रोमांच की पराकाष्ठा: जब अफगानिस्तान से हारते-हारते बची थी टीम इंडिया

नई दिल्ली, 18 जुलाई। भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 और एकदिवसीय श्रृंखला जीत ली। एजबेस्टन टेस्ट हारने के बाद भारत की यह जबर्दस्त वापसी है। भारत की यह कामयाबी उसके टी-20 वर्ल्ड कप अभियान में संजीवनी साबित होगी। सीमित ओवरों के मैच में भारत ने शानदार प्रदर्शन किया है। इंग्लैंड की टीम अभी वनडे की विश्वविजेता है। उसके पास बटलर, बेयरेस्टो, रूट, बेन स्टोक्स जैसे दिग्गज खिलाड़ी हैं। इस टीम को हराना सचमुच बड़ी कामयाबी है। हालांकि भारत के रास्ते में अभी भी कई बड़ी चुनौतियां है।

Asia Cup 2018 when Team India returned in the cricket match

टी-20 विश्व कप से पहले भारत को एशिया कप में अपनी क्षमता साबित करनी होगी। 2018 का एशिया कप वनडे फॉरमेट में हुआ था। लेकिन 2022 का एशिया कप टी-20 फॉरमेट में होगा। एक मैच भारत-पाकिस्तान के बीच होगा जिसका असर आने वाले मैचों पर पड़ेगा। टी-20 अंतर्राष्ट्रीय मैचों का स्तर अब इतना ऊपर उठ चुका है कि अफगानिस्तान जैसी टीम भी किसी के लिए खतरे की घंटी बजा सकती है। इसलिए इंग्लैंड में मिली कामयाबी पर कोई खुशफहमी नहीं पालनी चाहिए। 2018 के एशिया कप में भारत, अफगानिस्तान से हारते-हारते बचा था। चरम रोमांच के बीच खेला गया यह मैच अंत में टाई पर खत्म हुआ था।सांस रोक देने वाले इस मैच में खेल ने कई रंग बदले। अफगानिस्तान ने क्या जबर्दस्त खेल दिखाया था।

अफगानी बल्लेबाजों ने भारतीय बॉलरों की बखिया उधेड़ी

अफगानी बल्लेबाजों ने भारतीय बॉलरों की बखिया उधेड़ी

25 सितम्बर 2018 को दुबई में भारत और अफगानिस्तान के बीच मैच शुरू हुआ। एशिया कप के सुपर फोर का ये पांचवां मैच था। अफगानिस्तान ने पहले खेलते हुए पचास ओवर में 8 विकेट पर 252 रन बनाये। मोहम्मद शहजाद ने तूफानी पारी खेली और 116 गेंदों पर 124 रन बनाये। इस पारी में शहजाद ने 11 चौके और 7 छक्के ठोके थे। उसने अकेले ही भारतीय गेंदबाजी की बखिया उधेड़ दी। स्पिनर मोहम्मद नबी ने भी विस्फोटक पारी खेली। 56 गेंदों पर 64 रन बनाये जिसमें 3 चौके और 4 छक्के शामिल थे। धोनी भारत के कप्तान थे। भारत की तेज गेंदबाजी खलील अहमद, दीपक चाहर और सिद्दार्थ कौल संभाल रहे थे। रवीन्द्र जडेजा और कुलदीप यादव स्पिन आक्रमण पर थे। अफगानिस्तान ने भारत के खिलाफ सम्मानजनक स्कोर खड़ा किया।

