Interview: यशस्वी जायसवाल ने कैसे संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी, कोच आरिफ हुसैन ने खोले कई राज
Interview with Yashasvi Jaiswal's Childhood coach: सिर्फ 22 साल की उम्र में यशस्वी जायसवाल आज भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रतिभाशाली युवाओं में गिने जाते हैं। लेकिन उनके यहां तक के पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा है। यशस्वी जायसवाल के बचपन के कोच आरिफ हुसैन ने वनइंडिया से खास बातचीत की है। उन्होंने बताया कि भदोही में क्रिकेट खेला जा रहा था, लेकिन यहां अकादमी नहीं थी। मैने क्रिकेट की शुरुआत साल 1996 में किया। लेकिन साल 2001 में मैंने एक क्रिकेट अकादमी खोलने का फैसला किया। वहां हमने नेट प्रैक्टिस के लिए कुछ जगहें चुनी और अकादमी बनाने का पूरा इंतजाम किया।
भदोही से इंडियन खिलाड़ी बनाने की ख्वाहिश
आरिफ हुसैन ने वनइंडिया को बताया कि उनका सपना भदोही से किसी खिलाड़ी को भारत के लिए खेलते देखना था। साल 2004 के दौरान हमें एक बड़ा ग्राउंड मिला। फिर ये क्रिकेट अकादमी चलना शुरू कर दिया। यशस्वी जायसवाल ने साल 2007 को अकादमी ज्वॉइन किया था। जायसवाल निडर होकर बल्लेबाजी करते थे और सभी गेंदबाजों को हुक और पुल शॉट मारा करते थे। उसे देखकर ऐसा लगता था कि वह कोई अलग ही टैलेंट है।

यूपी छोड़ मुंबई क्यों आए जायसवाल
साल 2010 के दौरान यूपी अंडर ट्रायल में यशस्वी जायसवाल फाइनल में चूक गए। मुझे इसके बाद लगा कि जायसवाल को मुंबई भेज देना चाहिए। मुंबई के आजाद मैदान में भी आरिफ हुसैन का एक अकादमी था जहां उन्होंने जायसवाल को भेजा। लेकिन उनका यह अकादमी कुछ समय बाद कुछ वजह से बंद हो गया। इसके बाद उन्होंने नाला सपोरा में एक फ्लैट लिया। जहां जायसवाल लंबे समय तक रहे थे। इसके बाद वह कुछ दिन आजाद मैदान के टैंट में रहे। जिसके बाद वह ज्वाला सिंह के अंदर कोचिंग में गए।
कम उम्र में ही सीनियर टीम में मिलने लगी जगह
आरिफ हुसैन के मुताबिक जायसवाल को बहुत कम उम्र में ही सीनियर टीम में जगह दी जाने लगी थी। उन्होंने कहा कि गांव के टूर्नामेंट 8-12 ओवर का होता था, तो यहां वह ओपनिंग नहीं करते थे। यूपी में उसका खेल देखने के बाद बड़ी टीमों में उन्हें मौका मिलने लगा। यूपी में वह जिस दबाव के तहत खेल चुका था, ऐसे में मुंबई में खेलना उसके लिए आसान हो गया था।
इस वजह से टैंट में रहे जायसवाल
हम लोग स्ट्रगल कर रहे थे हमारे पास इतना पैसा नहीं था कि उसे वीआईपी ट्रीटमैंट दे सकें। अकादमी बंद होने के बाद वह टैंट में रहा जहां उनसे मैं मिलने जाया करता था। एक बार उसने मुझसे कहा कि आरीफ भाई यहां भीड़ बहुत है तो मैंने उसे समझाया ये लोग कोहरे की तरह हैं जैसे जैसे तू आगे जाएगा कोहरा छटता जाएगा। जायसवाल के लिए क्राउड फंडिंग भी की गई थी।
बीसीसीआई से आरिफ की गुजारिश
जायसवाल के प्लेयर बनने से भदोही काफी बदल गया है। पहले यहां एक अकादमी था अब यहां 10-11 अकादमी बन गए हैं। यशस्वी के भाई तेजस्वी भी क्रिकेट खेलते हैं। तेजस्वी 100 प्रतिशत मेरा प्रोडक्ट है। किसी भी प्लेयर को एक इंसान नहीं बनाता है। बीसीसीआई से मैं गुजारिश करना चाहूंगा कि उन्हें ये पता लगाना चाहिए कौन सी अकादमी से कौन सा क्रिकेट आया है, ऐसी अकादमी की मदद भी करना चाहिए।












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