खत्म हो सकता है भारत का 73 साल का इंतजार, पहली बार मिला है थॉमस कप जीतने का मौका
नई दिल्ली। भारत में जब भी खेल की बात होती है तो क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसके दीवानगी हर जगह देखने को मिलती है, हालांकि पिछले कुछ सालों में बैडमिंटन ने भी लोगों के बीच अपनी खास जगह बनाई है। पिछले कुछ सालों में भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है और ओलंपिक से लेकर कई बड़े टूर्नामेंट में खिताब जीतकर भारत का परचम लहराया है। हालांकि इसके बावजूद कुछ ऐसे टूर्नामेंट रहे हैं जिसमें भारत का इतिहास रचना बाकी है।

ऐसा ही एक टूर्नामेंट थॉमस कप है जिसकी शुरुआत 73 साल पहले 1949 में हुई थी। बैडमिंटन खिलाड़ियों के लिये बीडबल्यूएफ चैम्पियन्शिप है जिसे विश्वकप के बराबर माना जाता है लेकिन बतौर टीम देशों के बीच जो जंग होती है उसमें पुरुषों के लिये थॉमस कप और महिलाओं के लिये उबर कप को विश्वकप के बराबर माना जा सकता है।
और पढ़ें: हैदराबाद को हरा कोलकाता ने जिंदा रखी प्लेऑफ की उम्मीदें, राम भरोसे हुई क्वालिफिकेशन की रेस

बैडमिंटन का विश्वकप है थॉमस कप
भारतीय शटलर्स ने पिछले कई सालों में निजी स्तर पर कई कीर्तिमान हासिल किये हैं लेकिन एक टीम के रूप में भारत का परचम लहराने और विश्वकप जीतने का सपना अभी भी अधूरा है। एक टीम के रूप में विश्वकप जीतने वाले टूर्नामेंट की बात करें तो भारत ने सिर्फ क्रिकेट, हॉकी और कबड्डी में ही अपना परचम लहराया है लेकिन बाकी खेलों में उसके लिये यह कारनामा करना बाकी है।
टेनिस में भारत का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन 1966, 1974 और 1987 में आया था जब भारतीय टीम ने डेविस कप के फाइनल में जगह बनाई थी लेकिन उसे तीनों बार हार का ही सामना करना पड़ा। 1949 से शुरू हुए इस टूर्नामेंट की बात करें तो पिछले 73 सालों में पहली बार भारत ने इस टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बनाई है। भारतीय बैडमिंटन के लिये यह महज उपलब्धि नहीं है बल्कि आने वाले समय की शुरूआत है जिसमें भारत इस खेल में भी अपना दबदबा बनाने की ओर देखेगा।

73 सालों में सिर्फ 5 टीमें बनी हैं चैम्पियन
थॉमस कप की बात करें तो अब तक यह टूर्नामेंट 30 बार खेला जा चुका है लेकिन अब तक इस खिताब को सिर्फ 5 टीमें ही जीत सकी हैं। 1948-49 में शुरू हुए इस टूर्नामेंट का आयोजन पहले हर 3 साल के अंतराल पर किया जाता था लेकिन 1982 में इस नियम में बदलाव कर इसे हर 2 साल के अंतराल पर आयोजित किया जाने लगा। इंडोनेशिया की टीम ने इस खिताब को अब तक 14 बार, चीन की टीम ने 10 बार, मलेशिया की टीम ने 5 बार तो वहीं पर डेनमार्क (2016) और जापान (2014) की टीम ने एक-एक बार इस खिताब को अपने नाम किया है।

43 साल पहले आया था भारत का बेस्ट प्रदर्शन
थॉमस कप में भारत के प्रदर्शन की बात करें तो 2022 से पहले उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 43 साल पहले आया था जब उसने सेमीफाइनल में पहुंचने का कारनामा किया था, हालांकि सेमीफाइनल मैच में डेनमार्क ने उसे 7-2 से हराकर बाहर कर दिया था। इसके बाद भारत को दोबारा सेमीफाइनल तक पहुंचने में 43 साल का समय लग गया। किस्मत से इस बार भी सेमीफाइनल मैच में उसका सामना डेनमार्क की टीम से हुआ।

भारत ने 43 साल बाद डेनमार्क से लिया बदला
इस सेमीफाइनल मुकाबले में डेनमार्क ने अपने रुतबे के अनुसार पहला मैच जीत लिया और भारत के खिलाफ 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। वहीं भारतीय टीम ने अगले 2 मैचों में जीत हासिल कर वापसी की और 2-1 की बढ़त ले ली लेकिन डेनमार्क ने चौथा मैच जीतकर इसे 2-2 से बराबर कर दिया। इसके बाद आखिरी मुकाबले में जीत की दावेदारी एक बार फिर से एचएस प्रणॉय के जिम्मे आ गई, जिन्होंने क्वार्टरफाइनल की तरह ही इस मैच में भी प्रणॉय ने अपनी टीम के लिये मैच जीता और 3-2 से जीत हासिल कर इतिहास रच दिया और भारत ने पहली बार इस टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बना ली।
73 साल पहले भारतीय टीम के पास पहली बार इस टूर्नामेंट का खिताब जीतकर इतिहास रचने का मौका है, लेकिन उसके लिये 14 बार की चैम्पियन टीम इंडोनिशिया की चुनौती का सामना करना होगा। फाइनल में जगह बनाकर भारत ने पहले ही इस टूर्नामेंट में अपना पहला मेडेल पक्का कर लिया है लेकिन भारतीय टीम इस खिताब को जीतने का अपना सपना पूरा कर इतिहास के नये पन्ने की शुरुआत करना चाहेगी।












Click it and Unblock the Notifications