हिमाचल में रह रहे तिब्बतियों में फैल रहा है जानलेवा रोग, भारतीयों के चपेट में आने का खतरा

शिमला। अपने देश से दूर भारत में जिंदगी बसर कर रहे तिब्बतियों की सेहत भारत में बिगड़ रही है। एक शोध में पता चला है कि ट्यूबरकुलोसिस यानि क्षय रोग जैसी घातक बीमारी ने तिब्बतियों की युवा पीढ़ी को जकड़ लिया है। तिब्बत की निर्वासित सरकार इस रिपोर्ट के आने के बाद चौकन्नी हो गई है। वहीं हिमाचल सरकार के लिए भी इस घातक बीमारी के प्रसार को रोकना चुनौती बन गया है। यह एक वायरल डिसिज है व संक्रमण से एक दूसरे में आसानी से फैलता है।

सर्वेक्षण में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

सर्वेक्षण में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

जॉन्स हॉपकिंस मेडिसिन और विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी के साथ धर्मशाला के तिब्बतियों के मशहूर डेलेक अस्पताल की ओर से कराए गए हेल्थ सर्वेक्षण में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इस सर्वेक्षण में शोधकर्ताओं का दावा है कि पांच में से एक तिब्बती बच्चा इस घातक बीमारी की चपेट में आ रहा है। लिहाजा इस पर अकुंश नहीं पाया गया तो गंभीर परिणाम देखने को मिल सकता है। ट्यूबरकुलोसिस टीबी या क्षय रोग कई बार जानलेवा भी साबित होती है। हालांकि भारत सरकार इसे खत्म करने के प्रयासों में भी जुटी है लेकिन तिब्बतियों में जिस तरीके से यह बीमारी फैल रही है, उससे अब तिब्बती आबादी के पास रहने वाले भारतीयों को भी इस रोग के चपेट में आने का खतरा पैदा हो गया है। चूंकि यह रोग संक्रमण से फैलता है।

तेजी से फैल रहा है यह रोग

तेजी से फैल रहा है यह रोग

बताया जा रहा है कि हाल ही में जॉन्स हॉपकिंस मेडिसिन और विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी के शोधकताओं ने तिब्बती किड्स प्रोजेक्ट में शून्य टीबी के तहत उत्तरी भारत के स्कूलों में तिब्बती शरणार्थी बच्चों की स्वास्थ्य जांच की तो पता चला कि तिब्बतियों में यह रोग फैल रहा है। इसमें डेलेक अस्पताल ने भी अहम भूमिका निभाई। शोधकर्ताओं ने कहा है कि शोध से न केवल टीबी रोग और संक्रमण के विषय में चौंकाने वाले आकड़े मिले है, बल्कि बड़े, उच्च जोखिम वाले समूह में बीमारी को खत्म करने के लिए संभावित रूप से व्यावहारिक जानकारी भी मिली है।

भारतीयों को भी है इससे खतरा

भारतीयों को भी है इससे खतरा

शोधकर्ताओं का कहना है कि हमारी नवीन पहल में भारत में एक जोखिम वाली आबादी में टीबी को नियंत्रित करने और खत्म करने के लिए बहुआयामी रणनीति के हिस्से के रूप में टीबी निवारक थेरेपी के कार्यान्वयन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हमे दलाई लामा और स्थानीय लोगों के सहयोग से क्षय रोग जैसी बिमारी को रोकने में मदद मिली है और भविष्य में भी इस बिमारी के उन्मूलन पर भी हम काम करते रहेंगे। इस बीच हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री बिपन सिंह परमार ने कहा कि यह चिंतनीय विषय है व प्रदेश सरकार इस बारे में निर्वासित सरकार से संपर्क साधेगी ताकि बीमारी को रोका जा सके।

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