हार के कगार पर पहुंच गया था भारत

हार के कगार पर पहुंच गया था भारत

इसके जवाब में भारत की शुरुआत बहुत शानदार रही। पहले विकेट के लिए केएल राहुल और अंबाती रायडू ने 17.1 ओवर में ही 110 रन जोड़ दिये। दोनों ने अर्धशतक लगाये। इसके बाद दिनेश कार्तिक ने भी 44 रनों की अच्छी पारी खेली। जीत आसान लग रही थी। लेकिन धोनी और मनीष पांडेय के 8, 8 रन पर आउट होने का बाद मैच का रूख बदलने लगा। 205 के स्कोर दिनेश कार्तिक छठे विकेट के रूप में आउट हुए तो भारत पर दवाब बढ़ गया। 245 के स्कोर पर जब 9वां विकेट गिर गया तो भारत पर हार का खतरा मंडराने लगा। जिस अफगानिस्तान को कमजोर टीम माना जा रहा था उसने भारत को दिन में तारे दिखा दिये। 49 ओवर का खेल खत्म हुआ तो भारत का स्कोर था 9 विकेट पर 246 रन। अंतिम ओवर में भारत को जीतने के लिए 7 रन चाहिए थे जब कि अफगानिस्तान को जीत के लिए सिर्फ एक विकेट चाहिए था। उस समय रवीन्द्र जडेजा 30 गेंदों पर 20 रन बना कर क्रीज पर मौजूद थे। खलील अहमद के रूप में आखिरी बल्लेबाज उनका साथ दे रहे थे। सांस रोक देने वाला नजारा था। रोमांच अपने चरम पर था। सबकी धड़कन बढ़ी हुई थी कि मैच किस करवट बैठेगा।

आखिरी ओवर की चार गेंदों का रोमांच

आखिरी ओवर की चार गेंदों का रोमांच

अफगानिस्तान के राशिद खान को करिश्माई खिलाड़ी माना जाता है। उनकी स्पिन गेंदबाजी की दुनिया भर में धाक है। राशिद ने इस मैच में दिखाया कि क्यों उन्हें बेहतरीन रिस्ट स्पिनर माना जाता है। टारगेट को बचाने के लिए कोई स्पिनर आखिरी ओवर करे, ये बहुत बड़ा फैसला था। रवीन्द्र जडेजा लंबे हिट्स लगाने में सक्षम थे। फिर भी राशिद को खुद पर बहुत भरोसा था। उन्होंने पहली गेंद जडेजा को डाली। जडेजा ने इस गेंद को मिडविकेट की तरफ खेला लेकिन रन के लिए नहीं दौड़े। वे खलील को स्ट्राइक नहीं देना चाहते थे। दूसरी गेंद पर जडेजा ने चौका मारा। तीसरी गेंद पर जब जडेजा ने एक रन ले लिया तो सभी लोग हैरान रह गये। क्यों कि अब जीतने के लिए सिर्फ 3 रन बनाने थे। अगर जडेजा ये रन नहीं लेते तो उन्हें अभी और तीन गेंदें खोलने को मिलतीं। लेकिन जडेजा ने एक रन लेकर गलती कर दी। जब कि पहली गेंद पर उन्होंने रन लेने से इंकार कर दिया था। अंतिम ओवर की चौथी गेंद खलील अहमद को खेलनी थी।

दो गेदों में 1 रन चाहिए था लेकिन....

दो गेदों में 1 रन चाहिए था लेकिन....

राशिद जैसे धाकड़ स्पिनर के सामने खलील थे। कुछ भी हो सकता था। एक पल के लिए हार सामने खड़ी थी। राशिद ने अपनी तरफ से जीत की पूरी कोशिश की थी। जबर्दस्त गुगली डाली थी। लेकिन खलील की किस्मत अच्छी थी कि गेंद उनके बल्ले का अंदरुनी किनारा लेकर फाइन लेग की तरफ चली गयी। खलील जान लगा कर एक रन के लिए दौड़ गये। अब तक छह रन बन चुके थे और स्कोर बराबर (252) हो चुका था। अब भारत को जीत के लिए 2 गेंदों पर 1 रन बनाना था। स्ट्राइक पर जडेजा थे। लक्ष्य मुश्किल न था। लेकिन राशिद को यूं ही तो स्पिन का जादूगर नहीं कहा जाता। उन्होंने पांचवीं गेंद पर जडेजा को स्पिन के जाल में फंसाया और वे कैच आउट हो गये। भारत का आखिरी विकेट गिरते ही ये मैच टाई हो गया। इस मैच ने कई रंग बदले। भारत जीत भी सकता ता। हार भी सकता था। लेकिन नतीजा बराबरी पर खत्म हुआ।

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