
मजेदार बात यह है कि सुनील गावस्कर ने भी कोहली और गंभीर की बहस के बाद बाद कहा था की मैच फीस का 100% जुर्माना पर्याप्त नहीं है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बीसीसीआई को बैन भी लगाना चाहिए। कुछ मैचों का बैन लगेगा तो भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी।
क्रिकेट फैंस ने इसको एक अजीब विडंबना के तौर पर बताया है कि दूसरों को नसीहत देने वाले खुद नहीं देखते कि वह कैसा आचरण कर रहे हैं और बच्चों में क्या संदेश पहुंचा रहे हैं।












Click it and Unblock the Notifications