MP Weather: सतना जिले में फिर बिगड़ा मौसम, बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि
MP Weather: सतना जिले में 26 मार्च रविवार की दोपहर एक बार फिर में तेज हवा और वर्षा के साथ ओलावृष्टि हुई। जिससे गेहूं और चने की फसल को काफी नुकसान हुआ है। इससे पहले 19 मार्च को भी इसी तरह आंधी,वर्षा और ओलावृष्टि हुई थी।

सतना जिले में एक बार फिर मौषम ने करवट ली और तेज हवाओं के साथ जोरदार बारिश ओलावृष्टि हुई है। जिससे किसानों के खेतों में खड़ी और खलिहानों में रखी फसलें बर्बाद हो गई है। 26 मार्च की दोपहर जिले के अमरपाटन, रामनगर मैहर, नागौद क्षेत्र में जोरदार बारिश के साथ ओले गिरे हैं। वहीं, जैतवारा, मझगवां, कोटर, और बिरसिंहपुर क्षेत्र में जोरदार बारिश हुई। ओला वृष्टि से फसलें चौपट हो गई है।
जोरदार वर्षा और ओलावृष्टि से खेतों में लगी और खलिहानों में कटी फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। जिले मेंं मसूर, चना,गेहूं, सरसों और अरहर की फसल प्रभावित हुई है। कई जगह खलिहानों तक पहुंच गई दलहनी फसले भी भीग गई है।
बता दें कि पिछले दिनों भी सतना जिले के कई क्षेत्र में जोरदार वर्षा के साथ ओला वृष्टि हुई थी। प्रशासन ने मौसम की मार से फसलों को पहुंचे नुकसान का सर्वे शुरू कराया था। राजस्व विभाग की टीम खेतों में उतरी थी लेकिन तब नुकसान का प्रतिशत कम था लेकिन 26 मार्च की बारिश और ओलावृष्टि को देख कर भारी नुकसान की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।
मैहर तहसील के ग्राम बुढ़ेरुआ के किसान अजय सिंह ने जानकारी दी कि मसूर, चना,की फसलों की लगभग कटाई हो चुकी है। खेतों में अभी सरसो, गेहूं, प्याज की फसलें लगी हैं। 26 मार्च की दोपहर अचानक मौसम बदला, फिर जोरदार बारिश के साथ जबरदस्त ओलावृष्टि शुरू हो गई। करीब 10 मिनट तक बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। इससे गेहूं खेतों में बिछ गया। अधिकतर गेहूं पक गया था। ओले लगने से गेहूं की बालियां टूट कर बिखर गई है। काफी नुकसान हुआ है। सरकार को जल्द से जल्द खेतों का सर्वे कराकर नुकसान का मुआवजा देना चाहिए। नहीं किसानों का जीवन यापन चलाना मुश्किल हो जाएगा।
मैहर तहसील के जरियारी, नादन, बुढ़ेरुआ के आपसपास गांवों में ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचाई है। खेत में लगी फसलें चौपट हो गईं। सबसे अधिक नुकसान गेहूं, प्याज की फसल को हुआ है। इन क्षेत्रों में अभी गेहूं की कटाई भी शुरू नहीं हुई थी। इससे पहले ओलावृष्टि हो गई। किसान अजय दहायत ने जानकारी दी कि ओलावृष्टि से इतना नुकसान हुआ कि अब फसल की कटाई का खर्च तक नहीं निकल पाएगा। खेत खलिहान पर ही फसल छोड़ना पड़ेगा।












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